Neem Karoli Baba Real Name: क्या आप जानते हैं कि कैंची धाम वाले नीम करौली बाबा का असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था और कैसे इनका नाम नीम करौली बाबा पड़ा? जानिए ट्रेन वाले उस अद्भुत चमत्कार और फर्रुखाबाद के नीब करौरी गांव से जुड़ा पूरा रहस्य, जिसने एक साधारण इंसान को करोड़ों लोगों का आस्था का केंद्र बना दिया.
लक्ष्मण नारायण शर्मा कैसे बने नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा का नाम आते ही मन में एक अजीब सी शांति और श्रद्धा का भाव जाग उठता है. भगवान हनुमान के सच्चे भक्त माने जाने वाले बाबा का पूरा जीवन सादगी, निस्वार्थ सेवा और भक्ति का प्रतीक था. आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उनके लाखों भक्त हैं. उत्तराखंड का कैंची धाम उनकी आध्यात्मिक विरासत का सबसे बड़ा केंद्र है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका असली नाम क्या था और कैसे एक साधारण व्यक्ति ‘नीम करौली बाबा’ के नाम से मशहूर हो गया? आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी.
बाबा का असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था. उनके नाम के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और लोकप्रिय किस्सा जुड़ा है. कहा जाता है कि एक बार बाबा ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे. टीटीई ने जब उनसे टिकट मांगा, तो उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद उत्तर प्रदेश के एक छोटे से स्टेशन पर उन्हें ट्रेन से नीचे उतार दिया गया.
हैरानी की बात यह हुई कि बाबा के उतरते ही ट्रेन आगे बढ़ी ही नहीं. ड्राइवर ने काफी कोशिश की, लेकिन ट्रेन टस से मस न हुई. वहां मौजूद लोगों और यात्रियों के कहने पर बाबा को सम्मानपूर्वक वापस ट्रेन में बैठाया गया. बाबा के ट्रेन में चढ़ते ही गाड़ी तुरंत चल पड़ी. जिस स्टेशन पर यह घटना हुई, उसका नाम ‘नीम करौली’ (Neem Karoli) था. भक्तों का मानना है कि इसी घटना के बाद लोग उन्हें ‘नीम करौली बाबा’ कहने लगे.
नीम करौली बाबा से जुड़ा ट्रेन का यह किस्सा 1920 के दशक (लगभग 1920 से 1925 के बीच) का माना जाता है, जो भारत की आज़ादी से काफी पहले की बात है. उस समय देश ब्रिटिश शासन के अधीन था और आज़ादी नहीं मिली थी.
यूं तो उन्हें पूरी दुनिया में ‘नीम करोली बाबा’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन कई जगह उन्हें ‘नीब करौरी बाबा’ (Neeb Karori Baba) भी कहा जाता है.
दरअसल, उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में ‘नीब करौरी’ नाम का एक गांव है. कहा जाता है कि बाबा ने इसी गांव में एक गुफा के अंदर कठिन तपस्या की थी. इस वजह से वहां के स्थानीय लोग और शुरुआती भक्त उन्हें गांव के नाम पर ‘नीब करौरी बाबा’ पुकारने लगे. धीरे-धीरे समय के साथ ‘नीब करौरी’ शब्द आम बोलचाल और मीडिया में ‘नीम करोली’ बन गया और यही नाम हर जगह लोकप्रिय हो गया.
नीम करौली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में करीब 1900 के आसपास हुआ था. बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर बताया जाता है. कहा जाता है कि महज 12 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी. इसके बावजूद उनका मन सांसारिक जीवन में ज्यादा नहीं लगा और आगे चलकर उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया.
Air India Express: एयर इंडिया एक्सप्रेस की कोच्चि से अबू धाबी जा रही फ्लाइट IX…
प्रलय के सेट से रणवीर सिंह की पहली झलक ऑनलाइन सामने आई है, जिससे प्रशंसकों…
Dating App Fraud: डेटिंग ऐप्स पर बढ़ते फेक प्रोफाइल, AI से बनी तस्वीरों, रोमांस फ्रॉड,…
Baghpat Road Accident: राजस्थान से बदायूं जा रही पिकअप डिवाइडर से टकराकर पलटी. इस हादसे…
'द फैमिली मैन' के चौथे सीज़न पर आधिकारिक तौर पर काम शुरू हो चुका है,…
Diljit Dosanjh Viral Video: ऑरा वर्ल्ड टूर के इटली कॉन्सर्ट में दिलजीत ने फैन की…