CBSE New Notification: 15 फरवरी से CBSE की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं. दसवीं की परीक्षाएं 18 मार्च तक चलेंगी, जबकि 12वीं की परीक्षाएं 4 अप्रैल तक निर्धारित हैं. इन परीक्षाओं के मूल्यांकन में सीबीएसई ने बड़ा बदलाव किया है. खास तौर पर कक्षा 12वीं के लिए कॉपियों की जांच अब पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से होगी.
सीबीएसई मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी है. CBSE ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली शुरू की है, जिससे ज्यादा पारदर्शी तरीके से कॉपियों की चेकिंग सुनिश्चित की जाएगी.
क्या है ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली?
ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप से स्कैन किया जाएगा और उनका मूल्यांकन ऑनलाइन किया जाएगा. सिस्टम स्वचालित रूप से कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग में होने वाली त्रुटियां समाप्त हो जाती हैं. इससे कुल योग में होने वाली त्रुटियां दूर होंगी और मैन्युअल हस्तक्षेप कम होगा. इससे अक्सर बच्चों को जो शिकायत रहती थी, कि कॉपी गलत चेक हुई है, को भी दूर किया जा सकेगा.
CBSE मुख्यालय ने अपने पोस्ट में कहा यह प्रणाली त्वरित मूल्यांकन, विदेशों में स्थित स्कूलों सहित शिक्षकों की व्यापक भागीदारी, कम लॉजिस्टिक्स लागत और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रियाओं को सक्षम बनाती है. परिणाम के बाद अंकों के सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी. इससे जो स्क्रूटनी में समय और संसाधन व्यर्थ होता था, उससे भी बचा जा सकता है. सीबीएसई मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी है.
CBSE introduces #OnScreenMarking (OSM) for #Class12 Board Examinations from 2026.
Answer books will be digitally scanned and evaluated online, eliminating totalling errors and reducing manual intervention. The system enables faster evaluation, wider teacher participation… pic.twitter.com/VMom8Kg29y
— CBSE HQ (@cbseindia29) February 17, 2026
शिक्षकों और स्कूलों की तैयारी
इस प्रणाली में मैन्युअल हस्तक्षेप न्यूनतम होगा. शिक्षक बिना किसी विशेष केंद्र पर गए स्कूल में बैठे-बैठे कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे. सीबीएसई ने स्कूलों को OASIS पोर्टल पर शिक्षकों का डेटा 13 फरवरी तक अपडेट करने के निर्देश दिए हैं. लापरवाही पर रिजल्ट रोकने तक की चेतावनी दी गई है. इससे 16 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित होंगे.