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Basant Or Vasant Panchami: वसंत पंचमी या बसंत पंचमी में से कौन सही है, प्राचीन ग्रंथ और लोकप्रियता का प्रभाव ने कैसे इसे बदला, जानें बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त

Basant Or Vasant Panchami: लोगों के मन में सवाल आता है कि बसंत पंचमी और वसंत पंचमी में से कौन सा शब्द सही है? तो चलिए जानते हैं कि हमारे ग्रंथों और वर्तमान में लोगों ने इसे कैसे बदल दिया? पूजा के लिए सही मुहूर्त के लिए पढ़ें पूरी खबर.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: 2026-01-22 10:59:52

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Basant Or Vasant Panchami: हिंदू पंचांग के मुताबिक, माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हर साल वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. यह दिन संगी, विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा के तौर पर मनाया जाता है. मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. इसलिए इसे उनके जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है. लेकिन, समय के साथ इस शब्द में अंतर दिखाई दे रहा है. कुछ लोग इसे बसंत तो कुछ वसंत पंचमी कहते हैं. इस तरह देखा जाए तो सही और गलत के बीच एक कंफ्यूजन होने लगा है. ज्यादातर जगह इंटरनेट पर बसंत लिखने का चलन है. चलिए जानते हैं सही क्या है?

दोनों सही हैं लेकिन उत्पत्ति में अंतर है:

वसंत पंचमी और बसंत पंचमी को लेकर अक्सर यही सवाल रहता है कि सही कौन सा है? तो बता दें कि दोनों ही सही हैं. दरअसल, वसंत का उल्लेख हमारे कई धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है. वसंत पंचमी को वसंत ऋतु के लगने से भी माना है. मतलब इस दिन से न तो ज्यादा गर्मी और न ज्यादा ठंडी रहती है. मौसम सुहावना और एक जैसा बना रहता है. धार्मिक ग्रंथों, कैलेंडर, अनुष्ठानों और औपचारिक लेखन में वसंत का इस्तेमाल किया जाता है. उत्तर भारत, संस्कृत-आधारित परंपराओं को देखें तो यही शब्द चलन में है. साथ ही वेद और ब्राह्मण ग्रंथ की बात करें तो वसंत ऋतु को छह ऋतुओं में से पहली और सबसे शुभ ऋतु बताया गया है. 

इस ऋतु का आगमन नवीनीकरण, उर्वरता, सीखने और शुभ शुरुआत से लगाया जाता है. ‘वसंत’ शब्द का इस्तेमाल प्राचीन वैदिक किताबों में कई बार हुआ है लेकिन ‘बसंत’ शब्द ग्रंथों में कहीं नहीं है. अगर हम प्राचीन ग्रंथ की बात करें तो वैदिक और शास्त्रीय साहित्य में हमें वसंत शब्द मिलता है. स्कंद पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण और कालिदास की रचना ऋतुसंहार में भी वसंत शब्द ही देखने को मिलता है. धर्मशास्त्र और पंचांग ग्रंथ के तौर पर बात की जाए तो हेमाद्रि के चतुर्वर्ग चिंतामणि और पारंपरिक हिंदू पंचांग इस उत्सव को वसंत ऋतु या शुक्ल पंचमी के तौर पर यूज करते हैं. 

बसंत पंचमी’ कहाँ से आया?

वहीं, बसंत शब्द की बात की जाए तो यह भाषा के उच्चारण से टूटकर बना है. जानकार इसे फ़ारसी-प्रभावित उच्चारण हिंदी/उर्दू से उत्पन्न हुआ बताते हैं. जो वसंत ऋतु को ही दर्शाता है. रोज़मर्रा की बातचीत, लोकगीतों, क्षेत्रीय साहित्य और मीडिया में लोकप्रियता की वजह से इसका अपभ्रंश हुआ है और यह वसंत से बसंत बन गया. क्षेत्र के तौर पर पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और लोकप्रिय संस्कृति में यह बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है.

तो कुल मिलाकर अगर सही और गलत की बात की जाए तो वसंत प्रामाणिकता के तौर पर शुध्द शब्द है जबकि बसंत को आम बोलचाल की भाषा में यूज किया जाने लगा है. बसंत पंचमी डिजिटल की दुनिया में काफी प्रचलित हो रहा है. इंटरनेट पर इसका प्रसार अधिक है क्योंकि यह सर्च रैंकिंग के आधार पर रिजल्ट देता है. लोग वसंत की जगह बसंत को अधिक सर्च कर रहे होंगे इसलिए इंटरनेट पर आपको यह शब्द ज्यादा दिखाई पड़ेगा.

पंचमी या पञ्चमी

बसंत या वसंत के अलावा शब्दों में पंचमी और पञ्चमी में भी समय के अनुसार काफी बदलाव देखने को मिला. पहले वसंत पञ्चमी ही लिखा जाता था और शुध्द रूप यही है, लेकिन वक्त के साथ इसमें भी अपभ्रंश हुआ और यह बसंत पंचमी बन गया, जो आम लोगों के बोलने और इंटरनेट पर सर्च के आधार पर हुआ.

कब है बसंत पंचमी

ऋषिकेश पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी. पंचांग की मानें तो माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी को रात्रि 2 बजकर 28 मिनट पर हो रही है. जबकि पंचमी तिथि का समापन 24 जनवरी को रात्रि 1 बजकर 46 मिनट पर होगा. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, उदया तिथि को मान्यता देने की परंपरा के चलते 23 जनवरी को ही बसंत पंचमी या वसंत पंचमी मनाना शास्त्रसम्मत है. इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है.

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पूजा का शुभ मुहूर्त:

भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित प्रमोद पांडेय के अनुसार  बसंत पंचमी के दिन सरस्वती मां की पूजा की जाती है. वे ज्ञान और संपन्नता को देने वाली देवी हैं. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक बताया गया है. इस वक्त जो भी विद्यार्थी और अन्य लोग मां सरस्वती की विधिवत पूजा करते हैं तो उन विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान साधकों को मां की कृपा होती है. शुभ मुहूर्त में पूजा कर मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत फलदायी माना गया है.

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं. यह विभिन्न स्त्रोतो से ली गई है. विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.)

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