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Navratri Rules: नवरात्र में क्यों छोड़ा जाता है सफेद नमक? जानिए सेंधा नमक खाने के पीछे का असली कारण

Sendha Namak Niyam: नवरात्र के व्रत में लोग साधारण नमक का इस्तेमाल नहीं करते हैं सेंधा बल्कि सेंधा नमक का उपयोग करते है,अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे  का धार्मिक आस्था और स्वास्थ्य से जुड़े कारणों के बारे में.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 18, 2026 17:26:16 IST

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Navratri Rules: नवरात्र का पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आत्मसंयम, साधना और शुद्ध जीवनशैली अपनाने का भी समय माना जाता है. इन नौ दिनों में लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं,कोई फलाहार करता है, कोई एक समय भोजन करता है तो कुछ लोग सिर्फ जल पर ही रहते हैं. लेकिन एक बात लगभग हर व्रत में समान होती है-साधारण नमक से परहेज और सेंधा नमक का इस्तेमाल.

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? जब नमक तो नमक ही है, तो फिर सफेद नमक क्यों नहीं और सेंधा नमक ही क्यों? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं.

साधारण नमक और सेंधा नमक में क्या है अंतर?

सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला सफेद नमक समुद्र के पानी से तैयार किया जाता है और इसे कई रासायनिक व औद्योगिक प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. इसे साफ करने, आयोडीन मिलाने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के तत्व इसमें जोड़े जाते हैं. यही वजह है कि इसे पूरी तरह प्राकृतिक नहीं माना जाता.इसके विपरीत, सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से चट्टानों से प्राप्त होता है, खासकर हिमालयी क्षेत्रों से. यह बिना ज्यादा प्रोसेसिंग के सीधे उपयोग में लाया जाता है, इसलिए इसे ज्यादा शुद्ध और प्राकृतिक माना जाता है. इसी कारण व्रत के दौरान इसे खाने योग्य माना जाता है.

धार्मिक दृष्टि से क्यों है सेंधा नमक खास?

हिंदू परंपरा में व्रत का मुख्य उद्देश्य शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखना होता है. इस दौरान सात्विक आहार लेने पर जोर दिया जाता है, ताकि व्यक्ति का मन शांत रहे और वह ध्यान व पूजा में एकाग्र हो सके.साधारण नमक को कृत्रिम और तामसिक माना जाता है, जबकि सेंधा नमक को सात्विक और शुद्ध. मान्यता है कि सेंधा नमक से बना भोजन मन को शांत रखता है और भक्ति में बाधा नहीं डालता. यही कारण है कि नवरात्र जैसे पवित्र अवसर पर लोग सेंधा नमक को प्राथमिकता देते हैं.

वैज्ञानिक नजरिए से भी है फायदेमंद

अगर इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें, तो व्रत के दौरान जब हम नियमित भोजन नहीं करते, तब शरीर में जरूरी मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. सेंधा नमक में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं.यह पाचन को बेहतर बनाता है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. वहीं, सामान्य नमक में इन पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है.

व्रत में संतुलन और संयम है जरूरी

हालांकि सेंधा नमक को व्रत में उपयोगी माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे अधिक मात्रा में लिया जाए. नमक चाहे कोई भी हो, सीमित मात्रा में ही सेवन करना बेहतर होता है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 18, 2026 17:26:16 IST

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Navratri Rules: नवरात्र का पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आत्मसंयम, साधना और शुद्ध जीवनशैली अपनाने का भी समय माना जाता है. इन नौ दिनों में लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं,कोई फलाहार करता है, कोई एक समय भोजन करता है तो कुछ लोग सिर्फ जल पर ही रहते हैं. लेकिन एक बात लगभग हर व्रत में समान होती है-साधारण नमक से परहेज और सेंधा नमक का इस्तेमाल.

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? जब नमक तो नमक ही है, तो फिर सफेद नमक क्यों नहीं और सेंधा नमक ही क्यों? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं.

साधारण नमक और सेंधा नमक में क्या है अंतर?

सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला सफेद नमक समुद्र के पानी से तैयार किया जाता है और इसे कई रासायनिक व औद्योगिक प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. इसे साफ करने, आयोडीन मिलाने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के तत्व इसमें जोड़े जाते हैं. यही वजह है कि इसे पूरी तरह प्राकृतिक नहीं माना जाता.इसके विपरीत, सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से चट्टानों से प्राप्त होता है, खासकर हिमालयी क्षेत्रों से. यह बिना ज्यादा प्रोसेसिंग के सीधे उपयोग में लाया जाता है, इसलिए इसे ज्यादा शुद्ध और प्राकृतिक माना जाता है. इसी कारण व्रत के दौरान इसे खाने योग्य माना जाता है.

धार्मिक दृष्टि से क्यों है सेंधा नमक खास?

हिंदू परंपरा में व्रत का मुख्य उद्देश्य शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखना होता है. इस दौरान सात्विक आहार लेने पर जोर दिया जाता है, ताकि व्यक्ति का मन शांत रहे और वह ध्यान व पूजा में एकाग्र हो सके.साधारण नमक को कृत्रिम और तामसिक माना जाता है, जबकि सेंधा नमक को सात्विक और शुद्ध. मान्यता है कि सेंधा नमक से बना भोजन मन को शांत रखता है और भक्ति में बाधा नहीं डालता. यही कारण है कि नवरात्र जैसे पवित्र अवसर पर लोग सेंधा नमक को प्राथमिकता देते हैं.

वैज्ञानिक नजरिए से भी है फायदेमंद

अगर इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें, तो व्रत के दौरान जब हम नियमित भोजन नहीं करते, तब शरीर में जरूरी मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. सेंधा नमक में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं.यह पाचन को बेहतर बनाता है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. वहीं, सामान्य नमक में इन पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है.

व्रत में संतुलन और संयम है जरूरी

हालांकि सेंधा नमक को व्रत में उपयोगी माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे अधिक मात्रा में लिया जाए. नमक चाहे कोई भी हो, सीमित मात्रा में ही सेवन करना बेहतर होता है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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