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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: मिलता है हजार गायों के दान का फायदा, पढ़ें राजा मान्धाता को कैसे मिला वैकुंठ

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: जो लोग रात में जागकर भगवान मधुसूदन की पूजा करते हैं वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं और मोक्ष पाते हैं. इसलिए जिन्हें पाप से डर लगता है उन्हें इस एकादशी का व्रत ज़रूर रखना चाहिए. जिसे यमराज से डर लगता है उसे वरुथिनी व्रत ज़रूर रखना चाहिए.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: 2026-04-13 09:23:03

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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों में इस एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से इंसान के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. यह व्रत सौभाग्य देता है और दुखों को दूर करता है. इस आर्टिकल में, आइए वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2026) की पौराणिक कहानी और इसके धार्मिक महत्व के बारे में जानते हैं.

कौन सा दान सबसे बड़ा है?

जो इंसान अपनी हैसियत के हिसाब से गहने पहनाकर सच्चे मन से बेटी का दान करता है, उसके पुण्य का अंदाज़ा चित्रगुप्त भी नहीं लगा सकते. वरुथिनी एकादशी करने से इंसान को वैसा ही फ़ायदा मिलता है. इस व्रत में कुछ चीज़ों का त्याग करना चाहिए. वरुथिनी एकादशी इसी तरह मनाई जाती है. 

हजार गायों के दान का फायदा

जो लोग रात में जागकर भगवान मधुसूदन की पूजा करते हैं वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं और मोक्ष पाते हैं. इसलिए जिन्हें पाप से डर लगता है उन्हें इस एकादशी का व्रत ज़रूर रखना चाहिए. जिसे यमराज से डर लगता है उसे वरुथिनी व्रत ज़रूर रखना चाहिए. इस व्रत को पढ़ने और सुनने से हजार गायों के दान का फायदा मिलता है और इंसान सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक में बस जाता है.

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

प्राचीन समय में नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता नाम के राजा रहते थे. राजा का धर्म निभाने के साथ ही वह जप तप करते रहते थे. साथ ही प्रजा के प्रति दयाभाव रखते थे. एक बार वह तपस्या में लीन थे तो एक भालू ने उनका पैर चबा लिया और राजा को जंगल की ओर खींचकर ले गया. तब राजा ने विष्णु भगवान से प्रार्थना की. भक्त की पुकार सुनकर पहुंचे विष्णु भगवान ने अपने चक्र से भालू को मार डाला. लेकिन राजा का पैर भालू ने नोचकर खा लिया था. इस बात का राजा को बहुत दुख था. राजा को दुखी देखकर विष्णु भगवान ने कहा कि राजन भालू ने जो तुम्हारा पैर काटा है. वह तुम्हारे पूर्व जन्म का पाप है, जिसकी सजा तुम्हें इस जन्म में भुगतनी पड़ रही है. राजा ने इससे मुक्ति पाने का उपाय पूछा तो भगवान विष्णु ने कहा कि राजन, तुम मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा वरूथिनी एकादशी का व्रत धारण करके करो. इससे तुम्हारे पाप कट जाएंगे और व्रत के प्रभाव से दोबारा अंगों वाले हो जाआगे. इसके बाद राजा ने वरुथिनी एकादशी का व्रत धारण किया तो उनका पैर फिर से सही हो गया.

पूजा मंत्र

1. शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।
लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
2. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता ह

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Last Updated: 2026-04-13 09:23:03

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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों में इस एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से इंसान के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. यह व्रत सौभाग्य देता है और दुखों को दूर करता है. इस आर्टिकल में, आइए वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2026) की पौराणिक कहानी और इसके धार्मिक महत्व के बारे में जानते हैं.

कौन सा दान सबसे बड़ा है?

जो इंसान अपनी हैसियत के हिसाब से गहने पहनाकर सच्चे मन से बेटी का दान करता है, उसके पुण्य का अंदाज़ा चित्रगुप्त भी नहीं लगा सकते. वरुथिनी एकादशी करने से इंसान को वैसा ही फ़ायदा मिलता है. इस व्रत में कुछ चीज़ों का त्याग करना चाहिए. वरुथिनी एकादशी इसी तरह मनाई जाती है. 

हजार गायों के दान का फायदा

जो लोग रात में जागकर भगवान मधुसूदन की पूजा करते हैं वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं और मोक्ष पाते हैं. इसलिए जिन्हें पाप से डर लगता है उन्हें इस एकादशी का व्रत ज़रूर रखना चाहिए. जिसे यमराज से डर लगता है उसे वरुथिनी व्रत ज़रूर रखना चाहिए. इस व्रत को पढ़ने और सुनने से हजार गायों के दान का फायदा मिलता है और इंसान सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक में बस जाता है.

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

प्राचीन समय में नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता नाम के राजा रहते थे. राजा का धर्म निभाने के साथ ही वह जप तप करते रहते थे. साथ ही प्रजा के प्रति दयाभाव रखते थे. एक बार वह तपस्या में लीन थे तो एक भालू ने उनका पैर चबा लिया और राजा को जंगल की ओर खींचकर ले गया. तब राजा ने विष्णु भगवान से प्रार्थना की. भक्त की पुकार सुनकर पहुंचे विष्णु भगवान ने अपने चक्र से भालू को मार डाला. लेकिन राजा का पैर भालू ने नोचकर खा लिया था. इस बात का राजा को बहुत दुख था. राजा को दुखी देखकर विष्णु भगवान ने कहा कि राजन भालू ने जो तुम्हारा पैर काटा है. वह तुम्हारे पूर्व जन्म का पाप है, जिसकी सजा तुम्हें इस जन्म में भुगतनी पड़ रही है. राजा ने इससे मुक्ति पाने का उपाय पूछा तो भगवान विष्णु ने कहा कि राजन, तुम मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा वरूथिनी एकादशी का व्रत धारण करके करो. इससे तुम्हारे पाप कट जाएंगे और व्रत के प्रभाव से दोबारा अंगों वाले हो जाआगे. इसके बाद राजा ने वरुथिनी एकादशी का व्रत धारण किया तो उनका पैर फिर से सही हो गया.

पूजा मंत्र

1. शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।
लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
2. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता ह

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