Bhang in Holi: होली 2024: रंगों का त्योहार होली हर किसी को पसंद होता है. होली पर रंग बरसाने के लिए बस अब एक दिन ही बाकी है. लोगों को पूरे साल होली के त्योहार का इंतजार रहता है. हर साल होली पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है. सड़कें सज जाती हैं और लोग एक-दूसरे के चेहरों पर रंग लगाते हैं. होली भगवान कृष्ण और देवी राधा के हमेशा रहने वाले प्यार और मिलन का जश्न है.
होली पर लोगों में भाग पीने को लेकर काफी क्रेज रहता है. तो चलिए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह होती है? यह हिरण्यकश्यप पर भगवान विष्णु की जीत का भी जश्न मनाता है, जो यह बताता है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीतती है. इस साल होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. होली से एक दिन पहले छोटी होली या होलिका दहन मनाया (Bhang in Holi) जाता है.
होली पर भांग है सबसे खास चीज
होली पर बनाई जाने वाली सबसे खास ड्रिंक्स में से एक है भांग. इसे ठंडाई के नाम से भी जाना जाता है. यह एक ड्रिंक है जो मादा कैनेबिस पौधे की पत्तियों और फूलों के पेस्ट से बनता है. इसे पहले अच्छी तरह से घोंटा जाता है और फिर दूध, मसालों और मिठाइयों के साथ मिलाया जाता है. होली के दिन लोगों में भांग पीने (Bhang in Holi) का भूत सवार हो जाता है. पुरुष ही नहीं महिलाएं और बुजुर्ग भी भांग को ठंडाई के रूप में पीते हैं. होली के शुभ दिन पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई परंपराएं निभाई जाती हैं. लट्ठमार होली उत्तर प्रदेश में मथुरा के पास के दो शहरों नंदगांव और बरसाना में मनाई जाती है. घर पर होली के खास स्नैक्स और ड्रिंक्स बनाए जाते हैं जिनका परिवार और दोस्तों के साथ मज़ा लिया जाता है.
होली पर लोग भांग क्यों पीते हैं?
होली पर भांग पीने का रिवाज कोई नया नहीं है बल्कि सदियों पुराना है. शास्त्रों में बताया गया और ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव भांग पीते थे और यह उनकी पसंदीदा ड्रिंक्स में से एक थी. होली के दौरान लोग भांग का सेवन (Bhang in Holi) इसके उत्साह बढ़ाने वाले असर के लिए करते हैं. हालांकि, भांग के अपने हेल्थ बेनिफिट्स भी हैं. इसके मेडिसिनल फायदे हैं और यह मन और शरीर पर शांत असर डालने के लिए जाना जाता है. यह शरीर को एंग्जायटी और स्ट्रेस से भी राहत देता है. यह डाइजेशन को बेहतर बनाने और दर्द और सूजन के लक्षणों को कम करने में मदद करता है. भांग पीने से शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ती है. हालांकि, भांग की कितनी मात्रा लेनी है, इसका ध्यान रखना चाहिए.
होली के दौरान भांग पीने का रिवाज भगवान शिव से जुड़ा है. शिव हिंदू धर्म में तीन बड़े देवताओं की त्रिमूर्ति का हिस्सा हैं. शिव को अक्सर ‘विनाशक’ कहा जाता है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव भांग का इस्तेमाल गहराई से ध्यान लगाने और अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने में मदद के लिए करते थे. कहानी है कि ‘दूध के सागर मंथन’ के दौरान, जहां ‘अमृत’ गिरा था, वहां भांग (Bhang in Holi) उगी थी. किवदंती है कि शिव ने दुनिया की रक्षा के लिए इस घटना के दौरान जहर पी लिया था. बाद में उनका दर्द कम करने के लिए उन्हें भांग दी गई थी. भांग को होली के दौरान शिव के तपस्वी जीवन से पारिवारिक जीवन में लौटने के जश्न से भी जोड़ा जाता है.
कई सालों से है परंपरा
भारत में 2,000 से ज्यादा सालों से भांग का इस्तेमाल किया जा रहा है. अथर्ववेद में इसे ‘खुशी का जरिया’ और ‘मुक्ति देने वाला’ कहा गया है. ठंडाई के बिना होली अधूरी है. यह दूध से बनी ठंडी ड्रिंक है. इसका मुख्य इंग्रीडिएंट भांग (Bhang in Holi) है, जो मादा कैनाबिस सैटिवा पौधे की नई पत्तियों से बना पेस्ट है. इसमें कैनाबिनॉइड्स की मात्रा ज़्यादा होती है और यह अधिक असरदार भी होता है. ठंडाई शब्द हिंदी शब्द ठंडा से बना है. कहा जाता है कि इस ड्रिंक में दवा वाले गुण होते हैं.
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