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भद्रा काल में क्यों नहीं जलती होलिका? जानिए इसका रहस्य, ज्योतिषीय महत्वता और नकारात्मक प्रभावों से बचने के आसान उपाय

Holika Dahan Festival 2026: होलिका दहन, छोटी होली की पूर्व संध्या पर मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है, यह त्योहार प्रह्लाद और होलिका की पौराणिक कथा से जुड़ा है.आइए जानते हैं भद्रा काल में होलिका दहन क्यों नहीं होता है ?

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-02-25 12:14:51

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Holika Dahan Rituals: होलिका दहन, जिसे छोटी होली भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जो दिखाती है कि भक्ति और धर्म की शक्ति हमेशा बुराई पर जीतती है. इस दिन परिवार और समाज के लोग होलिका की आग के आसपास इकट्ठा होकर पूजा करते हैं. आग बुराई और नकारात्मक ऊर्जा को जलाने का प्रतीक है. 

 होलिका दहन 2026: पर्व, महत्व और ज्योतिषीय जानकारी

  • तारीख: मंगलवार, 3 मार्च 2026
  • समय: शाम 6:22 बजे से 8:50 बजे तक
  • तिथि: पूर्णिमा (3 मार्च 2026 तक)

 होलिका दहन कैसे और क्यों मनाया जाता है?

यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. पौराणिक कथा के अनुसार प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे और उनके पिता हिरण्यकशिपु ने उन्हें मारने की योजना बनाई. हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि में सुरक्षित रहने का वरदान प्राप्त था. उसने प्रह्लाद के साथ आग में बैठकर उन्हें जलाने की कोशिश की, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति के कारण होलिका जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे.होलिका दहन के दौरान लकड़ी, गोबर के उपले और अन्य सामग्री से आग बनाई जाती है. परिवार इसके चारों ओर इकट्ठा होकर पूजा करता है. नारियल, मिठाई और अनाज आग में अर्पित किए जाते हैं, जो बलिदान का प्रतीक हैं. आग बुराई, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा को जलाने का संकेत देती है. पूजा के बाद राख माथे पर लगाने की परंपरा है, जिसे सुरक्षा और आशीर्वाद देने वाला माना जाता है.

ज्योतिषीय महत्व और भद्रा काल का ध्यान

होलिका दहन का समय सिर्फ सांस्कृतिक नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. गुरु और सूर्य की स्थिति इस समय सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है और जीवन में प्रगति, समृद्धि और बाधाओं को दूर करने का अवसर देती है.

गुरु का प्रभाव: ज्ञान और सौभाग्य के ग्रह गुरु की शुभ स्थिति इस समय पूजा में भाग लेने के लाभ को बढ़ाती है.

सूर्य का संक्रांति: होलिका दहन उत्तरायण के समय सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ आता है, जिसे हिंदू ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है.

भद्रा काल में होलिका दहन क्यों नहीं करना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार कुछ समय अशुभ माना जाता है और भद्रा काल भी ऐसा ही समय है. इस दौरान पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है. इसलिए, होलिका दहन का समय प्रात: या संध्या समय चुनना आवश्यक है.

होलिका की राख का महत्व

होलिका दहन की राख को पवित्र माना जाता है और इसे माथे पर लगाने से बुराई दूर होती है. यह नकारात्मक शक्तियों को खत्म करने और जीवन में नए, सकारात्मक बदलाव लाने का प्रतीक है.

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