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Vasant Panchami 2026: वसंत पंचमी कब? किस मुहूर्त में करें मां सरस्वती की पूजा, नोट करें तारीख, शुभ योग और महत्व

Vasant Panchami 2026 Date: ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री से बात की. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, इस बार वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. वहीं, सरस्वती पूजा के लिए 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. आइए जानते हैं कि वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा मुहूर्त और योग क्या हैं?

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: 2026-01-18 13:38:32

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Vasant Panchami 2026 Date: वसंत पंचमी कब है? क्यों मनाया जाता है वसंत पंचमी का त्योहार? वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का मुहू्र्त क्या है? ऐसे तमाम सवाल होंगे, जिन्हें लोग जानना चाहते हैं. इनको जानने के लिए India News ने उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री से बात की. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, इस बार वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. वहीं, सरस्वती पूजा के लिए 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. बता दें कि, वसंत पंचमी के दिन देवी मां सरस्वती अवतरित हुई थीं, जिनके एक हाथ में पुस्तक, दूसरे हाथ में वीणा, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था. इसलिए मां सरस्वती को बुद्धि, कला और संगीत की देवी कहा जाता है. इसलिए वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है उनकी कृपा से ज्ञान में वृद्धि होती है. खासकर कला, विद्या और संगीत के साधकों के लिए इस दिन का अधिक महत्व है. आइए जानते हैं कि वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा मुहूर्त और योग क्या हैं?

वसंत पंचमी की सही तारीख

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, इस साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी शुक्रवार को तड़के 02 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ हो रही है. यह तिथि 24 जनवरी शनिवार को मध्य रात्रि 01 बजकर 46 एएम तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर वसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को है. और उस दिन ही सरस्वती पूजा होगी.

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त?

23 जनवरी को सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 13 मिनट से है, जो दोपहर में 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. इस समय में आपको सरस्वती पूजा कर लेनी चाहिए. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 05:26 ए एम से 06:20 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:12 पी एम से लेकर 12:54 पी एम तक है. वसंत पंचमी के मध्याह्न का क्षण दोपहर में 12:33 पी एम पर है. उस दिन निशिता मुहूर्त 12:06 ए एम से लेकर 24 जनवरी को 01:00 ए एम तक है.

सरस्वती पूजा के समय में लाभ?

उन्नति मुहूर्त सुबह में 08:33 ए एम से 09:53 ए एम तक है. उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 09:53 ए एम से 11:13 ए एम तक रहेगा. वसंत पंचमी पर राहुकाल 11:13 ए एम से दोपहर 12:33 पी एम तक है. पूरे दिन पंचक रहेगा.

किस योग में होगी सरस्वती पूजा?

इस साल सरस्वती पूजा के समय परिघ योग बन रहा है. परिघ योग प्रात:काल से लेकर दोपहर में 3 बजकर 59 पी एम तक रहेगा. इसे शुभ योग माना जाता है. उसके बाद से शिव योग बनेगा.

सरस्वती पूजा के दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र प्रात: काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 33 पी एम तक है. फिर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है. वसंत पंचमी के दिन रवि योग भी बन रहा है, लेकिन यह दोपहर में 02:33 पी एम से बनेगा और अगले दिन 24 जनवरी को सुबह 07:13 ए एम तक रहेगा.

वसंत पंचमी का महत्व क्या है?

वसंत पंचमी से ऋतुराज वसंत का आगमन होता है. इस पंचमी से लोग होरी तथा धमार गीत गाते हैं. पूरे धरती पर सरसों के पीले फूल लहलहाते हैं, जैसे मानो पूरी धरती ने पीले रंग की चादर ओढ़ ली हो. वसंत पंचमी पर जौ, गेहूं की बालियां देवी और देवतओं को अर्पित करते हैं.

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Vasant Panchami 2026: वसंत पंचमी कब? किस मुहूर्त में करें मां सरस्वती की पूजा, नोट करें तारीख, शुभ योग और महत्व

Vasant Panchami 2026 Date: ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री से बात की. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, इस बार वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. वहीं, सरस्वती पूजा के लिए 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. आइए जानते हैं कि वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा मुहूर्त और योग क्या हैं?

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: 2026-01-18 13:38:32

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Vasant Panchami 2026 Date: वसंत पंचमी कब है? क्यों मनाया जाता है वसंत पंचमी का त्योहार? वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का मुहू्र्त क्या है? ऐसे तमाम सवाल होंगे, जिन्हें लोग जानना चाहते हैं. इनको जानने के लिए India News ने उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री से बात की. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, इस बार वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. वहीं, सरस्वती पूजा के लिए 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. बता दें कि, वसंत पंचमी के दिन देवी मां सरस्वती अवतरित हुई थीं, जिनके एक हाथ में पुस्तक, दूसरे हाथ में वीणा, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था. इसलिए मां सरस्वती को बुद्धि, कला और संगीत की देवी कहा जाता है. इसलिए वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है उनकी कृपा से ज्ञान में वृद्धि होती है. खासकर कला, विद्या और संगीत के साधकों के लिए इस दिन का अधिक महत्व है. आइए जानते हैं कि वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा मुहूर्त और योग क्या हैं?

वसंत पंचमी की सही तारीख

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, इस साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी शुक्रवार को तड़के 02 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ हो रही है. यह तिथि 24 जनवरी शनिवार को मध्य रात्रि 01 बजकर 46 एएम तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर वसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को है. और उस दिन ही सरस्वती पूजा होगी.

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त?

23 जनवरी को सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 13 मिनट से है, जो दोपहर में 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. इस समय में आपको सरस्वती पूजा कर लेनी चाहिए. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 05:26 ए एम से 06:20 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:12 पी एम से लेकर 12:54 पी एम तक है. वसंत पंचमी के मध्याह्न का क्षण दोपहर में 12:33 पी एम पर है. उस दिन निशिता मुहूर्त 12:06 ए एम से लेकर 24 जनवरी को 01:00 ए एम तक है.

सरस्वती पूजा के समय में लाभ?

उन्नति मुहूर्त सुबह में 08:33 ए एम से 09:53 ए एम तक है. उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 09:53 ए एम से 11:13 ए एम तक रहेगा. वसंत पंचमी पर राहुकाल 11:13 ए एम से दोपहर 12:33 पी एम तक है. पूरे दिन पंचक रहेगा.

किस योग में होगी सरस्वती पूजा?

इस साल सरस्वती पूजा के समय परिघ योग बन रहा है. परिघ योग प्रात:काल से लेकर दोपहर में 3 बजकर 59 पी एम तक रहेगा. इसे शुभ योग माना जाता है. उसके बाद से शिव योग बनेगा.

सरस्वती पूजा के दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र प्रात: काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 33 पी एम तक है. फिर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है. वसंत पंचमी के दिन रवि योग भी बन रहा है, लेकिन यह दोपहर में 02:33 पी एम से बनेगा और अगले दिन 24 जनवरी को सुबह 07:13 ए एम तक रहेगा.

वसंत पंचमी का महत्व क्या है?

वसंत पंचमी से ऋतुराज वसंत का आगमन होता है. इस पंचमी से लोग होरी तथा धमार गीत गाते हैं. पूरे धरती पर सरसों के पीले फूल लहलहाते हैं, जैसे मानो पूरी धरती ने पीले रंग की चादर ओढ़ ली हो. वसंत पंचमी पर जौ, गेहूं की बालियां देवी और देवतओं को अर्पित करते हैं.

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