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IIT-JEE में AIR 2, GATE में टॉपर… फिर क्यों चुना संन्यास का रास्ता? जानिए पूरी कहानी

IIT-JEE में AIR 2 हासिल करने वाले एक शख्स ने IIT कानपुर में दाखिला लेकर अपनी प्रतिभा से अलग पहचान बनाई है. उनकी कहानी सफलता के असली मायने समझाती है.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: April 3, 2026 16:14:02 IST

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IIT Story: सफलता का मतलब क्या सिर्फ़ ऊंचे पद, मोटी सैलरी और नाम कमाना हैं या फिर यह उस रास्ते को चुनने में छिपी है, जो दिल को सुकून दे? श्रीश जाधव (Shreesh Jadhav) की ज़िंदगी इसी सवाल का गहरा और प्रेरणादायक जवाब देती है. 1968 में जन्मे जाधव ने शुरुआत से ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया चुके हैं. वर्ष 1985 में उन्होंने Joint Entrance Examination (JEE) में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की, जो देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है.

इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर (IIT Kanpur) में दाखिला लिया और अपनी पढ़ाई में लगातार बेहतरीन परफॉर्म किया. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां इतनी प्रभावशाली थीं कि वे अपने बैच के सबसे होनहार छात्रों में गिने जाने लगे.

जब करियर से ऊपर चुना मकसद

इतनी सफलता के बाद उनके सामने कॉर्पोरेट दुनिया, विदेशों में अवसर और आर्थिक समृद्धि के कई दरवाज़े खुले थे. लेकिन उन्होंने एक अलग रास्ता समाज सेवा का चुना. PhD पूरी करने के बाद जाधव ने अपने ज्ञान और कौशल को उन लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया, जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. उनका मानना था कि असली सफलता वही है, जो दूसरों के जीवन में बदलाव लाए. उनका एक विचार आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि मैंने छोटी चीज़ों को छोड़कर बेहतर चीज़ों को अपनाया… असली त्याग किसने किया?

शिक्षा और सेवा को समर्पित जीवन

जाधव ने रामकृष्ण मिशन के साथ जुड़कर अरुणाचल प्रदेश के नरोत्तम नगर में छात्रों को पढ़ाया. उन्होंने एक रेज़िडेंट शिक्षक और बाद में लेक्चरर के रूप में सेवा दी. वर्ष 1997 से 2006 तक, उन्होंने कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में पढ़ाने और रिसर्च को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. वे रामकृष्ण मिशन विवेकानंद यूनिवर्सिटी में डीन ऑफ़ रिसर्च और विभागीय समन्वयक भी रहे.

रिसर्च और अकादमिक योगदान

उनकी रुचि कम्प्यूटेशनल ज्योमेट्री, ग्राफ एल्गोरिदम और डिस्क्रीट मैथेमेटिक्स जैसे जटिल विषयों में थी. उनका शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और कॉन्फ़्रेंस में प्रकाशित हुआ. उन्होंने 1989 में GATE परीक्षा में 99.92 परसेंटाइल हासिल कर अपनी प्रतिभा को और साबित किया.

सम्मान और विरासत

समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2009 में IIT कानपुर द्वारा ‘डिस्टिंग्विश्ड एलुमनाई अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. श्रीश जाधव की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता सिर्फ़ पाने में नहीं, बल्कि सही चुनाव करने में है. उन्होंने दिखाया कि जब जीवन में उद्देश्य स्पष्ट हो, तो रास्ता अलग होने के बावजूद भी वह सबसे सही साबित हो सकता है.

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Last Updated: April 3, 2026 16:14:02 IST

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IIT Story: सफलता का मतलब क्या सिर्फ़ ऊंचे पद, मोटी सैलरी और नाम कमाना हैं या फिर यह उस रास्ते को चुनने में छिपी है, जो दिल को सुकून दे? श्रीश जाधव (Shreesh Jadhav) की ज़िंदगी इसी सवाल का गहरा और प्रेरणादायक जवाब देती है. 1968 में जन्मे जाधव ने शुरुआत से ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया चुके हैं. वर्ष 1985 में उन्होंने Joint Entrance Examination (JEE) में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की, जो देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है.

इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर (IIT Kanpur) में दाखिला लिया और अपनी पढ़ाई में लगातार बेहतरीन परफॉर्म किया. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां इतनी प्रभावशाली थीं कि वे अपने बैच के सबसे होनहार छात्रों में गिने जाने लगे.

जब करियर से ऊपर चुना मकसद

इतनी सफलता के बाद उनके सामने कॉर्पोरेट दुनिया, विदेशों में अवसर और आर्थिक समृद्धि के कई दरवाज़े खुले थे. लेकिन उन्होंने एक अलग रास्ता समाज सेवा का चुना. PhD पूरी करने के बाद जाधव ने अपने ज्ञान और कौशल को उन लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया, जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. उनका मानना था कि असली सफलता वही है, जो दूसरों के जीवन में बदलाव लाए. उनका एक विचार आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि मैंने छोटी चीज़ों को छोड़कर बेहतर चीज़ों को अपनाया… असली त्याग किसने किया?

शिक्षा और सेवा को समर्पित जीवन

जाधव ने रामकृष्ण मिशन के साथ जुड़कर अरुणाचल प्रदेश के नरोत्तम नगर में छात्रों को पढ़ाया. उन्होंने एक रेज़िडेंट शिक्षक और बाद में लेक्चरर के रूप में सेवा दी. वर्ष 1997 से 2006 तक, उन्होंने कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में पढ़ाने और रिसर्च को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. वे रामकृष्ण मिशन विवेकानंद यूनिवर्सिटी में डीन ऑफ़ रिसर्च और विभागीय समन्वयक भी रहे.

रिसर्च और अकादमिक योगदान

उनकी रुचि कम्प्यूटेशनल ज्योमेट्री, ग्राफ एल्गोरिदम और डिस्क्रीट मैथेमेटिक्स जैसे जटिल विषयों में थी. उनका शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और कॉन्फ़्रेंस में प्रकाशित हुआ. उन्होंने 1989 में GATE परीक्षा में 99.92 परसेंटाइल हासिल कर अपनी प्रतिभा को और साबित किया.

सम्मान और विरासत

समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2009 में IIT कानपुर द्वारा ‘डिस्टिंग्विश्ड एलुमनाई अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. श्रीश जाधव की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता सिर्फ़ पाने में नहीं, बल्कि सही चुनाव करने में है. उन्होंने दिखाया कि जब जीवन में उद्देश्य स्पष्ट हो, तो रास्ता अलग होने के बावजूद भी वह सबसे सही साबित हो सकता है.

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