Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन के मौके पर लता मंगेशकर की आवाज में 1959 की फिल्म 'छोटी बहन' का गीत 'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना' आज भी भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं को बखूबी व्यक्त करता है. शैलेंद्र के सरल बोल और शंकर-जयकिशन के संगीत ने इस गीत को यादगार बना दिया.
रक्षाबंधन पर आज भी गूंजता है लता मंगेशकर का ये गीत
Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन आते ही भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े कई पुराने गीत याद आने लगते हैं, लेकिन कुछ गाने ऐसे हैं जो हर पीढ़ी के साथ नए सिरे से जुड़ जाते हैं. स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की आवाज में ऐसा ही एक गीत है ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’. साल 1959 में आई फिल्म ‘छोटी बहन’ का यह गीत आज भी रक्षाबंधन के मौके पर उतना ही खास लगता है, जितना अपने दौर में था.
गीत किसी प्रेम कहानी या रोमांटिक रिश्ते पर आधारित नहीं है, बल्कि भाई-बहन के उस मासूम और भावुक रिश्ते को सामने लाता है, जिसमें प्यार के साथ नोकझोंक और अपनापन भी शामिल है. गीत में एक बहन अपने भाई से राखी के बंधन को हमेशा निभाने और उसे कभी न भूलने की भावुक अपील करती है. गीत के बोल ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना, भैया मेरे छोटी बहन को न भुलाना’ सीधे तौर पर बहन की भावनाओं को व्यक्त करते हैं. यही सादगी इस गीत को रक्षाबंधन के सबसे यादगार गीतों में शामिल करती है.
इस गीत को मशहूर गीतकार शैलेंद्र ने लिखा था. उन्होंने बहन के मन की बात कहने के लिए भारी-भरकम शब्दों का सहारा नहीं लिया. बोल बेहद सरल हैं, लेकिन उनमें भाई के प्रति बहन का विश्वास, प्यार और अपनेपन की भावना साफ नजर आती है. गीत का संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था, जबकि लता मंगेशकर की आवाज ने इसकी भावनाओं को एक अलग ऊंचाई दी. उनकी आवाज में गीत की मासूमियत और भावुकता आज भी सुनने वालों को भावुक कर देती है.
‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ फिल्म ‘छोटी बहन’ का हिस्सा था. कहानी और गीत दोनों ही भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक गहराई को सामने लाते हैं. यही वजह है कि समय बीतने के बावजूद यह गाना रक्षाबंधन के मौके पर लोगों की पसंद बना हुआ है. इस गीत की लोकप्रियता का एक मजेदार पहलू भी है. कई बार छोटी बहनों को चिढ़ाने के लिए लोग इसके बोल को बदलकर ‘छोटी बहन को न बुलाना’ कहकर गाने लगते हैं. असल गीत में हालांकि भाई से छोटी बहन को न भूलने की गुजारिश की गई है.
रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव का दिन भी है. यही भाव लता मंगेशकर की आवाज में इस गीत को खास बनाता है. सावन के इस त्योहार पर जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तब यह गीत उस रिश्ते की मिठास को और गहरा कर देता है. सादे शब्द, भावुक धुन और लता मंगेशकर की सुरीली आवाज इन तीनों का मेल इस गीत को ऐसा सदाबहार बना देता है, जिसे रक्षाबंधन के मौके पर आज भी सुनना लोगों को पसंद है.
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