JEE Main 2026 Exam: जेईई मेंस 2026 के जनवरी सेशन में अब सिर्फ़ दो दिन बचे हैं. इस समय देशभर में कोचिंग सेंटर्स की हलचल कम हो चुकी है, हॉस्टल के कमरे रिवीजन ज़ोन में बदल गए हैं और घरों में एक ही सवाल बार-बार पूछा जा रहा है कि “कैसा लग रहा है?” यह वो दौर है जब तैयारी सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दिमाग़ और दिल दोनों की परीक्षा होती है.
नए टॉपिक नहीं, स्मार्ट रिवीजन का समय
IIT (BHU) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग छात्र शिवम कुमार साह के अनुसार जेईई मेंस से पहले के दिन नए चैप्टर शुरू करने के नहीं होते. वह आगे बताते हैं कि यह परीक्षा गहरे कॉन्सेप्ट से ज़्यादा स्पीड और याददाश्त की मांग करती है. आख़िरी दिनों में उन्होंने सिर्फ़ फ़ॉर्मूले, फैक्ट्स और बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर ध्यान दिया. फिजिक्स और मैथ्स की प्रैक्टिस भी सिर्फ़ JEE Main लेवल तक सीमित रखी, ताकि एक्यूरेसी बनी रहे.
पेपर डे स्ट्रेटेजी: शांति सबसे बड़ी ताक़त
अधिकांश टॉपर्स एक बात पर सहमत हैं कि परीक्षा के दिन शांत रहना सबसे ज़रूरी है. शिवम और कई अन्य छात्रों ने केमिस्ट्री से शुरुआत की, फिर फिजिक्स और अंत में मैथ्स. वजह साफ़ थी कि कम कैलकुलेशन से आत्मविश्वास बनता है. उन्होंने सिर्फ़ उन्हीं सवालों को अटेम्प्ट किया जिनमें पूरा भरोसा था और बेवजह के रिस्क से बचते रहे.
मॉक टेस्ट: कम लेकिन सोच-समझकर
NIT त्रिची और IIT कानपुर के छात्रों का मानना है कि आख़िरी तीन दिनों में लगातार मॉक टेस्ट देना अक्सर उल्टा असर डालता है. एक छात्र बताते हैं कि वह टेस्ट देना कम कर दिया और अपनी पुरानी गलतियों का एनालिसिस किया. कट-ऑफ, रैंक और पर्सेंटाइल की चर्चाओं से दूरी बनाना भी मेंटल पीस के लिए ज़रूरी माना गया.
एक्सीक्यूशन, एक्सपेरिमेंट नहीं
IIT बॉम्बे के छात्र स्पर्श सोमानी ने आख़िरी दिनों में मॉक टेस्ट और डिटेल एनालिसिस को संतुलित तरीके से अपनाया. उन्होंने अपनी गलतियों के लिए अलग नोटबुक बनाई और हर टेस्ट से पहले उसे रिवाइज किया.
एग्जाम के दिन उन्होंने कुछ नया ट्राई नहीं किया, बस वही किया, जिसकी दो साल तक प्रैक्टिस की थी.
क्या न करें: IIT–NIT स्टूडेंट्स की साफ़ सलाह
आख़िरी हफ्ते में नए या “छोटे” लगने वाले टॉपिक शुरू न करें. पूरी रात जागकर पढ़ने से बचें. दोस्तों से तुलना और नेगेटिव बातचीत से दूरी रखें. जंक फूड और नींद की कमी को हल्के में न लें. बहुत कठिन या अनजान मॉक पेपर न उठाएं. जैसा कि एक IIT दिल्ली के छात्र ने बताया कि एग्जाम से पहले बीमार पड़ना बहुत आम है, इसलिए सेहत ही असली तैयारी है.
इन दो दिनों में जीत किताबों से नहीं, बल्कि संतुलन, भरोसे और शांति से तय होती है.