IIT NIT IIM Seats: सरकारी पॉलिसी थिंक टैंक नीति आयोग (NITI Aayog) के हालिया वर्किंग पेपर ने भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को लेकर एक अहम सुझाव दिया है. पेपर में कहा गया है कि IIT, IIM, NIT, IISER और अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को हर साल अपनी सीटों में 5 प्रतिशत की वृद्धि करनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारत में पढ़ाई के लिए आकर्षित किया जा सके.
औपचारिक सिफारिश या असली समाधान?
हालांकि, छात्र मोबिलिटी पर काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिफारिश ज़्यादातर औपचारिक प्रकृति की है. उनके अनुसार, विदेशी छात्रों द्वारा भारत को पढ़ाई के गंतव्य के रूप में न चुनने की मुख्य वजह शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कमी है, जिसे केवल सीटें बढ़ाकर दूर नहीं किया जा सकता.
भारत से बाहर पढ़ने का बढ़ता रुझान
‘भारत में उच्च शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण’ शीर्षक वाले इस पेपर के मुताबिक, 2016 से 2022 के बीच छात्रों की आवाजाही में बड़ा असंतुलन देखने को मिला है. ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में विदेश जाकर पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 6.84 लाख थी, जो 2021 में बढ़कर 11.58 लाख हो गई. वहीं, भारत आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या लगभग 2016 में 45,424 और 2022 में 46,878 रही है. यह आंकड़े भारत के लिए एक स्पष्ट चेतावनी माने जा रहे हैं.
रिवर्स ब्रेन ड्रेन और वैश्विक अवसर
पेपर में बताया गया है कि दुनिया भर में रिवर्स ब्रेन ड्रेन का ट्रेंड उभर रहा है. अमेरिका जैसे देशों में फंडिंग में कटौती के चलते विद्वान और वैज्ञानिक नए विकल्प तलाश रहे हैं. फ्रांस ने “Choose France for Science” पहल शुरू की है, जबकि नीदरलैंड ने विदेशी शोधकर्ताओं के लिए विशेष फंड बनाए हैं. नीति आयोग का मानना है कि भारत इन भू-राजनीतिक अवसरों का लाभ उठा सकता है.
2030 तक 1.5 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लक्ष्य
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि भारत को 2030 तक कम से कम 1.5 लाख विदेशी छात्रों के नामांकन का लक्ष्य रखना चाहिए. इसके लिए दक्षिण-पूर्व, मध्य और पश्चिम एशिया, अफ्रीका, यूरोप और ओशिनिया जैसे क्षेत्रों पर फोकस करने की सलाह दी गई है. साथ ही, शीर्ष 100 NIRF संस्थानों के लिए 5% और उच्च क्षमता वाले राज्यों के लिए 10% वार्षिक वृद्धि लक्ष्य तय करने की बात कही गई है.
इंटरनेशनल प्रोग्राम और फेलोशिप की जरूरत
पेपर में यह भी प्रस्ताव है कि भारतीय संस्थान STEM विषयों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के एकेडमिक प्रोग्राम शुरू करें. इसके अलावा, एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप प्रोग्राम लॉन्च कर भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में ब्रांड किया जाए.
मौजूदा नीति और आगे की राह
वर्तमान में, भारतीय HEI को विदेशी छात्रों के लिए 15% अतिरिक्त सीटें देने की अनुमति है, जिसे UGC ने मई 2025 में बढ़ाकर 25% करने की सलाह दी थी. नीति आयोग का मानना है कि सही रणनीति, बेहतर गुणवत्ता और प्रभावी ब्रांडिंग के साथ भारत वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर अपनी स्थिति मज़बूत कर सकता है.