Nirjala Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में सभी धार्मिक व्रत-त्योहारों का अपना-अपना महत्व है. एकादशी का व्रत भी इनमें से एक है. बता दें कि, साल में होने वाली सभी 24 एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है. एकादशी तिथि के दिन विष्णु भगवान की पूजा अर्चना, पूजा पाठ, स्तोत्र आदि का पाठ करने का विधान बताया गया है. ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष में होने वाली एकादशी का सबसे अधिक महत्व बताया गया है. एकादशी में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे उत्तम फलदायी माना जाता है, इस वजह से इस व्रत का पूरे वर्षभर लोगों को इंतजार रहता है. अब सवाल है कि, निर्जला एकादशी व्रत कब है? निर्जला एकादशी का मुहूर्त और महत्व क्या है? निर्जला एकादशी व्रत का पारण समय क्या है? निर्जला एकादशी का पांडवों से क्या है संबंध? आइए जानते हैं इस बारे में-
निर्जला एकादशी का पांडवों से संबंध?
धर्मिक कथा के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत का संबंध महाभारत काल से भी है. बता दें कि, पांच पांडवों में भीमसेन को कभी भूख बर्दाश्त नहीं होती थी. वे किसी भी दिन खाए बिना नहीं रह सकते थे. इसके बावजूद उन्होंने सबसे कठिन निर्जला एकादशी का व्रत रखा था. आप एक बार निर्जला एकादशी व्रत रखकर जो पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं, उतना साल की सभी एकादशी व्रतों को रखने से प्राप्त होता है.
निर्जला एकादशी का व्रत कठिन क्यों?
निर्जला एकादशी के नाम से ही आप जान सकते हैं कि वो एकदशी व्रत, जो बिना जल का हो. निर्जला एकादशी के व्रत में पानी भी नहीं पीते हैं. अन्न, फल सब का त्याग करना होता है. पूरी एकादशी तिथि में बिना जल के उपवास करना होता है. एकादशी के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक यह उपवास रखा जाता है. यह भी व्रत भीषण गर्मी के समय में होता है, इस वजह से बड़ा कठिन हो जाता है.
निर्जला एकादशी का महत्व
जो लोग निर्जला एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके समस्त पाप मिट जाते हैं. उन पर भगवान विष्णु की कृपा होती है, जिससे उनको मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत रखता है, उसे पूरे साल के सभी एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ एकसाथ प्राप्त हो जाता है. इस वजह से लोगों को निर्जला एकादशी व्रत का पूरे साल इंतजार रहता है.
निर्जला एकादशी 2026 तारीख
पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी के लिए आवश्यक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून बुधवार को शाम 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि 25 मार्च दिन गुरुवार को रात 8 बजकर 9 मिनट तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को है.
निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त
निर्जला एकादशी पर शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से लेकर 07:10 ए एम तक है. इस समय में आप एकादशी पूजा कर सकते हैं. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से 04:45 ए एम तक और अभिजाीत मुहूर्त 11:56 ए एम से 12:52 पी एम तक रहेगा.
निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा रवि योग में होगी. उस दिन रवि योग सुबह में 05:25 ए एम पर बनेगा और शाम को 04:29 पी एम तक रहेगा.
निर्जला एकादशी 2026 पारण समय
जो लोग 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगे, वे पारण 26 जून को सुबह में 5 बजकर 25 मिनट से सुबह 8 बजकर 13 मिनट के बीच कर सकते हैं. उस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात में 10 बजकर 22 मिनट पर होगा.