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शिरडी साई मंदिर में फरीदाबाद के भक्त ने दान किया हीरे का मुकुट, कीमत जानकर हो जायेंगे हैरान

ए वर्ष 2026 के पहले ही दिन हरियाणा के फरीदाबाद निवासी साईभक्त प्रदीप मोहंती और उनकी पत्नी प्रतिमा मोहंती ने साईबाबा के चरणों में 655 ग्राम वजन का आकर्षक नक्काशी वाला सुवर्ण-हीरा जड़ा मुकुट अर्पित किया.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: January 5, 2026 11:42:46 IST

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भारत के कई मंदिरों में हर दिन लाखों का चढ़ावा चढ़ता है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार दान करते ही रहते हैं. लेकिन कभी-कभी मंदिरों में कुछ भेंट ऐसी आती है, जो लोगों के चर्चा का विषय बन जाती है. ऐसे ही इस समय चर्चा का विषय बना है 80 लाख का मुकुट.

यह मुकुट शिरडी के साईं बाबा को भेंट किया गया है. नए वर्ष 2026 के पहले ही दिन हरियाणा के फरीदाबाद निवासी साईभक्त प्रदीप मोहंती और उनकी पत्नी प्रतिमा मोहंती ने साईबाबा के चरणों में 655 ग्राम वजन का आकर्षक नक्काशी वाला सुवर्ण-हीरा जड़ा मुकुट अर्पित किया. 

मुकुट की विशेषताएं और मूल्य

यह मुकुट अत्यंत सुंदर और नगीनों से सजा हुआ है. इसमें लगभग 585 ग्राम शुद्ध सोना और करीब 153 कैरेट के मूल्यवान हीरे जड़े गए हैं. मुकुट का अनुमानित मूल्य लगभग 80 लाख रुपये है. भक्त दंपति ने इसे श्री साईबाबा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गोरक्ष गाडीलकर को सौंपा. sai.org.in की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित समाचार के अनुसार, यह दान नए वर्ष के पहले दिन किया गया, जो मोहंती दंपत्ति की गहरी आस्था को दर्शाता है.

संस्थान की ओर से सम्मान

इस अवसर पर श्री साईबाबा संस्थान की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडीलकर ने दानशील साईभक्त प्रदीप मोहंती और प्रतिमा मोहंती का सत्कार किया. उन्होंने भक्त दंपति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और उनके इस पुण्य कार्य की सराहना की. मुकुट और दंपति का वीडियो श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर भी साझा किया गया है. 

भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक

शिरडी साईबाबा के मंदिर में प्रतिदिन लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं. साईबाबा मंदिर, जिसे श्री साईबाबा समाधि मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, महाराष्ट्र राज्य के अहिल्यानगर जिले के शिरडी में स्थित है. 19वीं शताब्दी के संत साई बाबा को समर्पित यह मंदिर भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले तीर्थ स्थलों में से एक है. साईबाबा ने जीवन का अधिकांश समय शिरडी में ही व्यतीत किया और 1918 में उनका निधन हो गया. कई भक्त साईबाबा को दत्तात्रेय का अवतार भी मानते हैं. 

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