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Home > धर्म > मंदिर में पूजा के बाद परिक्रमा क्यों जरूरी मानी जाती है? जानिए कैसे दूर होती हैं जीवन की समस्याएं

मंदिर में पूजा के बाद परिक्रमा क्यों जरूरी मानी जाती है? जानिए कैसे दूर होती हैं जीवन की समस्याएं

Number of Rounds: अक्सर आपने देखा होगा कि मंदिर में पूजा के बाद लोग श्रद्धा से परिक्रमा करते हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि परिक्रमा किस लिए कि जाती है,धार्मिक ग्रंथों में इस विषय को विस्तार से समझाया गया है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: April 7, 2026 18:05:36 IST

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Parikrama in Temple: मान्यता है कि देवी-देवताओं की मूर्ति से सकारात्मक ऊर्जा उत्तर दिशा से दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होती है. यही कारण है कि परिक्रमा हमेशा दाईं ओर से शुरू की जाती है और घड़ी की दिशा में पूरी की जाती है.इसी प्रक्रिया को प्रदक्षिणा कहा जाता है, जिसका अर्थ है,ईश्वर को अपने केंद्र में रखकर उनके चारों ओर घूमना.

किस देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

परिक्रमा की संख्या भी विशेष महत्व रखती है. सामान्यतः इसे विषम संख्या (1, 3, 5, 7, 9, 11, 21) में किया जाता है, लेकिन कुछ देवी-देवताओं के लिए अलग नियम बताए गए हैं:

  •  सूर्य देव – 7 बार
  •  गणेश जी – 3 बार
  •  मां दुर्गा -1 बार
  •  हनुमान जी – 3 बार
  •  भगवान शिव (शिवलिंग) – आधी परिक्रमा (जलधारी पार नहीं करते)
  •  शिव-पार्वती – 3 बार
  •  शनिदेव – 7 बार
  •  भगवान विष्णु और उनके अवतार – 4 बार

परिक्रमा के दौरान कौन सा मंत्र बोलें?

परिक्रमा करते समय इस मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है:

“यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च.
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे..”

इसका भावार्थ है कि इस जन्म और पिछले जन्मों के सभी पाप, हर कदम के साथ समाप्त हो जाएं. श्रद्धा के साथ इस मंत्र का उच्चारण करने से मन में शांति और सकारात्मकता बढ़ती है.

परिक्रमा से क्या मिलते हैं लाभ?

जब व्यक्ति पूरी आस्था के साथ परिक्रमा करता है, तो उसके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. धीरे-धीरे जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं और मानसिक शांति मिलती है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे नकारात्मकता दूर होती है, आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से भी आगे बढ़ता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: April 7, 2026 18:05:36 IST

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Parikrama in Temple: मान्यता है कि देवी-देवताओं की मूर्ति से सकारात्मक ऊर्जा उत्तर दिशा से दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होती है. यही कारण है कि परिक्रमा हमेशा दाईं ओर से शुरू की जाती है और घड़ी की दिशा में पूरी की जाती है.इसी प्रक्रिया को प्रदक्षिणा कहा जाता है, जिसका अर्थ है,ईश्वर को अपने केंद्र में रखकर उनके चारों ओर घूमना.

किस देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

परिक्रमा की संख्या भी विशेष महत्व रखती है. सामान्यतः इसे विषम संख्या (1, 3, 5, 7, 9, 11, 21) में किया जाता है, लेकिन कुछ देवी-देवताओं के लिए अलग नियम बताए गए हैं:

  •  सूर्य देव – 7 बार
  •  गणेश जी – 3 बार
  •  मां दुर्गा -1 बार
  •  हनुमान जी – 3 बार
  •  भगवान शिव (शिवलिंग) – आधी परिक्रमा (जलधारी पार नहीं करते)
  •  शिव-पार्वती – 3 बार
  •  शनिदेव – 7 बार
  •  भगवान विष्णु और उनके अवतार – 4 बार

परिक्रमा के दौरान कौन सा मंत्र बोलें?

परिक्रमा करते समय इस मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है:

“यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च.
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे..”

इसका भावार्थ है कि इस जन्म और पिछले जन्मों के सभी पाप, हर कदम के साथ समाप्त हो जाएं. श्रद्धा के साथ इस मंत्र का उच्चारण करने से मन में शांति और सकारात्मकता बढ़ती है.

परिक्रमा से क्या मिलते हैं लाभ?

जब व्यक्ति पूरी आस्था के साथ परिक्रमा करता है, तो उसके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. धीरे-धीरे जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं और मानसिक शांति मिलती है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे नकारात्मकता दूर होती है, आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से भी आगे बढ़ता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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