Ram Navami 2026: रामनवमी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. उदय तिथि के अनुसार, आज यानी 27 मार्च 2026 को रामनवमी का पर्व है. श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में रामलला का जन्मोत्सव मनाया गया. पूरा देश इस उत्सव का साक्षी बना. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राम नवमी के अवसर पर अयोध्या के राम मंदिर में राम लला का सूर्यतिलक देखा. बता दें कि, दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलर किया गया. करीब 4 मिनट तक भगवान के ललाट पर नीली कीरणें पड़ीं. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या से करीब 700 किलोमीटर की दूरी यानी दिल्ली से टेलीविजन पर श्रीराम को नमन किया.
प्रधानमंत्री बने रामलला के सूर्य तिलक के गवाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टेलीविजन पर सूर्यतिलक का विजुअल देखते हुए देखा जा सकता है, जिसमें वह हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं. राम नवमी के अवसर पर अयोध्या के राम मंदिर में राम लला का सूर्यतिलक किया गया है. यह दृश्य टेलीविजन पर भी प्रसारित किया गया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी निष्ठा के साथ देखा. बता दें कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए दर्पणों और लेंसों के एक विशेष सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ीं. करीब 4 मिनट तक प्रभु के ललाट पर सूर्य की रोशनी चमकती रही, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए.
#WATCH | On Ram Navami, PM Narendra Modi prays to Bhagwan Ram Lalla and observes the Surya Tilak ceremony at Ayodhya Ram Mandir. pic.twitter.com/paHj9LdFRY
— ANI (@ANI) March 27, 2026
अयोध्या की गलियों में भी लगाई गई एलइडी स्क्रीन
राम नवमी के पावन अवसर पर अयोध्या में भव्य आयोजन किया गया. इस अद्भुत दृश्य का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया गया और अयोध्या की गलियों में लगी बड़ी एलईडी स्क्रीनों पर भी इसे दिखाया गया, ताकि मंदिर के बाहर मौजूद भक्त भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन सकें.
2 शुभ योग में मनाई जा रही राम नवमी 2026
आज राम नवमी पर दो शुभ योग हैं. रवि योग तो पूरे दिन है, वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 06:17 बजे से लेकर दोपहर 03:24 बजे तक है. सुकर्मा योग रात में 10 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ होगा. रवि योग में दोष मिटते हैं, वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
श्रीराम जन्म की कथा | Shree Ram janm katha
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के पास सब कुछ था वैभव, कीर्ति और अपार साम्राज्य. कमी थी तो बस एक उत्तराधिकारी की. अपनी इस चिंता को लेकर वे ऋषि वशिष्ठ के पास गए. उनके मार्गदर्शन में महान ऋषि ऋष्यशृंग ने ‘पुत्रकामेष्टि यज्ञ’ संपन्न किया. कहा जाता है कि यज्ञ की पूर्णाहुति पर स्वयं अग्नि देव प्रकट हुए और उन्होंने राजा दशरथ को दिव्य ‘खीर’ (प्रसाद) का एक पात्र दिया. राजा ने वह खीर अपनी तीन रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांट दी. इसी दिव्य प्रसाद के फलस्वरूप चैत्र नवमी के दिन महारानी कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम ने जन्म लिया.