Pooja Kalash Mango Leaves: हिंदू धर्म में आम के पत्तों का विशेष स्थान है. ये सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं होते, बल्कि गहरी आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़े होते हैं. पूजा, हवन, विवाह या किसी भी शुभ कार्य में आम के पत्तों का उपयोग सदियों से किया जाता रहा है. इन्हें समृद्धि, उर्वरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. आइए सरल शब्दों में समझते हैं कि आम के पत्तों को इतना पवित्र क्यों माना जाता है.
पूजा के समय कलश के ऊपर नारियल और उसके चारों ओर आम के पत्ते रखे जाते हैं. मान्यता है कि आम के पत्ते देवताओं के अंगों का प्रतीक होते हैं और नारियल दिव्य मस्तक का. इन दोनों का मिलन शुभ अवसर पर देवी-देवताओं की उपस्थिति दर्शाता है.आम के पत्तों को विशेष रूप से देवी लक्ष्मी से जोड़ा जाता है. इन्हें धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य में इनका उपयोग शुभ माना जाता है.
भगवान मुरुगन और गणेश से संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, आम का फल भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्रों को बहुत प्रिय था. एक कथा में बताया गया है कि भगवान मुरुगन ने अपने भक्तों को पूजा में आम के पत्ते बांधने की सलाह दी थी, ताकि घर में समृद्धि और उर्वरता बनी रहे.
प्रेम का प्रतीक
आम के पत्तों का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे रामायण और महाभारत में भी मिलता है. इन ग्रंथों में आम को उर्वरता और संतानों की प्राप्ति से जोड़ा गया है.आम के पत्ते और फूलों का संबंध कामदेव से भी माना जाता है. कामदेव को प्रेम का देवता कहा जाता है और उनके धनुष पर आम के फूलों का उल्लेख मिलता है. यह प्रेम और जीवन की निरंतरता का प्रतीक है.
घर में आम के पत्ते टांगने की परंपरा
अक्सर घरों के दरवाजों और खिड़कियों पर आम के पत्तों की तोरण बांधी जाती है. मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है. हरे-भरे पत्ते सुख-शांति और अच्छे कर्मों को आकर्षित करने का प्रतीक माने जाते हैं.आम के पत्तों का उपयोग सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी किया जाता है. मान्यता है कि हरे पत्ते वातावरण को शुद्ध बनाने में सहायक होते हैं. बड़े आयोजनों में इनका उपयोग वातावरण को ताजा और पवित्र बनाए रखने के लिए किया जाता है.