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Papamochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी पर विष्णु पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान? जानें जरूरी नियम और उपाय

Papamochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी 2026 इस साल रविवार, 15 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन उन पापों और कर्मों से मुक्ति पाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है, इस एकादशी का मुख्य उद्देश्य है उपवास करना, भगवान विष्णु की पूजा करना ,आइए जानते हैं विस्तार से.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 12, 2026 13:20:06 IST

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Papamochani Ekadashi 2026: ‘पापमोचनी’ शब्द का अर्थ होता है पापों से मुक्ति दिलाने वाली. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.एकादशी का व्रत आमतौर पर द्वादशी तिथि के दिन पारण (व्रत खोलने) के साथ पूरा किया जाता है. 

इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी मन, शरीर और आत्मा-तीनों की शुद्धि का अवसर देती है. इस दिन तीन प्रकार की शुद्धि पर जोर दिया जाता है.

  • मानसिक शुद्धि- अपने दोषों को स्वीकार करना और क्षमा मांगना
  • शारीरिक शुद्धि-  उपवास के माध्यम से शरीर को संयम में रखना
  • आध्यात्मिक शुद्धि-  मंत्र जप, पूजा और ध्यान के माध्यम से

इस दिन भक्त अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला व्रत, फलाहार व्रत या साधारण व्रत भी रख सकते हैं.

 पापमोचनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि शुरू: 14 मार्च 2026, सुबह 08:10 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च 2026, सुबह 09:16 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:55 से 05:43 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 तक

व्रत पारण (व्रत खोलने का समय)

16 मार्च 2026 को सुबह 06:30 से 08:54 बजे तक

 पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पुराणों में बताया गया है कि यह एकादशी सभी पापों को नष्ट करने वाली मानी जाती है. पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है.कथा के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के नकारात्मक कर्मों से मुक्ति मिलती है.यह एकादशी फाल्गुन या चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है और होली से पहले आती है, इसलिए इसे एक तरह से आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर भी माना जाता है.

पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें.

पूजा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • घर के मंदिर को साफ करें और भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  •  घी का दीपक और धूप जलाएं
  •  भगवान को चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करें.
  •  फल, मिठाई या फलाहार का भोग लगाएं.
  •  विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर

     पापमोचनी एकादशी व्रत में क्या करें

  •  भगवान विष्णु का नाम जपें
  • तुलसी के पत्ते अर्पित करें
  •  दान-पुण्य करें
  •  जरूरतमंदों की मदद करें

 पापमोचनी एकादशी पर क्या न करें

  • अनाज, चावल और दाल का सेवन न करें
  •  मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 12, 2026 13:20:06 IST

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Papamochani Ekadashi 2026: ‘पापमोचनी’ शब्द का अर्थ होता है पापों से मुक्ति दिलाने वाली. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.एकादशी का व्रत आमतौर पर द्वादशी तिथि के दिन पारण (व्रत खोलने) के साथ पूरा किया जाता है. 

इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी मन, शरीर और आत्मा-तीनों की शुद्धि का अवसर देती है. इस दिन तीन प्रकार की शुद्धि पर जोर दिया जाता है.

  • मानसिक शुद्धि- अपने दोषों को स्वीकार करना और क्षमा मांगना
  • शारीरिक शुद्धि-  उपवास के माध्यम से शरीर को संयम में रखना
  • आध्यात्मिक शुद्धि-  मंत्र जप, पूजा और ध्यान के माध्यम से

इस दिन भक्त अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला व्रत, फलाहार व्रत या साधारण व्रत भी रख सकते हैं.

 पापमोचनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि शुरू: 14 मार्च 2026, सुबह 08:10 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च 2026, सुबह 09:16 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:55 से 05:43 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 तक

व्रत पारण (व्रत खोलने का समय)

16 मार्च 2026 को सुबह 06:30 से 08:54 बजे तक

 पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पुराणों में बताया गया है कि यह एकादशी सभी पापों को नष्ट करने वाली मानी जाती है. पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है.कथा के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के नकारात्मक कर्मों से मुक्ति मिलती है.यह एकादशी फाल्गुन या चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है और होली से पहले आती है, इसलिए इसे एक तरह से आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर भी माना जाता है.

पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें.

पूजा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • घर के मंदिर को साफ करें और भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  •  घी का दीपक और धूप जलाएं
  •  भगवान को चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करें.
  •  फल, मिठाई या फलाहार का भोग लगाएं.
  •  विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर

     पापमोचनी एकादशी व्रत में क्या करें

  •  भगवान विष्णु का नाम जपें
  • तुलसी के पत्ते अर्पित करें
  •  दान-पुण्य करें
  •  जरूरतमंदों की मदद करें

 पापमोचनी एकादशी पर क्या न करें

  • अनाज, चावल और दाल का सेवन न करें
  •  मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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