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Home > धर्म > Who is Pharaoh: 3000 साल से ताबूत में कैद है जिसकी लाश, मुसलमान करते हैं बेहद नफरत; आखिर कौन है फिरौन?

Who is Pharaoh: 3000 साल से ताबूत में कैद है जिसकी लाश, मुसलमान करते हैं बेहद नफरत; आखिर कौन है फिरौन?

Pharaoh History: इस्लामिक तौर पर देखा जाए तो मुसलमान जिसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं वो कोई और नहीं वो फिरौन हैं वहीं आज भी मुस्लिम समुदाय के लोग इस नाम से बेहद नफरत करते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है ऐसा क्यों?

Written By: Heena Khan
Last Updated: April 11, 2026 11:08:33 IST

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Pharaoh History: इस्लामिक तौर पर देखा जाए तो मुसलमान जिसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं वो कोई और नहीं वो फिरौन हैं वहीं आज भी मुस्लिम समुदाय के लोग इस नाम से बेहद नफरत करते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है ऐसा क्यों? आज हम आपको इसी का जवाब देने वाले हैं. बता दें कि फिरौन वो शख्स है जिसे दुनियाभर का हर मुसलमान शिद्द्त से नफरत करता है. मरने के हजारों साल बाद भी इस शख्स की लाश एक ताबूत में कैद है. जानकारी के मुताबिक फ़िरौन की लाश का आज भी सुरक्षित होना एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्य माना जाता है, जिसे कई लोग कुरान और बाइबिल में वर्णित घटनाओं से जोड़ते हैं. बता दें कि इस्लाम धर्म के लोग फिरौन को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं. आज हम बताएंगे कि ये शख्स कौन था और इस्लाम धर्म के लोग इससे इतनी नफरत क्यों करते हैं? 

ऐसे हुई फिरौन की मौत 

इस्लाम के मुताबिक प्राचीन मिस्र के कई राजाओं की ममी आज भी संग्रहालयों में सुरक्षित रखी हुई हैं. इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि पैगंबर मूसा की कहानी में जिस फिरौन का ज़िक्र है, वो एक क्रूर शासक था. ये मिस्र का एक ऐसा राजा था जिसे काफी घमंडी और गुस्से वाला माना जाता था. बता दें कि उस फिरौन ने मूसा और बनी इसराइल का पीछा किया, तो वो और उसकी सेना समुद्र में डूब गए, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई. इस्लामी परंपरा के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि उस फिरौन का शव आज भी एक ममी के रूप में सुरक्षित रखा हुआ है. ऐसा इसलिए किया गया ताकि लोग यह समझ सकें कि जो लोग बुराई करते हैं, उनका अंत निश्चित रूप से बहुत बुरा होता है.

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फिरौन से नफरत क्यों करते हैं मुसलमान? 

मुसलमान फिरौन से इसलिए नफरत करते हैं क्योंकि इस्लामिक परंपरा में उसे एक घमंडी और अत्याचारी शासक के रूप में बताया गया है, जिसने मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात मानने से इनकार किया, खुद को ईश्वर तक कह दिया, और बनी इस्राईल पर ज़ुल्म किया. कुरआन में फ़िरऔन की कहानी को अहंकार, अन्याय और सत्य के विरोध के प्रतीक के रूप में पेश किया गया है, इसलिए मुसलमान उसे एक नकारात्मक उदाहरण मानते हैं और उसकी निंदा करते हैं, ताकि लोग उसके जैसे व्यवहार से बचें. इस्लाम के मुताबिक, उसने अल्लाह के आदेशों की अवहेलना की और डूबकर मर गया. आज, ऐसा माना जाता है कि फिरौन के शरीर की ममी  मिस्र के संग्रहालय में रखी गई है. इस पर वैज्ञानिक शोध भी हुए हैं, जिससे पता चलता है कि उसकी मौत डूबने या अचानक सदमे से हुई होगी.

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Last Updated: April 11, 2026 11:08:33 IST

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Pharaoh History: इस्लामिक तौर पर देखा जाए तो मुसलमान जिसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं वो कोई और नहीं वो फिरौन हैं वहीं आज भी मुस्लिम समुदाय के लोग इस नाम से बेहद नफरत करते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है ऐसा क्यों? आज हम आपको इसी का जवाब देने वाले हैं. बता दें कि फिरौन वो शख्स है जिसे दुनियाभर का हर मुसलमान शिद्द्त से नफरत करता है. मरने के हजारों साल बाद भी इस शख्स की लाश एक ताबूत में कैद है. जानकारी के मुताबिक फ़िरौन की लाश का आज भी सुरक्षित होना एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्य माना जाता है, जिसे कई लोग कुरान और बाइबिल में वर्णित घटनाओं से जोड़ते हैं. बता दें कि इस्लाम धर्म के लोग फिरौन को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं. आज हम बताएंगे कि ये शख्स कौन था और इस्लाम धर्म के लोग इससे इतनी नफरत क्यों करते हैं? 

ऐसे हुई फिरौन की मौत 

इस्लाम के मुताबिक प्राचीन मिस्र के कई राजाओं की ममी आज भी संग्रहालयों में सुरक्षित रखी हुई हैं. इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि पैगंबर मूसा की कहानी में जिस फिरौन का ज़िक्र है, वो एक क्रूर शासक था. ये मिस्र का एक ऐसा राजा था जिसे काफी घमंडी और गुस्से वाला माना जाता था. बता दें कि उस फिरौन ने मूसा और बनी इसराइल का पीछा किया, तो वो और उसकी सेना समुद्र में डूब गए, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई. इस्लामी परंपरा के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि उस फिरौन का शव आज भी एक ममी के रूप में सुरक्षित रखा हुआ है. ऐसा इसलिए किया गया ताकि लोग यह समझ सकें कि जो लोग बुराई करते हैं, उनका अंत निश्चित रूप से बहुत बुरा होता है.

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फिरौन से नफरत क्यों करते हैं मुसलमान? 

मुसलमान फिरौन से इसलिए नफरत करते हैं क्योंकि इस्लामिक परंपरा में उसे एक घमंडी और अत्याचारी शासक के रूप में बताया गया है, जिसने मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात मानने से इनकार किया, खुद को ईश्वर तक कह दिया, और बनी इस्राईल पर ज़ुल्म किया. कुरआन में फ़िरऔन की कहानी को अहंकार, अन्याय और सत्य के विरोध के प्रतीक के रूप में पेश किया गया है, इसलिए मुसलमान उसे एक नकारात्मक उदाहरण मानते हैं और उसकी निंदा करते हैं, ताकि लोग उसके जैसे व्यवहार से बचें. इस्लाम के मुताबिक, उसने अल्लाह के आदेशों की अवहेलना की और डूबकर मर गया. आज, ऐसा माना जाता है कि फिरौन के शरीर की ममी  मिस्र के संग्रहालय में रखी गई है. इस पर वैज्ञानिक शोध भी हुए हैं, जिससे पता चलता है कि उसकी मौत डूबने या अचानक सदमे से हुई होगी.

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