Live
Search
Home > धर्म > Surya Grahan Arghya: ज्योतिषी से जानें सूर्य ग्रहण में अर्घ्य देना चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं शास्त्र?

Surya Grahan Arghya: ज्योतिषी से जानें सूर्य ग्रहण में अर्घ्य देना चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं शास्त्र?

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण के दौरान जल चढ़ाना चाहिए या नहीं. इसको लेकर लोगों में काफी भ्रम रहता है. जानिए ज्योतिष और शास्त्र इसके बारे में क्या कहते हैं? साथ ही सूतक काल में हमें क्या करना चाहिए?

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: February 5, 2026 10:05:40 IST

Mobile Ads 1x1

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसका ज्योतिष में बहुत प्रभाव होता है. ज्योतिष और धर्म दोनों के अनुसार सूर्य ग्रहण का जीवन में अलग तरह का प्रभाव देखने को मिलता है. जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य ग्रहण लगता है. मतलब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ या पूरी तरह से ढकता है, तब सूर्य ग्रहण बनता है. आज हम पंडित ज्योतिषाचार्य प्रमोद पांडेय से जानेंगे कि सूर्य ग्रहण का हमारे जीवन पर क्या असर पड़ता है? 

पंडित प्रमोद पांडेय के अनुसार, सूर्य ग्रहण का नाम सुनते ही लोगों के मन में हलचल शुरू हो जाती है. ग्रहण को लेकर लोग घरों में कई तरह के उपाय करने लगते हैं. कोई खिड़कियों पर पर्दे गिरा देता है, तो कोई पहले से ही पूजा-पाठ के नियमों की चर्चा करने लगता है. लेकिन, जब बात सूर्य को अर्घ्य देने जैसी रोजमर्रा की धार्मिक परंपरा की आती है, तो इससे जुड़े सवालों के जवाब में काफी कन्फ्यूजन होती है.

गलत धारणा से लोगों में भ्रम

हर बार की तरह साल 2026 में भी लोगों के मन में सूर्य ग्रहण पर जल चढ़ाने को लेकर भी कुछ ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं. लोगों के जेहन में सवाल है कि क्या ग्रहण के दौरान सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए या नहीं? कई लोग रोज सुबह सूर्य को जल देकर दिन की शुरुआत करते हैं. ग्रहण को लेकर समाज औऱ लोगों में कई तरह की गलत धारणाएं बनी हुई हैं. इसलिए हमें सही और गलत के बीच फर्क को जानना भी जरूरी हो जाता है. ज्योतिष और धर्मशास्त्र का इस बारे में क्या नजरिया है, आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी पंडित प्रमोद पांडेय से.

इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

पंडित प्रमोद पांडेय का कहना है कि शास्त्रों में ग्रहण काल की अवधि को संवेदनशील कहा जाता है. शास्त्रों के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि इस दौरान सूर्य की ऊर्जा अस्थायी रूप से कमजोर रहती है. साथ ही वातावरण में नेगेटिव प्रभाव बढ़ जाता है. इस कारण से सूतक काल से लेकर ग्रहण के समाप्त होने तक कई कामों को रोक दिया जाता है. अगर इस अवधि के दौरान कोई व्यक्ति उस काम को करता है, जिसके बारे में शास्त्र अनुमति नहीं देते, तो नुकसान होना तय माना जाता है. सूतक काल, ग्रहण से पहले शुरू हो जाता है. इस दौरन पूजा-पाठ, भोजन पकाने और खाने से दूरी बनाई जाती है. मान्यता के मुताबिक, यह टाइम आत्मसंयम और मानसिक शुद्धता के लिए होता है. इस दौरान सिर्फ भगवान का भजन किया जाता है. जल के पात्र में तुलसी डाल दी जाती है. वहीं, जहां पर जल की उपलब्धता होती है, वहां पर पुराने जल को बहा दिया जाता है और फिर से शुध्द जल भरा जाता है. 

क्या ग्रहण काल में अर्घ्य देना चाहिए?

सनातन में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है. उन्हें नारायण भी कहा जाता है. प्रतिदिन सुबह की बेला में लोग तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य देते हैं. यह सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं है, बल्कि एक अच्छी जीवनशैली भी है. ज्योतिष के अनुसार, जो व्यक्ति रोज सूर्य को जल चढ़ाता या अर्घ्य देता है, उसके आत्मबल में वृध्दि होती है. सेहत अच्छी रहती है और कुंडली में सूर्य मजबूत होता है. कई लोग इसे आंखों की रोशनी और पॉजिटिविटी से जोड़कर भी देखते हैं. ज्योतिषाचार्य प्रमोद पांडेय का कहना है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए. उनके अनुसार ग्रहण के वक्त सूर्य को सीधे देखना वर्जित होता है. यह सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में राहु-केतु का प्रभाव सक्रिय होता है, जिससे सूर्य की ऊर्जा ढकी रहती है. ऐसे में अर्घ्य देने से सकारात्मक फल की बजाय उल्टा इफेक्ट पड़ सकता है.

तो क्या करें इस दौरान?

पंडित प्रमोद पांडेय ने बताया कि ग्रहण काल में सूर्य मंत्र, गुरु मंत्र या अन्य मंत्रों का मानसिक जाप किया जा सकता है. जैसे ॐ सूर्याय नमः, राम-राम, श्रीराम जय राम जय जय राम, हरे राम हरे राम हरे कृष्ण हरे कृष्ण का महामंत्र और जो मंत्र दीक्षा में मिला हो, का जाप किया जा सकता है. इस दौरान कुछ जातकों को बाहर भी नहीं निकलना चाहिए. इससे उनके शरीर पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ सकता है. ग्रहण जब समाप्त हो जाए तो उसके बाद स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देना शुभ होता है. ग्रहण खत्म होने के बाद घर के मंदिर में रखे भगवान को भी स्नान कराकर पूजा की जाती है. इस दौरान मंदिरों के पट भी बंद रहते हैं और ग्रहण खत्म होने के बाद उन्हें नहलाया जाता है और पूजा की जाती है. 

नोट – यह लेख विभिन्न स्त्रोतों और ज्योतिषाचार्य के बाद सामान्य जानकारी के लिए हैं. इंडिया न्यूज किसी भी तरह के अंधविश्वासों को बढ़ावा नहीं देता है. कोई भी काम करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें.

MORE NEWS