Swaha In Hawan: सनातन धर्म में हवन-यज्ञ का विशेष महत्व है. यह धार्मिक परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है. उस वक्त साधु संत, राजा महाराजा बड़े-बड़े महायज्ञ, पूजा-पाठ का कार्यक्रम करते रहे थे. उसी परंपरा को आज भी बढ़ाया जा रहा है. लगभग हर मंदिर या घरों में पूजा के बाद हवन जरूर किया जाता है. इस वक्त आपने अक्सर देखा होगा कि, हवन करते समय स्वाहा शब्द का उच्चारण जरूर किया जाता है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर, हवन-यज्ञ करते समय स्वाहा क्यों बोलते हैं? स्वाहा का अर्थ क्या होता है? इस शब्द का अग्निदेव से क्या संबंध? हवन में सामग्री क्यों डालते हैं? इस शब्द का जिक्र श्रीमद्भागवत गीता और शिव पुराण में किया गया है. आइए जानते हैं हवन में समय स्वाहा बोलने के कारण-
पूजा के बाद हवन क्यों किया जाता है?
हिंदू धर्म में हवन को शुद्धिकरण का एक कर्मकांड माना गया है. कहा जाता है पूजा-पाठ समेत कोई भी धार्मिक कार्य हवन के बिना अधूरा है. जिसके जरिेए आसपास की नकारात्मक और बुरी आत्माओं के प्रभाव को खत्म किया जाता है. ग्रह दोष से पीड़ित व्यक्ति को ग्रह शांति के लिए हवन करने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि हवन पूर्ण होने के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवा कर दान देना चाहिए. साथ ही हवन से वास्तु दोष भी दूर होते हैं.
हवन में सामग्री की आहुति क्यों देते हैं?
धर्म शास्त्रों के मुताबिक, प्राचीन काल से ही यज्ञ की वेदी में आहुति देते समय स्वाहा शब्द का इस्तेमाल किया जाता रहा है. जब भी कोई हवन होता है तो यज्ञ की वेदी में स्वाहा का उच्चारण करते हुए हवन सामग्री हवन कुंड में अर्पित की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि यही हवन सामग्री का भोग अग्नि के जरिए देवताओं तक पहुंचाया जाता है. कोई भी हवन या यज्ञ तब तक सफल नहीं माना जाता जब तक हवन सामग्री (हविष्य) का ग्रहण देवता ना कर लें. साथ ही देवता यह हविष्य तभी ग्रहण करते हैं जब अग्नि के द्वारा स्वाहा के माध्यम से अर्पित किया जाता है.
स्वाहा का अग्निदेव से संबंध क्या?
उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री के अनुसार, पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि स्वाहा, अग्नि देव की पत्नी हैं. ऐसे में हवन के समय स्वाहा शब्द का उच्चारण करते हुए हवन सामग्री अग्नि देव के जरिए देवताओं तक पहुंचाई जाती है. पुराणों में उल्लेख है कि ऋग्वेद काल में देवता और मनुष्य के बीच अग्नि को माध्यम के रूप में चुना गया था.
मान्यता है कि अग्नि में जो भी सामग्री पाई जाती है पवित्र हो जाती है. अग्नि के माध्यम से अग्नि में दी जाने वाली सभी सामग्री देवताओं तक पहुंच जाती है. श्रीमद्भागवत गीता और शिव पुराण में इससे जुड़ी कई कथाओं का उल्लेख मिलता है. यही वजह है कि हवन करते समय स्वाहा शब्द का उच्चारण किया जाता है.