Culture Food Habits: हम रोज खाना खाते हैं, लेकिन अक्सर जल्दी में, मोबाइल देखते हुए या बिना ध्यान दिए. क्या आपने कभी रुककर सोचा है कि खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं है? भोजन हमारी ऊर्जा, सोच और संस्कार से भी जुड़ा होता है. भारतीय संस्कृति में अन्न को ‘ ब्रह्म’ भी कहा गया है, और शास्त्रों में इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं. अगर इन्हें अपनाया जाए, तो न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि मन शांत और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है.
भोजन को पवित्र क्यों माना गया?
हिंदू शास्त्रों में अन्न को देवी अन्नपूर्णा और भगवान विष्णु से जोड़ा गया है. मनुस्मृति और गरुड़ पुराण में लिखा है कि जिस भाव से हम खाना खाते हैं, उसका असर हमारे जीवन पर पड़ता है. भोजन को केवल खाना नहीं बल्कि यज्ञ माना गया है. पुराने लोग कहते थे कि तनाव या गुस्से में खाया गया भोजन शरीर को सही पोषण नहीं देता, और यह आज भी सच लगता है.
आधुनिक जीवन और बदलती आदतें
तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर ऑफिस में डेस्क पर खाना, चलते-फिरते स्नैक्स, देर रात का डिनर कर लेते हैं, इन सबमें ध्यान और भावनात्मक जुड़ाव खो जाता है. शास्त्रीय नियम हमें रुककर, खुद और अपने भोजन से जुड़ने का अवसर देते हैं.
खाने से पहले अपनाने योग्य सरल नियम
- हाथ-पैर धोकर खाना,यह केवल स्वच्छता नहीं, बल्कि शुद्ध मन और ऊर्जा का प्रतीक है.
- ईश्वर का स्मरण- खाने से पहले मन में धन्यवाद कहना और अन्न ब्रह्म है कहना भोजन को सम्मान और पवित्रता देता है.
- पहला अंश दूसरों के लिए- जरूरतमंद या पशुओं को भोजन देना करुणा और अहंकार से दूर रहने की सीख देता है.
- शांत मन से भोजन- मोबाइल, टीवी या बहस से दूर रहकर खाना हल्का और सुखद अनुभव बनाता है.
खाने के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- अन्न की बुराई न करें- जो मिला है, उसे सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करें.
- जरूरत से ज्यादा न खाएं- संयम शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है.