Vaishakh Month 2026: आज से शुरु हो रहा है वैशाख का पवित्र महीना यानी 3 अप्रैल, 2026 को शुरू होगा. हिंदुओं का मानना है कि यह वर्ष का सबसे शुभ समय है, जब हम ईश्वर के और करीब आ सकते हैं. धार्मिक ग्रंथों में वैशाख महीने का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भक्ति, दान और पुण्य कर्मों से जुड़ा है. ज्योतिषियों का अनुमान है कि इस महीने में कई बड़े त्योहार और ग्रहों की महत्वपूर्ण चालें देखने को मिलेंगी, जो धन, सफलता और सकारात्मक बदलाव लेकर आएंगी.
वैशाख क्यों होता है खास
स्कंद पुराण में एक श्लोक है, जिसका उल्लेख भक्तगण वैशाख मास की चर्चा करते समय अक्सर करते हैं. यह श्लोक इस मास को अन्य सभी मासों से श्रेष्ठ घोषित करता है; इसकी तुलना सत्य युग जो कि सर्वोच्च युग है से करता है. और गंगा नदी को सभी तीर्थ स्थलों में सर्वाधिक पवित्र मानता है. मूल रूप से, इसके पीछे की अवधारणा अत्यंत सरल है. इस मास के दौरान आप जो भी कर्म करते हैं, उनका प्रभाव दीर्घकालिक होता है. ऐसा माना जाता है कि दान-पुण्य, प्रार्थना अथवा नित्य आध्यात्मिक साधना जैसे कार्यों का महत्व चिरस्थायी होता है.
वैशाख में क्या करें?
गर्मियों में दान देना – यह गर्मियों का समय होता है, इसलिए जलदान कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में आपने अक्सर देखा होगा घरों के बाहर मिट्टी के घड़े रखे हुए, या राहगीरों के लिए पानी के अस्थायी व्यवस्था आदि. दान-पुण्य का यह सिलसिला गर्मियों की अन्य जरूरी चीजों तक भी फैला हुआ है जैसे हाथ के पंखे, छतरियां, जूते-चप्पल, और यहां तक कि ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थ जैसे सत्तू और खरबूजे आदि भी शामिल है.
सुबह की रस्में और स्नान के रीति-रिवाज
इस महीने के दौरान, सुबह-सवेरे आदर्श रूप से सूर्योदय के समय स्नान करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. कई लोगों का मानना है कि इस अवधि में गंगा नदी में डुबकी लगाने से असाधारण आध्यात्मिक पुण्य मिलता है. यदि यह संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना सही है.
दैनिक भगवान विष्णु की पूजा
भगवान विष्णु की पूजा को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके साथ अक्सर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है. इसके अतिरिक्त, देवी लक्ष्मी की भी प्रार्थना की जाती है. इनका मुख्य उद्देश्य घर-परिवार में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करना है.
तुलसी के पौधे और सूर्य को अर्पण
तुलसी के पौधे की रोजाना पूजा होती है, और कभी-कभी, शाम के समय उसके सामने एक छोटा मिट्टी का दीया जलाया जाता है. दिन की शुरुआत सूर्य को जल अर्पित करने के साथ होती है.
किन चीजों से करें परहेज
इस दौरान संयम बरतना अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारी और मांसाहारी भोजन से परहेज करें, और आमतौर पर हल्का भोजन करें. देर तक सोना और दिन भर झपकी लेना अनुचित माना जाता है, क्योंकि यह सक्रिय और सतर्क रहने का समय है.
पानी का उपयोग
पानी के उपयोग और उसकी बर्बादी को लेकर भी व्यापक जागरूकता है, क्योंकि ऐसी आदतों को अवांछनीय माना जाता है. कुछ परंपराओं में, इस महीने के दौरान तेल मालिश से बचने की भी सलाह दी जाती है.