IIT Course: हर साल लाखों छात्र IIT में दाखिले का सपना देखते हैं, लेकिन सीमित सीटों और हाई कटऑफ के कारण यह सफर आसान नहीं होता. ऐसे में कई छात्रों के मन में सवाल आता है कि IIT में सबसे कम कटऑफ किस इंजीनियरिंग ब्रांच की होती है? क्या वहां एडमिशन के लिए अलग मानदंड होते हैं और इस ब्रांच का भविष्य कैसा है? आइए इस पर एक नजर डालते हैं.
IIT में सबसे कम कटऑफ वाली ब्रांच कौन-सी होती है?
आमतौर पर देखा गया है कि मेटलर्जिकल एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग, माइनिंग इंजीनियरिंग, ओशन इंजीनियरिंग और कुछ IITs में बायोटेक्नोलॉजी जैसी ब्रांचों का कटऑफ तुलनात्मक रूप से कम रहता है. इसका मतलब यह नहीं कि ये ब्रांच कमजोर हैं, बल्कि इनकी लोकप्रियता कंप्यूटर साइंस या इलेक्ट्रिकल जैसी ब्रांचों से कम होती है, जिस वजह से कटऑफ नीचे चला जाता है.
क्या एडमिशन के लिए अलग होता है क्राइटेरिया?
एडमिशन प्रक्रिया सभी ब्रांचों के लिए एक जैसी होती है. छात्र को पहले JEE Advanced क्वालिफाई करना जरूरी होता है. इसके बाद JoSAA काउंसलिंग के जरिए रैंक, कैटेगरी और सीट उपलब्धता के आधार पर ब्रांच अलॉट की जाती है. कम कटऑफ वाली ब्रांचों में भी वही छात्र एडमिशन पाते हैं जिन्होंने JEE Advanced क्लियर किया हो.
इन ब्रांचों में एडमिशन पाने के लिए क्या करें?
JEE Main और JEE Advanced की तैयारी पूरी रणनीति के साथ करें. काउंसलिंग के दौरान ब्रांच प्रेफरेंस सोच-समझकर भरें. अगर IIT टैग प्राथमिकता है, तो फ्लेक्सिबल माइंडसेट रखें. ब्रांच के सिलेबस और भविष्य के विकल्प पहले समझ लें. कई छात्र कम कटऑफ वाली ब्रांच चुनकर बाद में ब्रांच चेंज या इंटरडिसिप्लिनरी स्किल्स के जरिए अपना रास्ता बनाते हैं.
क्या है इन ब्रांचों का भविष्य और स्कोप?
इन ब्रांचों का स्कोप अक्सर अंडररेटेड होता है.
मेटलर्जिकल और मटेरियल्स इंजीनियरिंग: सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अवसर
माइनिंग इंजीनियरिंग: सरकारी PSU, प्राइवेट माइनिंग कंपनियां और रिसर्च
ओशन इंजीनियरिंग: ऑफशोर स्ट्रक्चर, शिपिंग और रिन्यूएबल एनर्जी
इसके अलावा, IIT से पढ़ाई करने वाले छात्र MBA, UPSC, स्टार्टअप्स, डेटा साइंस और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में भी आसानी से शिफ्ट कर पाते हैं.
IIT टैग बनाम ब्रांच: सही संतुलन जरूरी
सिर्फ कम कटऑफ देखकर ब्रांच चुनना सही नहीं है. जरूरी है कि आपकी रुचि, स्किल्स और भविष्य की प्लानिंग उस ब्रांच से मेल खाए. IIT का माहौल, एक्सपोजर और नेटवर्किंग आपको कई दरवाजे खोलने में मदद करता है फिर चाहे ब्रांच कोई भी हो.
कम कटऑफ वाली इंजीनियरिंग ब्रांच को कमजोर समझना एक मिथक है. सही मेहनत, स्किल डेवलपमेंट और सही दिशा में प्रयास आपको किसी भी ब्रांच से सफल करियर दिला सकते हैं. IIT में एडमिशन सिर्फ शुरुआत है असली उड़ान वहां से शुरू होती है.