Varuthini Ekadashi 2026: अप्रैल 2026 में, पूरे देश भर के श्रद्धालु वरुथिनी एकादशी और मोहिनी एकादशी का व्रत रखेंगे. ये दोनों ही व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत हैं. इस व्रत के संपूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए, एकादशी की तिथियों, समय और पारण मुहूर्त का सही ढंग से पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है.
वरुथिनी एकादशी: तिथि और शुभ मुहूर्त
अप्रैल 2026 में, वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को सुबह 1:16 बजे प्रारंभ होगी और 14 अप्रैल को सुबह 1:08 बजे समाप्त होगी; पारण (व्रत तोड़ने) का समय 14 अप्रैल को सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा. इसलिए, वरुथिनी एकादशी का उपवास 13 अप्रैल को रखा जाएगा, जबकि उपवास तोड़ने का सही समय 14 अप्रैल को सुबह 6:54 सुबह से 8:31 सुबह के बीच का है.
वरूथिनी एकादशी 2026 पूजा कैसे करें?
वरूथिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें, साफ संभव हो सके तो पीले रंग कपड़े पहनें. व्रत रखने का संकल्प स्विकारें. भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद तुलसी के पत्ते, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. एक दीपक और अगरबत्ती जलाएं. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. वरुणिनी एकादशी व्रत कथा सुने या पढ़ें. सुबह और शाम को आरती करें.
वरुथिनी एकादशी पूजा मुहूर्त
वैशाख की पहली एकादशी यानी वरुथिनी एकादशी के दिन, पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:58 बजे से 7:34 बजे तक रहने वाला है. इसके बाद, पूजा का समय सुबह 9:10 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा.
वरूथिनी एकादशी महत्व
भविष्य पुराण के अनुसार जैसा कि भगवान कृष्ण ने राजा युधिष्ठिर को बताया था वरुथिनी एकादशी का संबंध दैवीय सुरक्षा और दुर्भाग्य को दूर करने से है. इसके विपरीत, मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार का उत्सव है, जो समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुआ था, जब उन्होंने देवताओं के बीच अमरता का अमृत बांटा था. ऐसा माना जाता है कि ये दोनों एकादशी सौभाग्य, आध्यात्मिक पुण्य और मोक्ष का मार्ग प्रदान करती हैं.
डिस्क्लेमर: इस खबर का मुख्य उद्देश्य सामान्य जानकारी प्रदान करना है. यह आर्टिकल धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं.