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Rangbhari Ekadashi 2026: कब है रंगभरी एकादशी? जानिए सही दिन, शुभ मुहूर्त और असरदार उपायों सहित सबकुछ

Rangbhari Ekadashi 2026: रंगभरी एकादशी होली से कुछ दिन पहले मनाई जाती है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पहले होली खेलने की याद में मनाया जाता है. इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं और मंदिरों में गुलाल, फूल, मिठाई और भांग का अर्पण करते हैं. विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित महिलाएं अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: February 20, 2026 12:48:15 IST

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Rangbhari Ekadashi 2026: रंगभरी एकादशी फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है. इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

यह होली से कुछ दिन पहले मनाई जाती है और इस साल यह 27 फरवरी 2026 को है. यह दिन होली की तैयारियों की शुरुआत को दर्शाता है और विशेष रूप से भगवान शिव के भक्तों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है.

पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा के लिए सुबह का समय खासा शुभ माना गया है.

  • सामान्य पूजा मुहूर्त: सुबह 6:48 बजे से 11:08 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:09 बजे से 5:58 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक

 पारण का समय

एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि में समाप्त किया जाता है. इस साल पारण 28 फरवरी 2026 को सुबह 6:59 बजे से 9:20 बजे तक किया जा सकता है. ध्यान रखें कि पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना चाहिए.

 रंगभरी एकादशी क्यों मनाई जाती है?

रंग भरी का अर्थ है रंगों से भरी, पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह के बाद पहला होली खेला गया था. यह दिन होली के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है, खासकर वाराणसी जैसे शहरों में.

कैसे मनाई जाती है?

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन भव्य पूजा और रंगीन शोभायात्राएं होती हैं. भक्त गुलाल, फूल, मिठाई और भांग का अर्पण करते हैं. मंदिर और आसपास का क्षेत्र भक्ति और उत्सव का अद्भुत मिश्रण बन जाता है.

रंगभरी एकादशी का धार्मिक महत्व

रंगभरी एकादशी का खास महत्व शिव और पार्वती से जुड़ा है. पौराणिक मान्यता है कि विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती को लेकर काशी पहुंचे थे. उस समय काशीवासियों और देवताओं ने उनका भव्य स्वागत किया था. फूल, गुलाल और अबीर से उनका अभिनंदन किया गया.इसी कारण इस दिन काशी में शिव-पार्वती की पूजा और होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है. यह दिन होली के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है.

व्रत और पूजा का महत्व

इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है.

  • भगवान विष्णु की पूजा घर में धन-धान्य की वृद्धि लाती है.
    भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा दांपत्य जीवन को सुखमय बनाती है.
    आंवले (आमलकी) की पूजा स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती है.

 पूजा कैसे करें

  •  प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र पहनें.
  •  घर के मंदिर में दीप जलाएं.
  •  भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी के पत्ते और फल अर्पित करें.
  •  भगवान शिव को बेलपत्र, जल और धतूरा चढ़ाएं.
  •  माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें.
  •  पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
  •  दिनभर सात्विक भोजन करें या निर्जला व्रत रखें.
  •  शाम को आरती करें और अगले दिन द्वादशी में नियमपूर्वक पारण करें.
    Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. INDIA News इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Last Updated: February 20, 2026 12:48:15 IST

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