CBSE PSEB On Screen Marking: भारत में बोर्ड परीक्षाओं की जांच प्रणाली तेजी से डिजिटल हो रही है. CBSE के बाद अब PSEB ने भी मार्च 2026 से ऑन-स्क्रीन मार्किंग अपनाने का फैसला लिया है, जिससे मूल्यांकन तेज और पारदर्शी होगा.
CBSE After PSEB On Screen Marking: भारत में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां पहले कॉपियों की जांच पूरी तरह मैन्युअल तरीके से होती थी, वहीं अब डिजिटल सिस्टम की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं. CBSE द्वारा ऑन-स्क्रीन इवैल्यूएशन (OSM) लागू करने की घोषणा के बाद अब पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (PSEB) ने भी मार्च 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए डिजिटल मार्किंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया है.
पंजाब के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने घोषणा की कि राज्य में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके साथ ही पंजाब उन पहले राज्य बोर्डों में शामिल हो जाएगा जो एंड-टू-एंड डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम अपनाएंगे. नए सिस्टम के तहत शिक्षक अब फिजिकल उत्तर पुस्तिकाओं को संभालने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे. यह सॉफ्टवेयर आधारित प्रक्रिया होगी, जिसमें अंक स्वतः जोड़े जाएंगे, जिससे रिजल्ट अधिक तेज़ और सटीक आने की उम्मीद है.
शिक्षा मंत्री के अनुसार, सितंबर 2025 की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं के दौरान इस डिजिटल सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है. इस दौरान करीब 23,000 उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया. पायलट प्रोजेक्ट में मूल्यांकन की गति और सटीकता दोनों में सुधार देखने को मिला. बोर्ड की योजना है कि 2026 में मैट्रिक परीक्षा के एक विषय में OSM लागू किया जाएगा और फिर आने वाले परीक्षा सत्रों में इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य विषयों में भी विस्तार दिया जाएगा.
नई उत्तर पुस्तिकाओं के हर पेज पर एक यूनिक QR कोड होगा, जिससे सुरक्षित स्कैनिंग और डिजिटल प्रोसेसिंग सुनिश्चित की जाएगी. स्कैनिंग के बाद कॉपियां एक सुरक्षित और केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर अपलोड की जाएंगी. इसके बाद परीक्षक निर्धारित मार्किंग स्कीम के आधार पर ऑनलाइन मूल्यांकन करेंगे. सिस्टम में ऑटोमेटेड टोटलिंग, रियल-टाइम प्रोग्रेस ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की सुविधा भी होगी, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी.
PSEB के चेयरमैन Dr. Amarpal Singh ने इस पहल को “स्टूडेंट-फर्स्ट” दृष्टिकोण का हिस्सा बताया. उनका कहना है कि यह बदलाव न केवल तकनीकी उन्नयन है, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लागू होने से छात्रों को समय पर और अधिक सटीक परिणाम मिलेंगे, जिससे परीक्षा प्रणाली में विश्वास और मजबूती दोनों बढ़ेगी.
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