Son or daughter Who should marry first: शादी-विवाह भारतीय परंपरा का एक बहुत ही अहम हिस्सा है. यह न केवल दो लोगों का, बल्कि दो परिवारों और आत्माओं का मिलन है. इसके जरिये दो रिश्तों को भी मजबूती मिलती है. इसलिए बच्चों का समय पर विवाह, हर मां-बाप का सपना होता है. लेकिन, हमारी परंपरा में कुछ ऐसी लोक प्रथाएं भी शामिल हैं, जिनका बेशक शास्त्रों में कोई जिक्र न हो, लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी हम निभाते चल रहे हैं. ऐसी ही एक परंपरा है कि, घर में सबसे पहले बेटी की शादी करेंगे फिर बेटे की. या यूं कहें कि, घर के बड़े बेटे का ही पहले विवाह किया जाएगा. क्या आपने कभी सोचा है कि, आखिर ऐसा करने के पीछे की वजह क्या है? क्या आज भी लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं या नहीं?
किस परंपरा के उलट सचिन ने की अर्जुन की शादी
हाल में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व और दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर की शादी मुंबई में सानिया चंडोक के साथ बड़े धूम धाम से हुई. बता दें कि, अर्जुन सचिन तेंदुलकर के छोटे बेटे हैं, जबकि बड़ी बेटी सारा तेंदुलकर हैं. सारा अभी अविवाहित हैं.
पहले बेटी की ही शादी क्यों?
गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी कहते हैं कि, पहले बेटा की शादी करनी है या बेटी की? पहले बड़े बेटे की ही शादी पहले क्यों? ये दोनों की सवालों का जवाब किसी भी धर्म पुराण नहीं मिलता है. इसलिए मां-बाप अपनी सुविधा अनुसार बच्चों का विवाह कर सकते हैं. लेकिन, इसका जिक्र लोक प्रथाओं में जरूर मिलता है. तो पहले बात कर लेते हैं कि, पहले बेटा की शादी करें या फिर बेटी की.
लोक प्रथाओं के अनुसार, आपने अक्सर घर के बड़े-बुजुर्गों से कहते सुना होगा कि, पहले बेटी की शादी करो. लेकिन, क्यों? इसके पीछे का मुख्य कारण कि, हम बेटी को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं. ऐसे में लक्ष्मी स्वरूप बेटी की जब विदाई करते हैं तो कहते हैं कि साथ में लक्ष्मी भी चली जाती हैं. वहीं, जब बेटे की शादी करते हैं तो वहां की लक्ष्मी स्वरूप बेटी को घर लाते हैं. ऐसा करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है.
घर के बड़े बेटे की ही पहले शादी क्यों?
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि, पहले बड़े बेटे की ही शादी को लेकर भी कोई शास्त्र नहीं है. लेकिन, परंपरा में घर के बड़े बच्चे (बेटे या बेटी) की शादी पहले करने के पीछे कुछ कारण जरूर हो सकते हैं, जैसे- उम्र का क्रम, सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक मान्यताएं. माना जाता है कि बड़ा बच्चा अधिक जिम्मेदार और परिपक्व होता है, जो परिवार को संभालने और छोटे भाई-बहनों का मार्गदर्शन करने में सक्षम है, जिससे पारिवारिक स्थिरता बनी रहती है.