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CBSE 12वीं में 96%, IIT JEE से रिजेक्शन, मिला स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला, अब जीते हैं ऐसी लाइफ

Success Story: कठिन हालात में भी हार न मानने वाले दिल्ली के एक छात्र को IIT-JEE से रोका गया, लेकिन उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: 2026-02-02 10:33:25

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Success Story: हालात चाहे जैसे भी हों, मजबूत इरादे और मेहनत इंसान को दुनिया के किसी भी मुकाम तक पहुंचा सकती है. दिल्ली के बलाइंड छात्र कार्तिक साहनी (Kartik Sawhney) की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. जहां एक ओर भारत में उन्हें लगातार तीन साल तक उनकी विकलांगता के कारण IIT-JEE परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली, वहीं दूसरी ओर उनकी प्रतिभा ने उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी तक पहुंचा दिया.

CBSE में ऐतिहासिक सफलता

कार्तिक साहनी के जीवन का सबसे यादगार दिन 27 मई 2013 रहा. उन्होंने CBSE कक्षा 12वीं की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर इतिहास रच दिया था. वह साइंस स्ट्रीम में यह उपलब्धि पाने वाले देश के पहले दृष्टिबाधित छात्र बने थे. दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम से पढ़ाई करते हुए कार्तिक ने कंप्यूटर साइंस में 99 अंक प्राप्त किए, जो उनका पसंदीदा विषय था. इसके अलावा अंग्रेजी, गणित, फिजिक्स और केमिस्ट्री में उन्होंने 95-95 अंक हासिल किए. कुल मिलाकर उनका स्कोर 500 में से 479 रहा.

चुनौतियों से भरा शैक्षणिक सफर

कार्तिक मानते हैं कि सामान्य छात्रों के साथ पढ़ाई करना और अपनी पसंद की स्ट्रीम चुनना उनके लिए आसान नहीं था. संसाधनों की कमी, सामाजिक सोच और व्यवस्थागत बाधाएं उनके रास्ते में बार-बार आईं. इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय खुद पर भरोसा बनाए रखा. उनका कहना है कि अक्सर लोग सोचते हैं कि विकलांगता इंसान को सीमित कर देती है, लेकिन असली सफलता उन्हें मिलती है जो अपनी क्षमताओं पर विश्वास करते हैं.

IIT-JEE से इनकार, लेकिन उम्मीद बरकरार

लगातार तीन वर्षों तक कार्तिक को IIT-JEE परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई. उन्हें यह कहकर रोका गया कि दृष्टिबाधित छात्रों के लिए इस परीक्षा का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. यह अनुभव उनके लिए निराशाजनक था, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी. उन्होंने भारत के बाहर विश्वविद्यालयों में आवेदन करने का फैसला किया और अपनी मेहनत को एक नई दिशा दी.

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पूरी स्कॉलरशिप

मार्च 2013 में कार्तिक साहनी को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पांच वर्षीय इंजीनियरिंग प्रोग्राम के लिए पूरी स्कॉलरशिप मिली. यह उपलब्धि न सिर्फ उनके लिए, बल्कि देश के हर उस छात्र के लिए गर्व का विषय है, जो सीमाओं से लड़ रहा है. मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले कार्तिक के पिता रविंदर साहनी बिजनेसमैन हैं और मां इंदु साहनी गृहिणी. कार्तिक का सपना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौटकर दृष्टिबाधित लोगों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए काम करें.

अमेरिका में कर रहे हैं ये काम

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले कार्तिक साहनी फिलहाल अभी अमेरिका के वाशिंगटन के बेलव्यू मे रहते हैं. लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वह एक एंटरप्रेन्योर हैं. इसके अलावा वह अभी Samora AI के को-फाउंडर भी हैं.

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