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CBSE OSM: सीबीएसई बोर्ड ने बदली 12वीं की मार्किंग सिस्टम, ऐसे होगी चेक, 10वीं में फिजिकल मोड बरकरार

CBSE ने 2026 से 12वीं की कॉपियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जांचने का फैसला किया है, जबकि 10वीं में फिजिकल मूल्यांकन जारी रहेगा. यह कदम पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम है.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: February 12, 2026 08:24:58 IST

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CBSE Board OSM System: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए घोषणा की है कि वर्ष 2026 से कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) के माध्यम से की जाएगी. वहीं, कक्षा 10वीं की कॉपियों का मूल्यांकन पहले की तरह पारंपरिक फिजिकल मोड में ही जारी रहेगा. बोर्ड का यह कदम पारदर्शिता, दक्षता और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसमें परीक्षकों को स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराई जाती हैं. शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से ही उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं. इससे न केवल कागज की बचत होती है, बल्कि टोटलिंग की त्रुटियों और मैन्युअल हस्तक्षेप की संभावना भी कम हो जाती है.
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के अनुसार यह प्रणाली मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाएगी. डिजिटल माध्यम से अंक दर्ज होने के कारण परिणामों में सटीकता भी बढ़ेगी.

शिक्षकों और स्कूलों को क्या होगा लाभ?

डिजिटल मार्किंग व्यवस्था से शिक्षकों को कॉपियां जांचने के लिए मूल्यांकन केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी. वे अपने-अपने स्कूलों में रहकर ही यह कार्य कर सकेंगे, जिससे नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी. इसके अलावा, बोर्ड का मानना है कि इस कदम से अंकों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी. इससे समय और मानव संसाधन दोनों की बचत होगी. सभी संबद्ध स्कूलों को मूल्यांकन प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलेगा, जिससे देश और विदेश के 26 देशों में स्थित स्कूलों के शिक्षकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी.

स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में कक्षा 12 की परीक्षाएं आयोजित होती हैं, वहां उपयुक्त कंप्यूटर लैब, भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्शन और निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था होनी चाहिए. स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि संबंधित विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों का डेटा बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर समय पर अपडेट किया जाए. बोर्ड ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन न करने को मूल्यांकन प्रक्रिया में बाधा डालने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा और ऐसे स्कूलों के परिणाम रोके भी जा सकते हैं.

46 लाख छात्रों पर पड़ेगा असर

हर वर्ष सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भारत सहित 26 देशों में लगभग 46 लाख छात्रों के लिए आयोजित करता है. ऐसे में यह नई डिजिटल पहल लाखों विद्यार्थियों के परिणामों को अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और समयबद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. कुल मिलाकर, कक्षा 12वीं के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी बदलाव की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है.

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