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चैत्र नवरात्र से ही क्यों शुरू होता है हिंदू नववर्ष? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और खास महत्व

Chaitra Navratri 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से नए साल की शुरुआत मानी जाती है और इसी समय चैत्र नवरात्र भी शुरू होते हैं.  इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. आइए जानते हैं आखिर हिंदू नववर्ष की शुरूवात चैत्र नवरात्र से ही क्यों होती है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 9, 2026 11:10:33 IST

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Hindu New Year: हिंदू धर्म में ‘नवरात्र’ का विशेष महत्व माना जाता है. सालभर में कुल चार नवरात्र आते हैं. इनमें से पहली चैत्र नवरात्र, दूसरी आषाढ़ नवरात्र, तीसरी और सबसे प्रमुख शारदीय नवरात्र (अश्विन माह) और साल के अंत में माघ माह की गुप्त नवरात्र होती हैं. इन सभी नवरात्रों का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है.हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से ही नए साल की शुरुआत मानी जाती है और इसी समय चैत्र नवरात्र भी आरंभ होते हैं. यही कारण है कि बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर हिंदू नववर्ष की शुरुआत इसी समय से क्यों मानी जाती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की शुरुआत चैत्र नवरात्र के पहले दिन से मानी जाती है. कहा जाता है कि इसी दिन देवी शक्ति ने ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना करने का कार्य सौंपा था. इसके बाद ब्रह्मा जी ने पूरे ब्रह्मांड की संरचना की शुरुआत की. इसलिए यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक माना जाता है और इसी कारण से हिंदू नववर्ष की गणना भी इसी समय से शुरू होती है.

 देवी शक्ति से जुड़ा महत्व

कुछ पौराणिक कथाओं में यह भी बताया गया है कि सृष्टि की रचना से पहले चारों ओर केवल अंधकार ही था. उस समय आदिशक्ति ने अपने दिव्य स्वरूप से सृष्टि के निर्माण में अहम भूमिका निभाई. मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे त्रिदेवों की उत्पत्ति हुई और बाद में इन्हीं के माध्यम से सृष्टि का संचालन शुरू हुआ.इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि इसी समय लक्ष्मी, सरस्वती और काली जैसी देवियों का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने सृष्टि के अलग-अलग कार्यों को संतुलित किया.

 नवरात्र और नए साल की शुरुआत

इसी पौराणिक मान्यता के चलते चैत्र नवरात्र को नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और लोग आने वाले वर्ष के लिए सुख, समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं.इतना ही नहीं, हिंदू पंचांग की गणना भी इसी समय से प्रारंभ होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र के दौरान ही हुआ था, जिससे इस अवधि का महत्व और भी बढ़ जाता है.इस प्रकार चैत्र नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व ही नहीं, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत और सृष्टि के आरंभ से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 9, 2026 11:10:33 IST

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Hindu New Year: हिंदू धर्म में ‘नवरात्र’ का विशेष महत्व माना जाता है. सालभर में कुल चार नवरात्र आते हैं. इनमें से पहली चैत्र नवरात्र, दूसरी आषाढ़ नवरात्र, तीसरी और सबसे प्रमुख शारदीय नवरात्र (अश्विन माह) और साल के अंत में माघ माह की गुप्त नवरात्र होती हैं. इन सभी नवरात्रों का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है.हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से ही नए साल की शुरुआत मानी जाती है और इसी समय चैत्र नवरात्र भी आरंभ होते हैं. यही कारण है कि बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर हिंदू नववर्ष की शुरुआत इसी समय से क्यों मानी जाती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की शुरुआत चैत्र नवरात्र के पहले दिन से मानी जाती है. कहा जाता है कि इसी दिन देवी शक्ति ने ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना करने का कार्य सौंपा था. इसके बाद ब्रह्मा जी ने पूरे ब्रह्मांड की संरचना की शुरुआत की. इसलिए यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक माना जाता है और इसी कारण से हिंदू नववर्ष की गणना भी इसी समय से शुरू होती है.

 देवी शक्ति से जुड़ा महत्व

कुछ पौराणिक कथाओं में यह भी बताया गया है कि सृष्टि की रचना से पहले चारों ओर केवल अंधकार ही था. उस समय आदिशक्ति ने अपने दिव्य स्वरूप से सृष्टि के निर्माण में अहम भूमिका निभाई. मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे त्रिदेवों की उत्पत्ति हुई और बाद में इन्हीं के माध्यम से सृष्टि का संचालन शुरू हुआ.इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि इसी समय लक्ष्मी, सरस्वती और काली जैसी देवियों का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने सृष्टि के अलग-अलग कार्यों को संतुलित किया.

 नवरात्र और नए साल की शुरुआत

इसी पौराणिक मान्यता के चलते चैत्र नवरात्र को नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और लोग आने वाले वर्ष के लिए सुख, समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं.इतना ही नहीं, हिंदू पंचांग की गणना भी इसी समय से प्रारंभ होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र के दौरान ही हुआ था, जिससे इस अवधि का महत्व और भी बढ़ जाता है.इस प्रकार चैत्र नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व ही नहीं, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत और सृष्टि के आरंभ से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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