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Grahan 2026: साल 2026 में कब और कितने ग्रहण? सूर्य और चंद्र ग्रहण का भारत में क्या होगा प्रभाव, नोट करें सूतक और तारीख

Eclipse 2026 Date: नए साल यानी 2026 में सूर्य और चंद्र को मिलाकर कुल 4 ग्रहण लगेंगे. इसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो साल 2026 में ग्रहणों की शुरुआत 17 फरवरी से होगी और 28 अगस्त 2026 को अंतिम ग्रहण लगेगा. जानिए भारत में कौन सा ग्रहण दिखेगा और किसका सूतक काल मान्य होगा.

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 22, 2026 15:26:40 IST

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Eclipse 2026 Date: खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए साल 2026 बेहद खास होने वाला है. नए साल यानी 2026 में सूर्य और चंद्र को मिलाकर कुल 4 ग्रहण लगेंगे. इसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो साल 2026 में ग्रहणों की शुरुआत 17 फरवरी से होगी और 28 अगस्त 2026 को अंतिम ग्रहण लगेगा. बता दें कि, 03 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा और यही भारत में नजर आएगा. बाकी कोई भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. अब सवाल है कि आखिर साल 2026 में कब-कब सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगेगा? भारत में दोनों ग्रहण दिखेंगे या नहीं? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

ये हैं साल 2026 में लगने वाले सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण: ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, साल का पहला ग्रहण 17 फरवरी को होगा. यह एक सूर्य ग्रहण है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण या ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. इस ग्रहण में सूर्य का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा और यह लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड तक रहेगा. यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखेगा. भारत में यह दिखाई नहीं देगा. इसलिए इसका सूतक काल भी लागू नहीं होगा.

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा और यह भारत में पूरी तरह दिखाई देगा. यही वह ग्रहण है, जिसे हम सीधे देख पाएंगे. यह चंद्र ग्रहण लगभग 58 मिनट तक रहेगा और इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा. इसे लोग ब्लड मून भी कहते हैं. खगोलशास्त्र के हिसाब से यह 2029 से पहले का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा, यानी धार्मिक और पारंपरिक हिसाब से इसका महत्व भी रहेगा..

साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण: तीसरा ग्रहण 29 जुलाई को लगेगा. यह भी सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन अफसोस की बात यह है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा. इसे देखने के लिए अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में रहना पड़ेगा. चूंकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी यहां मान्य नहीं होगा.

साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण: साल का चौथा और आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को होगा. यह दूसरा चंद्र ग्रहण है, जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा, लेकिन भारत से इसे देखा नहीं जा सकेगा. इसका भी सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा.

सूर्य ग्रहण क्यों लगता: सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है. ऐसी स्थिति होने पर सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा होने से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है, और सूरज का कुछ ही हिस्सा दिखाई देता है. हालांकि, सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, आंशिक, वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण.

चंद्र ग्रहण क्यों लगता: सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही एक खगोलीय घटना है. चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है. इस प्रक्रिया में एक ऐसा भी समय आता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य एक ही सीध में आ जाते हैं. इस स्थिति में सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है, लेकिन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता. इसी घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है.

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Last Updated: January 22, 2026 15:26:40 IST

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Eclipse 2026 Date: खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए साल 2026 बेहद खास होने वाला है. नए साल यानी 2026 में सूर्य और चंद्र को मिलाकर कुल 4 ग्रहण लगेंगे. इसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो साल 2026 में ग्रहणों की शुरुआत 17 फरवरी से होगी और 28 अगस्त 2026 को अंतिम ग्रहण लगेगा. बता दें कि, 03 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा और यही भारत में नजर आएगा. बाकी कोई भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. अब सवाल है कि आखिर साल 2026 में कब-कब सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगेगा? भारत में दोनों ग्रहण दिखेंगे या नहीं? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

ये हैं साल 2026 में लगने वाले सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण: ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, साल का पहला ग्रहण 17 फरवरी को होगा. यह एक सूर्य ग्रहण है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण या ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. इस ग्रहण में सूर्य का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा और यह लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड तक रहेगा. यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखेगा. भारत में यह दिखाई नहीं देगा. इसलिए इसका सूतक काल भी लागू नहीं होगा.

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा और यह भारत में पूरी तरह दिखाई देगा. यही वह ग्रहण है, जिसे हम सीधे देख पाएंगे. यह चंद्र ग्रहण लगभग 58 मिनट तक रहेगा और इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा. इसे लोग ब्लड मून भी कहते हैं. खगोलशास्त्र के हिसाब से यह 2029 से पहले का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा, यानी धार्मिक और पारंपरिक हिसाब से इसका महत्व भी रहेगा..

साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण: तीसरा ग्रहण 29 जुलाई को लगेगा. यह भी सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन अफसोस की बात यह है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा. इसे देखने के लिए अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में रहना पड़ेगा. चूंकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी यहां मान्य नहीं होगा.

साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण: साल का चौथा और आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को होगा. यह दूसरा चंद्र ग्रहण है, जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा, लेकिन भारत से इसे देखा नहीं जा सकेगा. इसका भी सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा.

सूर्य ग्रहण क्यों लगता: सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है. ऐसी स्थिति होने पर सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा होने से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है, और सूरज का कुछ ही हिस्सा दिखाई देता है. हालांकि, सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, आंशिक, वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण.

चंद्र ग्रहण क्यों लगता: सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही एक खगोलीय घटना है. चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है. इस प्रक्रिया में एक ऐसा भी समय आता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य एक ही सीध में आ जाते हैं. इस स्थिति में सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है, लेकिन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता. इसी घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है.

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