Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण हमेशा से लोगों के लिए रहस्य और डर का विषय रहा है. जब दिन के समय अचानक सूरज आंशिक या पूरा ढक जाता है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में सवाल उठते हैं. आज विज्ञान बता चुका है कि यह एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन इतिहास में अलग-अलग संस्कृतियों ने इसे अपने तरीके से समझाया.पुराने समय में लोगों को यह समझ नहीं था कि सूर्य ग्रहण कैसे होता है. इसलिए उन्होंने इसके पीछे अलग-अलग कहानियां गढ़ लीं. कई जगह माना जाता था कि कोई दानव, जानवर या देवता सूरज को निगल जाता है.
आज भी कई जगह सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है. कुछ लोग इसे मौत, आपदा या दुर्भाग्य का संकेत मानते हैं. भारत सहित कई देशों में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है. कुछ लोग ग्रहण के दौरान खाना नहीं बनाते या उपवास रखते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उस समय बना भोजन अशुद्ध हो जाता है.
सूर्य ग्रहण से जुड़ी राहु-केतु की पौराणिक कथा
भारतीय पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला तो देवताओं और दैत्यों में उसे पाने की होड़ मच गई. तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत बांटने का निर्णय लिया. इसी दौरान स्वरभानु नामक एक असुर देवताओं के बीच बैठकर अमृत पीने लगा.सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान कर ली और विष्णु को इसकी सूचना दी. तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. लेकिन अमृत का सेवन कर लेने के कारण वह अमर हो चुका था. उसका सिर ‘राहु’ और धड़ ‘केतु’ कहलाया. मान्यता है कि सूर्य और चंद्रमा से शत्रुता के कारण राहु-केतु समय-समय पर उन्हें निगलने की कोशिश करते हैं, जिससे ग्रहण लगता है.
दुनिया भर में प्रचलित अजीबोगरीब मान्यताएं
सिर्फ भारत ही नहीं, अन्य देशों में भी सूर्य ग्रहण को लेकर रोचक कथाएं मिलती हैं.
- प्राचीन चीन में यह विश्वास था कि एक विशाल अजगर सूर्य को निगल जाता है. ग्रहण के समय लोग ढोल-नगाड़े बजाकर शोर मचाते थे ताकि अजगर डरकर सूर्य को छोड़ दे.
- नॉर्डिक पौराणिक कथाओं में एक विशाल भेड़िया सूर्य का पीछा करता है और उसे निगलने की कोशिश करता है. इसे ही ग्रहण का कारण माना जाता था.
- मैक्सिको की कुछ पारंपरिक मान्यताओं में यह कहा जाता था कि यदि गर्भवती महिला सूर्य ग्रहण देख ले, तो उसके होने वाले बच्चे पर निशान पड़ सकता है.
- वियतनाम की एक लोककथा के अनुसार, एक विशाल मेंढक सूर्य को निगल लेता है और फिर उसे वापस उगलता है, जिससे ग्रहण समाप्त होता है.
- ईसाई परंपराओं में भी कुछ लोग सूर्य ग्रहण को ईश्वर की चेतावनी या भविष्य में आने वाले बड़े बदलाव का संकेत मानते रहे हैं.
वैज्ञानिक नजरिया
वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी को ढक देता है. इसका इंसानों के स्वास्थ्य, व्यवहार या भाग्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.हालांकि, एक जरूरी सावधानी जरूर है,सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से नहीं देखना चाहिए. सही सुरक्षा चश्मे का उपयोग करना जरूरी है, वरना आंखों को नुकसान हो सकता है.आज के वैज्ञानिक दौर में यह स्पष्ट है कि सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक और खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है. फिर भी परंपराएं और लोककथाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं.