Wolf Supermoon 2026: आज पौष पूर्णिमा (Paush Purnima 2026) है और यह दिन धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज चंद्रमा अपनी पूरी कलाओं के साथ आकाश में होता है और इस दौरान चंद्रमा की किरणें अमृत के समान मानी जाती है. वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार, पूर्णिमा के दिन, सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं. ऐसा होने से सूर्य का प्रकाश चंद्रमा के पूरे हिस्से पर पड़ता है, जिसे हम पृथ्वी से देखते तो वो पूरा गोल और चमकदार दिखता है. ऐसे में आज यानी साल की पहली पूर्णिमा (First Full Moon Of 2026) के दिन आसमान में बेहद खूबसूरत और अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जिसे वुल्फ सुपरमून कहा जाता है. पौष पूर्णिमा के दिन चांद आम दिनों से ज्यादा बड़ा और चमकदार होता है, जो दिखने में हद से ज्यादा सुंदर लगता है. आइये जानते है यहां कि पौष पूर्णिमा के चांद को वुल्फ सुपरमून क्या कहा जाता है, क्या भेड़ियों से वुल्फ सुपरमून का कोई संबंसध है या नहीं?
पौष पूर्णिमा के चांद को वुल्फ सुपरमून क्या कहा जाता है? (Why Is The Paush Full Called Wolf Supermoon?)
जब जनवरी की कड़ाके की ठंड में रातों के समय आसमान में पूरा चांद आम दिनों से ज्यादा खूबसूरत और चमकदार दिखाई दिया है, उसे वुल्फ सुपरमून (Wolf Supermoon 2026) कहा जाता. साल के पहले फुल मून का यह नजारा जीतना खूबसूरत और अद्भुत होता है, उतनी ही ज्यादा रहस्यमय भी होता है. दरअस, “वुल्फ मून” नाम का संबंध सीधे भेड़ियों (Wolves) से जुड़ता है। प्राचीन समय के दौरान, खआसकर मेरिका और यूरोप में जनवरी की थरथराती सर्दियों में भेड़िए खाने की तलाश में गांवों घुस जाते थे, जिसकी वजह से रात में उनकी आवाजें बेहद जोरो से सुनाई देती थी और यही समय होता था जब आसमान में चमकता पूरा चांद दिखाई देता था, यही वजह है कि इस जनवरी में आने वाली पहली पूर्णिमा (Paush Purnima 2026) यानी साल की पहली पूर्णिमा को वुल्फ मून के नाम से जाना जाने लगा.
पूर्णिमा के चांद को सुपरमून क्यों कहलाता है? (Why Is The Full Moon Called A Supermoon?)
पूर्णिमा के दिन चांद पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु (Perigee) पर होता है, तो दौरान चांद सामान्य से करीब 10–15% बड़ा और ज्यादा चमकदार नजर आता है और इस दौरान चंद्रमा की किरणें बेहद शक्तिशाली होती हैं, जिसकी वजह से पूर्णिमा के चांद को सुपरमून (Supermoon 2026) कहा जाता है.
क्या है वुल्फ सुपरमून का धार्मिक या पारंपरिक महत्व? (Does The Wolf Supermoon Have Any Religious Or Traditional Significance?)
हिंदू धर्म में पूर्णिमा की तिथि को बेहद शुभ माना जाता है और इस दिन व्रत, पूजा, ध्यान और दान करने की परंपरा है। पूर्णिमा के दिन लोग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. पूरे दिन व्रत रखते हैं, शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी बेहद महत्व है. मान्यताों के अनुसार ऐसा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. साथ ही कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है. भले ही पौष पूर्णिमा (Paush Purnima 2026) को वुल्फ सुपरमून (Wolf Supermoon 2026) कहा जाता है, जो पश्चिमी नाम है, लेकिन जनवरी की पूर्णिमा भारतीय परंपरा के अनुसार नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।
किन राशियों पर पड़ेगा आज वुल्फ सुपरमून का असर? (Which Zodiac Signs Will Be Affected By Wolf Supermoon 2026?)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सुपरमून भावनाओं को तेज करता है वहीं चांद मन का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे मेंं 2026 के पहला सुपरमून का प्रभाव इन राशियों पर ज्यादा देखने को मिल सकता है:
कर्क राशि (Cancer)- आत्म-चिंतन, भावनात्मक गहराई और बड़े बदलाव का है समय
वृश्चिक राशि (Scorpio) – पुराने रिश्तों और यादों से जुड़ी भावनाएं आप पर भारी हो सकती है
मकर राशि (Capricorn) – करियर से जुड़े कोई बड़े फैसले आप आज ले सकते हैं
मीन राशि (Pisces) – भावनात्मक रूप से संवेदनशील महसूस करेंगे.
भारत के कौन-से शहर में दिखेंगा 2026 का पहला सुपरमून?
यह सुपरमून पूरे भारत में दिखाई देगा, खासकर शहरों में इसका नजारा बेहद शानदार दिखाई देगा. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, पटना, भोपाल, चंडीगढ़, अहमदाबाद समेत लगभग सभी बड़े और छोटे शहरों में आप 2026 का पहला सुपरमून देख सकते हैं.
आज चांद कब निकलेगा? (Today Moonrise Timing)
2026 के ‘वुल्फ मून’ को आप शाम 5:45 से 6:00 बजे करीब देख सकते हैं. चांद निकलने का समय (Today Moonrise Timing) हर शहर में थोड़ा अलग हो सकता है.
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