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Mahashivratri 2026 Date: कब है महाशिवरात्रि? जानिए इस पावन रात से जुड़ी वो कथा, जिसने इसे बनाया सबसे खास

Mahashivratri 2026 Date: हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र पर्व माना जाता है. आइए जानते हैं कि फरवरी में महाशिवरात्रि कब है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-01-29 18:14:54

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Mahashivratri 2026 Date: हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र पर्व माना जाता है.मान्यताओं के अनुसार, फरवरी में पड़ने वाली महाशिवरात्रि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि कहा जाता है. इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था.

इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं, विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं और रात्रि जागरण कर महादेव की आराधना करते हैं. वैसे तो हर महीने शिवरात्रि आती है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व सबसे अधिक माना गया है. माना जाता है कि इस रात की गई पूजा और साधना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

 महाशिवरात्रि तिथि और पूजा का समय

  • महाशिवरात्रि तिथि: 15 फरवरी 2026, रविवार
  • निशिता काल पूजा समय: 12:09 AM से 01:01 AM (16 फरवरी)
  • पूजा अवधि:51 मिनट
  • शिवरात्रि पारण समय: 06:59 AM से 03:24 PM
  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा: 06:11 PM से 09:23 PM
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा:09:23 PM से 12:35 AM (16 फरवरी)
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा:12:35 AM से 03:47 AM (16 फरवरी)
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा:03:47 AM से 06:59 AM (16 फरवरी)
  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त:16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? 

महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के पवित्र मिलन का पर्व माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. यह दिन दांपत्य सुख, प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.लिंग पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, इसी रात भगवान शिव पहली बार अग्नि स्तंभ यानी ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला और उससे पूरा संसार संकट में आ गया, तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया,विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने पूरी रात जागकर भगवान शिव का दूध, जल, भांग, बेलपत्र और धतूरे से अभिषेक किया. तभी से महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण और विशेष पूजा की परंपरा चली आ रही है.

महाशिवरात्रि  क्यों मानी जाती है सबसे खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की रात अत्यंत शुभ और शक्तिशाली मानी जाती है. कहा जाता है कि इस रात भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे. इसके अलावा यही वह रात है जब शिव और पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था.मान्यता है कि इस रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है. ऐसे में जो साधक इस रात्रि में उपवास, ध्यान, जाप और शिव आराधना करता है, उसे शीघ्र ही अपने कर्मों का शुभ फल प्राप्त होता है. महाशिवरात्रि की पूजा से जीवन में शांति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.इसी कारण महाशिवरात्रि को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और शिव तत्व से जुड़ने की सबसे पवित्र रात माना जाता है.

 

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