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Home > धर्म > 19 या 20, कब है परशुराम जयंती? गलत दिन पूजा करने से छूट सकता है शुभ फल, जानें सही मुहूर्त

19 या 20, कब है परशुराम जयंती? गलत दिन पूजा करने से छूट सकता है शुभ फल, जानें सही मुहूर्त

Parshuram Jayanti 2026:परशुराम जयंती के लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है,लेकिन परशुराम जयंती 2026 के सही तारीख को लेकर लोगों में कन्फयूज हैं,तो आइए जानते हैं सही तारीख और मुहूर्त के बारे में.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-04-12 15:28:40

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Parshuram Jayanti 2026: हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की सही तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है. कुछ लोग इसे 19 अप्रैल को मान रहे हैं, जबकि कई लोग 20 अप्रैल को मनाने की बात कर रहे हैं, क्योंकि इसी दिन अक्षय तृतीया भी पड़ रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सही दिन कौन सा है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है. लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका जन्म प्रदोष काल यानी संध्या समय में हुआ माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. ऐसे में प्रदोष काल 19 अप्रैल को पड़ने के कारण इसी दिन परशुराम जयंती मनाना अधिक उचित माना गया है.

परशुराम जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष पूजन के लिए सबसे शुभ समय 19 अप्रैल की शाम 6 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है. इस दौरान श्रद्धा के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है.

 कैसे करें परशुराम जयंती का पूजन

इस दिन घर पर भी सरल तरीके से पूजा की जा सकती है. सबसे पहले एक साफ स्थान पर चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान परशुराम की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें. फिर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें. इसके बाद तिलक लगाएं, अक्षत और फूल अर्पित करें. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में भगवान से अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और अन्य लोगों में बांटना शुभ माना जाता है.

 इस दिन पूजा करने के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परशुराम जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस और शक्ति का विकास होता है. आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक शांति का अनुभव होता है. साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी मजबूत होती है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-04-12 15:28:40

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Parshuram Jayanti 2026: हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की सही तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है. कुछ लोग इसे 19 अप्रैल को मान रहे हैं, जबकि कई लोग 20 अप्रैल को मनाने की बात कर रहे हैं, क्योंकि इसी दिन अक्षय तृतीया भी पड़ रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सही दिन कौन सा है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है. लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका जन्म प्रदोष काल यानी संध्या समय में हुआ माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. ऐसे में प्रदोष काल 19 अप्रैल को पड़ने के कारण इसी दिन परशुराम जयंती मनाना अधिक उचित माना गया है.

परशुराम जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष पूजन के लिए सबसे शुभ समय 19 अप्रैल की शाम 6 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है. इस दौरान श्रद्धा के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है.

 कैसे करें परशुराम जयंती का पूजन

इस दिन घर पर भी सरल तरीके से पूजा की जा सकती है. सबसे पहले एक साफ स्थान पर चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान परशुराम की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें. फिर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें. इसके बाद तिलक लगाएं, अक्षत और फूल अर्पित करें. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में भगवान से अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और अन्य लोगों में बांटना शुभ माना जाता है.

 इस दिन पूजा करने के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परशुराम जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस और शक्ति का विकास होता है. आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक शांति का अनुभव होता है. साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी मजबूत होती है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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