Ramadan 2026: इस्लामी कैलेंडर का सबसे पाक महीना रमजान 2026 का आज से आगाज हो चुका है. रमजान दुनिया भर के मुसलमानों के मनाए जाने वाले सबसे खास त्योहारों में से एक है. मुसलमान रमजान को बहुत श्रद्धा और आदर के साथ मनाते हैं. रमजान या रमदान इस्लामिक कैलेंडर का नवां महीना है. दरअसल, रमज़ान की तारीख़ें हर साल बदलती हैं, क्योंकि इस्लाम में चंद्र कैलेंडर या हिजरी चलता है. मुसलमान इस पूरे महीने रोज़ा रखते हैं और अपना ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में बिताते हैं. इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार, पवित्र ग्रंथ कुरआन इसी महीने में अवतारित हुआ था इसलिए इसे रहमत और हिदायत का महीना भी कहा जाता है. इस पूरे माह हर स्वस्थ मुसलमान के लिए रोज़ा रखना अनिवार्य है. लेकिन, कुछ भ्रम अक्सर लोगों में बने रहते हैं. जैसे- क्या डायबिटीज के मरीज रोज़ा रख सकते हैं? डायबिटीज में रोज़ा रखें तो किन बातों का ध्यान रखें? अगर रोज़ा के बीच में तबीयत खराब हो जाए तो क्या करें? इन कंफ्यूजन को दूर करने से लिए गोरखपुर के प्रोफेसर डॉ. कफील खान ने सोशल मीडिया X पर वीडियो शेयर किया है. आइए उन्हीं से जानते हैं सच्चाई-
क्या डायबिटीज में रोज़ा रख सकते हैं?
डायबिटीज में रोज़ा रखने का सवाल बेहद कॉमन है. बता दें कि, डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के लिए रोज़ा रखना एक बड़ी चुनौती हो सकता है. खान-पान के समय में बदलाव और लंबे समय तक भूखा रहने से ब्लड शुगर लेवल बिगड़ने का डर रहता है. लेकिन, फिर भी कई लोगों का सवाल होता है कि क्या शुगर के मरीज रोज़ा रख सकते हैं? इस पर डॉ. काफील कहते हैं कि, बिलकुल डायबिटीज के मरीज रोज़ा रख सकते हैं, बशर्ते उनका शुगर लेवल कंट्रोल में होना चाहिए. साथ ही कुछ बातों का एहतराम करना पड़ेगा.
डायबिटीज़ है और रोज़ा रखना चाहते है – ज़रूर रखें बस सही दवा, सही समय और सही सलाह ज़रूरी है #RamdanMubarak pic.twitter.com/h7TeOxXPZV
— Prof. Dr Kafeel Khan (@drkafeelkhan) February 18, 2026
डायबिटीज में रखने पर क्या रखें सावधानियां?
अगर आप शुगर की दवा खाते हैं तो आप इफ्तार करने के बाद खा लें. अगर कोई व्यक्ति इंसुलिन लेता है तो लॉन्ग एक्टिंग इंसुलिन इफ्तार के बाद ले सकता है. इफ्तार से लेकर सहरी तक खूब पानी पीएं. शहरी के वक्त ज्यादा प्रोटीन लें, कॉम्प्लेक्स कॉर्बोहाइड्रेट्स जैसे ओट्स, स्प्राउट, रोटी, अंडा या फल खाएं. लेकिन, ध्यान रखें कि, इफ्तार के वक्त रुअफजा, मिठाई या फिर तली-भुनी चीजों से जरूर परहेज करें. इफ्तार से लेकर सहरी तक चीजों को थोड़ा-थोड़ा करके खाएं.
अंत में सबसे जरूरी बात यह है कि, अगर आप रोज़ा रख रहे हैं तो आप अपना ग्लूकोमीटर से ग्लूकोज चेक कर सकते हैं. ऐसा करने से आपका रोज़ा टूटेगा नहीं. मतलब साफ है कि, ब्लड टेस्ट करने से रोज़ा नहीं टूटेगा.
क्या बीमार होने पर रोज़ा तोड़ सकते हैं?
जिन लोगों को पिछले 6 महीने में शुगर बहुत कम हो गई है. जिनको डायबिटिक कीटोएसिडोसिस हो गया है. जिन्हें टाइप-1 डायबिटीज है, जिन्हें किडनी की क्रोनिक डिजीज या हार्ट की बीमारी है और जिनका ब्लड शुगर बार-बार लो या बहुत हाई हो जाता है. उन लोगों को रोज़ा रखने से बचना चाहिए. डायबिटीज के अलावा भी, यदि कोई बीमार हो जाए तो बीच में रोज तोड़ सकता है. क्योंकि, अल्लाह आपको समझता है.
रोज़ा किन लोगों को न रखने की छूट?
इस्लाम सेहत को सख़्त नियमों से ऊपर रखता है, इसलिए कुछ लोगों को रोज़ा रखने से छूट दी गई है- जैसे कि ऐसे बच्चे जो अभी बालिग नहीं हुए हैं, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिन महिलाओं को माहवारी हो रही हो, बीमार लोग या वे जिनकी सेहत पर रोज़ा असर डाल सकता है, और वे लोग जो सफर कर रहे हों.