CBSE Vs NCERT: भारत में जैसे ही स्कूल शिक्षा की चर्चा शुरू होती है, CBSE और NCERT का नाम अपने-आप सामने आ जाता है. कई लोग इन्हें एक ही संस्था समझ लेते हैं, जबकि हकीकत में दोनों की जिम्मेदारियां और काम अलग-अलग हैं. एक शिक्षा व्यवस्था को संचालित करता है तो दूसरा उसे शैक्षणिक सामग्री और दिशा देता है. इसलिए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि CBSE और NCERT के बीच असली अंतर क्या है और भारतीय शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में दोनों की क्या महत्वपूर्ण भूमिका है.
CBSE क्या है? – परीक्षा और नियम तय करने वाला बोर्ड
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) देश का एक प्रमुख राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड है. यह भारत और विदेशों में हजारों स्कूलों को संबद्धता (Affiliation) देता है.
CBSE की मुख्य जिम्मेदारियां हैं:
कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करना
परीक्षा पैटर्न और मार्किंग स्कीम तय करना
स्कूलों के लिए शैक्षणिक दिशा-निर्देश बनाना
शिक्षा की गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखना
सरल शब्दों में कहें तो CBSE वह संस्था है जो यह तय करती है कि परीक्षा कैसे होगी, मूल्यांकन कैसे होगा और स्कूलों को किन नियमों का पालन करना होगा.
NCERT क्या है? – किताबें और सिलेबस तैयार करने वाली संस्था
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एक स्वायत्त (Autonomous) संगठन है, जो शिक्षा से जुड़ी रिसर्च, सिलेबस और पाठ्यपुस्तकें तैयार करता है.
NCERT का मुख्य काम है:
राष्ट्रीय स्तर पर सिलेबस फ्रेमवर्क बनाना
कक्षा 1 से 12वीं तक की पाठ्यपुस्तकें तैयार करना
शिक्षण पद्धतियों पर शोध करना
शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग सामग्री विकसित करना
CBSE सहित कई राज्य बोर्ड भी NCERT की किताबों को अपनाते हैं. यानी NCERT कंटेंट तैयार करता है, जबकि CBSE उस कंटेंट के आधार पर परीक्षा प्रणाली लागू करता है.
CBSE और NCERT में मुख्य अंतर
| आधार | CBSE | NCERT |
|---|---|---|
| भूमिका | परीक्षा और प्रशासन | सिलेबस व किताबें |
| परीक्षा | बोर्ड एग्जाम आयोजित करता है | परीक्षा नहीं कराता |
| अधिकार | स्कूलों को संबद्धता देता है | नीति निर्माण में सहयोग |
| फोकस | मूल्यांकन और नियम | शिक्षा की गुणवत्ता |
कौन ज्यादा है पावरफुल ?
अगर अधिकार की बात करें तो CBSE ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि यह स्कूलों को मान्यता देता है और बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करता है. लेकिन NCERT की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है. गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकें और वैज्ञानिक तरीके से तैयार सिलेबस ही शिक्षा की मजबूत नींव रखते हैं.
दोनों एक-दूसरे के पूरक
CBSE और NCERT के बीच तुलना करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि दोनों मिलकर भारतीय शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं. CBSE ढांचा तैयार करता है, जबकि NCERT उस ढांचे को ज्ञान और सामग्री से भरता है. इसी तालमेल की वजह से छात्रों को एक समान, संतुलित और प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल पाती है, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है.