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Digital First University: शिक्षा किताबों तक सीमित नहीं, स्क्रीन पर बनेगा भविष्य, अब घर बैठे मिलेगी डिग्री

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 10, 2026 09:26:52 IST

Digital First University: पंजाब सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और भविष्य की ओर देखने वाला कदम उठाया है. शुक्रवार को राज्य कैबिनेट ने पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटीज़ पॉलिसी–2026 को मंज़ूरी दे दी. सरकार का दावा है कि भारत में यह अपनी तरह की पहली पॉलिसी है, जो एंड-टू-एंड डिजिटल डिग्री और डिप्लोमा प्रोग्राम को कानूनी मान्यता देती है.

अब तक देश में विश्वविद्यालय स्थापित करने का मतलब एक फिजिकल कैंपस से था. लेकिन बदलती पढ़ाई की आदतों और डिजिटल सीखने के बढ़ते चलन को देखते हुए, यह पॉलिसी पूरी तरह डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की अनुमति देती है. इसके तहत प्राइवेट संस्थान पंजाब में ऐसी यूनिवर्सिटी खोल सकेंगे, जहां पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन सब कुछ ऑनलाइन होगा.

AI और टेक्नोलॉजी बनेगी पढ़ाई का आधार

नई पॉलिसी में आधुनिक शिक्षा तकनीकों को खास जगह दी गई है. AI-इनेबल्ड लर्निंग पाथवे, AI-प्रॉक्टर्ड एग्ज़ाम सिस्टम और वर्चुअल लैब्स जैसे टूल्स छात्रों को घर बैठे व्यावहारिक और स्किल-आधारित शिक्षा देंगे. यह व्यवस्था खासतौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी, जो नौकरी या पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के कारण नियमित कॉलेज नहीं जा पाते.

क्यों ज़रूरी थी यह पॉलिसी?

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार आज छात्र YouTube, ऑनलाइन कोर्सेज़ और AI ऐप्स से पढ़कर JEE, NEET और UPSC जैसी परीक्षाएं पास कर रहे हैं. लेकिन औपचारिक डिग्री लेने के लिए उन्हें फिजिकल कॉलेज पर निर्भर रहना पड़ता था. नई पॉलिसी इस अंतर को खत्म करती है, जिससे सीख और डिग्री एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी.

ग्लोबल मॉडल से प्रेरणा

पंजाब सरकार का कहना है कि यह पॉलिसी वेस्टर्न गवर्नर्स यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ फीनिक्स और ओपन यूनिवर्सिटी मलेशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय डिजिटल संस्थानों के मॉडल के अनुरूप है. साथ ही, यह UGC और AICTE के मानकों का पूरी तरह पालन करेगी.

यूनिवर्सिटी खोलने के लिए सख्त शर्तें

डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए संस्थानों को कम से कम 2.5 एकड़ ज़मीन और 20 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड दिखाना होगा. इसके अलावा, डिजिटल कंटेंट स्टूडियो, सर्वर रूम, LMS सेंटर और ऑनलाइन परीक्षा कंट्रोल रूम जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी.

कामकाजी छात्रों के लिए नया मौका

यह पॉलिसी खास तौर पर वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए राहत लेकर आई है. अब वे बिना नौकरी छोड़े, बिना शहर बदले और बिना क्लासरूम जाए, AI, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स जैसे आधुनिक स्किल्स के साथ डिग्री हासिल कर सकेंगे.

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Digital First University: शिक्षा किताबों तक सीमित नहीं, स्क्रीन पर बनेगा भविष्य, अब घर बैठे मिलेगी डिग्री

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 10, 2026 09:26:52 IST

Digital First University: पंजाब सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और भविष्य की ओर देखने वाला कदम उठाया है. शुक्रवार को राज्य कैबिनेट ने पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटीज़ पॉलिसी–2026 को मंज़ूरी दे दी. सरकार का दावा है कि भारत में यह अपनी तरह की पहली पॉलिसी है, जो एंड-टू-एंड डिजिटल डिग्री और डिप्लोमा प्रोग्राम को कानूनी मान्यता देती है.

अब तक देश में विश्वविद्यालय स्थापित करने का मतलब एक फिजिकल कैंपस से था. लेकिन बदलती पढ़ाई की आदतों और डिजिटल सीखने के बढ़ते चलन को देखते हुए, यह पॉलिसी पूरी तरह डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की अनुमति देती है. इसके तहत प्राइवेट संस्थान पंजाब में ऐसी यूनिवर्सिटी खोल सकेंगे, जहां पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन सब कुछ ऑनलाइन होगा.

AI और टेक्नोलॉजी बनेगी पढ़ाई का आधार

नई पॉलिसी में आधुनिक शिक्षा तकनीकों को खास जगह दी गई है. AI-इनेबल्ड लर्निंग पाथवे, AI-प्रॉक्टर्ड एग्ज़ाम सिस्टम और वर्चुअल लैब्स जैसे टूल्स छात्रों को घर बैठे व्यावहारिक और स्किल-आधारित शिक्षा देंगे. यह व्यवस्था खासतौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी, जो नौकरी या पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के कारण नियमित कॉलेज नहीं जा पाते.

क्यों ज़रूरी थी यह पॉलिसी?

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार आज छात्र YouTube, ऑनलाइन कोर्सेज़ और AI ऐप्स से पढ़कर JEE, NEET और UPSC जैसी परीक्षाएं पास कर रहे हैं. लेकिन औपचारिक डिग्री लेने के लिए उन्हें फिजिकल कॉलेज पर निर्भर रहना पड़ता था. नई पॉलिसी इस अंतर को खत्म करती है, जिससे सीख और डिग्री एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी.

ग्लोबल मॉडल से प्रेरणा

पंजाब सरकार का कहना है कि यह पॉलिसी वेस्टर्न गवर्नर्स यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ फीनिक्स और ओपन यूनिवर्सिटी मलेशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय डिजिटल संस्थानों के मॉडल के अनुरूप है. साथ ही, यह UGC और AICTE के मानकों का पूरी तरह पालन करेगी.

यूनिवर्सिटी खोलने के लिए सख्त शर्तें

डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए संस्थानों को कम से कम 2.5 एकड़ ज़मीन और 20 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड दिखाना होगा. इसके अलावा, डिजिटल कंटेंट स्टूडियो, सर्वर रूम, LMS सेंटर और ऑनलाइन परीक्षा कंट्रोल रूम जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी.

कामकाजी छात्रों के लिए नया मौका

यह पॉलिसी खास तौर पर वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए राहत लेकर आई है. अब वे बिना नौकरी छोड़े, बिना शहर बदले और बिना क्लासरूम जाए, AI, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स जैसे आधुनिक स्किल्स के साथ डिग्री हासिल कर सकेंगे.

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