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वसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती के अलग-अलग मंत्र,जानें महत्व और विधि

Vasant Panchami 2026: बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए उनसे कई अलग-अलग तरह के मंत्र जाप किए जाते हैं. यहां कुछ अच्छे मंत्रजाप दिए गए हैं.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: January 23, 2026 07:51:53 IST

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Vasant Panchami 2026: वसंत पंचमी 2026 के पावन अवसर पर माँ सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व है. जीवन में सफलता मां सरस्वती के आशिर्वाद से ही मिलती है. बुद्धि, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए, मंत्र जाप को सबसे प्रभावशाली माना गया है. इस दिन माता सरस्वती के पूजा के समय कुछ खास मंत्रो का जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है. तो चलिए देखते हैं सरस्वती पूजा के दिन, मां सरस्वती के किन मंत्रो का जाप करना चाहिए.

माँ सरस्वती के प्रमुख मंत्र

आवाहन या ध्यान करने के लिए मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता.
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा.

सरस्वती मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः”
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्रायै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
नमस्ते शारदे देवी, पुस्तक धारिणी।

विद्यार्थियों के लिए विद्या सरस्वती मंत्र

सरस्वती नमस्तुभ्यम।
वरदे कामरूपिनी॥
विद्यारंबम करिष्यामि।
सिद्धिर बावथुमे साधा॥

विद्यारंभ करने के लिए

विद्यारंभं करिष्यामि, प्रसन्ना भव सर्वदा॥
ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्‌।

परीक्षा में सफलता प्राप्ति

नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।

सरस्वती वन्दना 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥

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वसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती के अलग-अलग मंत्र,जानें महत्व और विधि

Vasant Panchami 2026: बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए उनसे कई अलग-अलग तरह के मंत्र जाप किए जाते हैं. यहां कुछ अच्छे मंत्रजाप दिए गए हैं.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: January 23, 2026 07:51:53 IST

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Vasant Panchami 2026: वसंत पंचमी 2026 के पावन अवसर पर माँ सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व है. जीवन में सफलता मां सरस्वती के आशिर्वाद से ही मिलती है. बुद्धि, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए, मंत्र जाप को सबसे प्रभावशाली माना गया है. इस दिन माता सरस्वती के पूजा के समय कुछ खास मंत्रो का जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है. तो चलिए देखते हैं सरस्वती पूजा के दिन, मां सरस्वती के किन मंत्रो का जाप करना चाहिए.

माँ सरस्वती के प्रमुख मंत्र

आवाहन या ध्यान करने के लिए मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता.
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा.

सरस्वती मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः”
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्रायै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
नमस्ते शारदे देवी, पुस्तक धारिणी।

विद्यार्थियों के लिए विद्या सरस्वती मंत्र

सरस्वती नमस्तुभ्यम।
वरदे कामरूपिनी॥
विद्यारंबम करिष्यामि।
सिद्धिर बावथुमे साधा॥

विद्यारंभ करने के लिए

विद्यारंभं करिष्यामि, प्रसन्ना भव सर्वदा॥
ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्‌।

परीक्षा में सफलता प्राप्ति

नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।

सरस्वती वन्दना 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥

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