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Jware Visarjan Rules: नवरात्रि के बाद कब करें जवारे विसर्जन? जानिए शास्त्रों के अनुसार सही तरीका और मंत्र

Jware Visarjan Rules: चैत्र नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना करने के बाद अंतिम चरण में जवारे (जौ) का विसर्जन किया जाता है. हिंदू परंपरा में जवारे को समृद्धि, खुशहाली और शुभ संकेत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि यदि जवारे अच्छे से बढ़ते हैं, तो यह माता रानी की विशेष कृपा का संकेत होता है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 27, 2026 19:20:44 IST

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Jware Visarjan date 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि का समापन दशमी तिथि पर करना अधिक शुभ माना जाता है.हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में सवाल है कि विसर्जन नवमी को करें या दशमी को. साल 2026 में दशमी तिथि 28 मार्च को पड़ रही है, इसलिए इस दिन सुबह के समय शुभ मुहूर्त में जवारे विसर्जन करना उत्तम रहेगा.हालांकि कुछ लोग नवमी के दिन हवन के बाद भी विसर्जन कर देते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार दशमी का दिन अधिक फलदायी माना गया है.

जवारे विसर्जन नवरात्रि पूजा का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण होता है. यदि इसे सही समय और विधि से किया जाए, तो माता रानी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है. इसलिए जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरे नियम और श्रद्धा के साथ विसर्जन करें.विसर्जन करने से पहले कुछ जरूरी पूजा विधियां पूरी करना बेहद आवश्यक होता है, ताकि आपकी साधना का पूरा फल मिल सके.

जवारे विसर्जन से पहले क्या करें?

  •  सबसे पहले जवारे की धूप-दीप, अक्षत और फूल से विधिवत पूजा करें.
  •  मां दुर्गा की आरती करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें.
  •  पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए माता से क्षमा याचना जरूर करें.

जवारे विसर्जन की सही विधि

जवारे विसर्जन करते समय श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखना जरूरी होता है.

  •  जवारे के पात्र को सम्मानपूर्वक सिर पर या हाथ में उठाएं.
  •  इसके बाद किसी पवित्र नदी, तालाब या जल स्रोत के पास जाएं.
  •  शांत मन से माता का स्मरण करते हुए जवारे को जल में प्रवाहित करें.

विसर्जन के समय बोले जाने वाला मंत्र

जवारे विसर्जन करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है-

  • “गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि.
    पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च..”
  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके.
      शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता.
      नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 27, 2026 19:20:44 IST

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Jware Visarjan date 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि का समापन दशमी तिथि पर करना अधिक शुभ माना जाता है.हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में सवाल है कि विसर्जन नवमी को करें या दशमी को. साल 2026 में दशमी तिथि 28 मार्च को पड़ रही है, इसलिए इस दिन सुबह के समय शुभ मुहूर्त में जवारे विसर्जन करना उत्तम रहेगा.हालांकि कुछ लोग नवमी के दिन हवन के बाद भी विसर्जन कर देते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार दशमी का दिन अधिक फलदायी माना गया है.

जवारे विसर्जन नवरात्रि पूजा का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण होता है. यदि इसे सही समय और विधि से किया जाए, तो माता रानी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है. इसलिए जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरे नियम और श्रद्धा के साथ विसर्जन करें.विसर्जन करने से पहले कुछ जरूरी पूजा विधियां पूरी करना बेहद आवश्यक होता है, ताकि आपकी साधना का पूरा फल मिल सके.

जवारे विसर्जन से पहले क्या करें?

  •  सबसे पहले जवारे की धूप-दीप, अक्षत और फूल से विधिवत पूजा करें.
  •  मां दुर्गा की आरती करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें.
  •  पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए माता से क्षमा याचना जरूर करें.

जवारे विसर्जन की सही विधि

जवारे विसर्जन करते समय श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखना जरूरी होता है.

  •  जवारे के पात्र को सम्मानपूर्वक सिर पर या हाथ में उठाएं.
  •  इसके बाद किसी पवित्र नदी, तालाब या जल स्रोत के पास जाएं.
  •  शांत मन से माता का स्मरण करते हुए जवारे को जल में प्रवाहित करें.

विसर्जन के समय बोले जाने वाला मंत्र

जवारे विसर्जन करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है-

  • “गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि.
    पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च..”
  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके.
      शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता.
      नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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