Who is Gayeshwar Chandra Roy: बांग्लादेश में एक हिंदू उम्मीदवार गायेश्वर चंद्र रॉय ने बंपर वोटों से जीत हासिल कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. जानिए इस खबर में आखिर कौन हैं गायेश्वर राय?
गायेश्वर राय चंद्र
Who is Gayeshwar Chandra Roy: बांग्लादेश के कई हिस्सों में जश्न मनाया गया क्योंकि शुरुआती ट्रेंड्स से यह साफ हो गया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) आम चुनावों में ज़बरदस्त जीत की ओर बढ़ रही है. देश भर से आ रहे नतीजों के साथ, तारिक रहमान की पार्टी ने 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है और अब अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं, जो महीनों की अनिश्चितता के बाद एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है.
BNP का यह मज़बूत प्रदर्शन एक कड़े चुनाव प्रचार के बाद आया है, जिसमें भ्रष्टाचार, बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक सुधार पर ध्यान दिया गया था. पार्टी ने 291 उम्मीदवार खड़े किए और ज़्यादातर सीटों पर जल्दी ही सबसे आगे निकल गई. इसके उलट, जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को तालमेल बिठाने में मुश्किल हुई और कई अहम सीटों पर उसे काफ़ी झटका लगा.
सबसे चर्चित जीतों में से एक ढाका-3 से मिली. यहां BNP उम्मीदवार गायेश्वर चंद्र रॉय ने जमात-ए-इस्लामी के मोहम्मद शाहीनुर इस्लाम को हराया. रॉय को 98,785 वोट मिले, जो इस्लाम के 82,232 वोटों से काफी ज़्यादा थे. लीडर गायेश्वर चंद्र रॉय नई पार्लियामेंट के लिए चुने गए अकेले हिंदू कैंडिडेट बन गए. खुलना-1 में जमात के हिंदू कैंडिडेट कृष्णा नंदी को BNP के आमिर एजाज खान ने हरा दिया, जिससे हाउस में माइनॉरिटी रिप्रेजेंटेशन और कम हो गया. रॉय की जीत ने ढाका जिले की सभी पांच पार्लियामेंट्री सीटों पर BNP की क्लीन स्वीप में भी मदद की.
रॉय की जीत को नंबरों से ज्यादा काफी अहम माना जा रहा है. मुस्लिम-बहुल देश में एक हिंदू नेता होने के नाते, कई लोग उनकी जीत को सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश मान रहे हैं. ऐसे समय में जब हसीना के बाद के राजनीतिक माहौल में तनाव बना हुआ है, समर्थकों का कहना है कि संसद में उनकी मौजूदगी से अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व मज़बूत हो सकता है और स्थिरता चाहने वाले समुदायों को भरोसा मिल सकता है.
गायेश्वर चंद्र रॉय का जन्म 1 नवंबर, 1951 को ढाका के केरानीगंज में गन्नंद्र चंद्र रॉय और सुमोती रॉय के घर हुआ था. एक अनुभवी राजनेता के तौर पर उन्होंने 1990 के दशक में BNP की सरकारों में काम किया. उन्होंने पर्यावरण और वन राज्य मंत्री के साथ-साथ मत्स्य पालन और पशुधन राज्य मंत्री जैसे अहम पद संभाले. रॉय के पार्टी के साथ पर्सनल लेवल पर भी करीबी रिश्ते हैं. उनके बेटे अमिताव रॉय की शादी BNP नेता निताई रॉय चौधरी की बेटी निपुण रॉय चौधरी से हुई है. इतने सालों में रॉय पार्टी के अंदर और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच एक असरदार आवाज बने हुए हैं.
इस साल के चुनावों में करीब 127 मिलियन वोटर्स ने हिस्सा लिया, जिनमें से लगभग आधे 18 से 37 साल के बीच के थे. करीब 4.57 मिलियन वोटर्स पहली बार वोट डाल रहे थे. 299 चुनाव क्षेत्रों में वोटिंग हुई, जिसमें 50 से 59 पॉलिटिकल पार्टियों के 1,755 से 1,981 कैंडिडेट मैदान में थे. अवामी लीग पहले देश पर राज करती थी, उस पर बैन लगा दिया गया था और उसने चुनाव नहीं लड़ा था. इसके साथ ही अंतरिम सरकार के प्रस्तावित 84-पॉइंट नेशनल चार्टर 2025 के लिए जनता का सपोर्ट टेस्ट करने के लिए एक अलग वोटिंग हुई. इसका मकसद गवर्नेंस में सुधार करना है. जैसे ही बांग्लादेश BNP लीडरशिप में एक नए चैप्टर की तैयारी कर रहा है. अब ध्यान इस बात पर है कि आने वाली सरकार आर्थिक चुनौतियों का सामना कैसे करेगी, भरोसा कैसे बहाल करेगी और बदलते पॉलिटिकल माहौल में कैसे आगे बढ़ेगी?
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