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JEE Success Story: जेईई में रैंक 26, सेल्फ-स्टडी से ऐसे सपनों को किया सच, अब यहां से कर रहे हैं B.Tech

JEE Main IIT Success Story: राजस्थान के एक लड़के ने मेहनत और त्याग का उदाहरण पेश किया है. उन्होंने JEE Advanced की परीक्षा में AIR 26 हासिल की हैं.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 13, 2026 10:06:34 IST

JEE Success Story: कहा जाता है कि सफलता त्याग मांगती है. इस कथन को राजस्थान के झुंझुनू जिले के मयंक सोनी (Mayank Soni) ने अपने परिणामों से सच कर दिखाया है. JEE एडवांस्ड 2023 में ऑल इंडिया रैंक 26 (OBC कैटेगरी रैंक 2) हासिल कर मयंक न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे सीकर क्षेत्र के लिए गर्व का कारण बन गए हैं. वे इस साल JEE एडवांस्ड में सीकर के टॉप रैंक होल्डर भी रहे. फिलहाल अभी वह आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई कर रहे हैं.

साधारण परिवार, असाधारण सपना

मयंक एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. उनके पिता सरकारी कर्मचारी और माता गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं होने दिया. मयंक अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हैं, जिन्होंने हर मुश्किल दौर में उनका हौसला बनाए रखा.

टॉप 30 में जगह बनाना सपने से कम नहीं

रिजल्ट के दिन को याद करते हुए मयंक कहते हैं कि यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. उन्हें टॉप 100 रैंक की उम्मीद थी, लेकिन टॉप 30 में जगह बनाना उनके लिए भी हैरान करने वाला था. रिजल्ट आते ही शिक्षकों के फोन और बधाइयों ने इस खुशी को और खास बना दिया. उनके माता-पिता की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी.

अनुशासन और निरंतर मेहनत का मंत्र

स्वभाव से शांत और संकोची मयंक मेहनत और स्मार्ट स्टडी में विश्वास रखते हैं. उन्होंने 10वीं से ही पढ़ाई शुरू की और तीन साल तक वहीं तैयारी की. 10वीं में 94% और 12वीं में 96% अंक लाने वाले मयंक का स्टडी प्लान बेहद सरल लेकिन सख्त था. क्लास के अलावा रोज़ 7–8 घंटे की सेल्फ-स्टडी, नियमित रिवीजन, होमवर्क और पुराने चैप्टर्स के सवाल यही उनकी तैयारी की रीढ़ रहे.

शिक्षकों की अहम भूमिका

मयंक मानते हैं कि शिक्षकों के सहयोग के बिना यह रैंक संभव नहीं थी. क्लास में ही डाउट क्लियर होना, मजबूत नोट्स और प्रभावी टेस्ट सीरीज़ ने उनकी कमजोरियों को पहचानने में मदद की. काउंसलिंग सेशन ने उन्हें कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा.

सपनों के लिए किया बड़ा त्याग

मयंक ने अपनी JEE तैयारी के दौरान कई व्यक्तिगत इच्छाओं को पीछे छोड़ दिया. यहां तक कि ओलंपियाड टॉपर्स के लिए प्रस्तावित सिंगापुर ट्रिप भी उन्होंने सिर्फ़ पढ़ाई के लिए छोड़ दी. यह त्याग आज उनकी सफलता की सबसे बड़ी पहचान बन गया है.

यहां से कर रहे हैं पढ़ाई

जेईई एडवांस्ड 2023 में 26वीं रैंक लाने वाले मयंक अभी फिलहाल IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं. उनका मानना है कि IIT का एक्सपोज़र उन्हें अपने भविष्य की सही दिशा चुनने में मदद करेगा. उनकी कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो IIT-JEE का सपना देखते हैं. उनकी सफलता यह सिखाती है कि अनुशासन, निरंतर मेहनत और त्याग के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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JEE Success Story: जेईई में रैंक 26, सेल्फ-स्टडी से ऐसे सपनों को किया सच, अब यहां से कर रहे हैं B.Tech

JEE Main IIT Success Story: राजस्थान के एक लड़के ने मेहनत और त्याग का उदाहरण पेश किया है. उन्होंने JEE Advanced की परीक्षा में AIR 26 हासिल की हैं.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 13, 2026 10:06:34 IST

JEE Success Story: कहा जाता है कि सफलता त्याग मांगती है. इस कथन को राजस्थान के झुंझुनू जिले के मयंक सोनी (Mayank Soni) ने अपने परिणामों से सच कर दिखाया है. JEE एडवांस्ड 2023 में ऑल इंडिया रैंक 26 (OBC कैटेगरी रैंक 2) हासिल कर मयंक न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे सीकर क्षेत्र के लिए गर्व का कारण बन गए हैं. वे इस साल JEE एडवांस्ड में सीकर के टॉप रैंक होल्डर भी रहे. फिलहाल अभी वह आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई कर रहे हैं.

साधारण परिवार, असाधारण सपना

मयंक एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. उनके पिता सरकारी कर्मचारी और माता गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं होने दिया. मयंक अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हैं, जिन्होंने हर मुश्किल दौर में उनका हौसला बनाए रखा.

टॉप 30 में जगह बनाना सपने से कम नहीं

रिजल्ट के दिन को याद करते हुए मयंक कहते हैं कि यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. उन्हें टॉप 100 रैंक की उम्मीद थी, लेकिन टॉप 30 में जगह बनाना उनके लिए भी हैरान करने वाला था. रिजल्ट आते ही शिक्षकों के फोन और बधाइयों ने इस खुशी को और खास बना दिया. उनके माता-पिता की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी.

अनुशासन और निरंतर मेहनत का मंत्र

स्वभाव से शांत और संकोची मयंक मेहनत और स्मार्ट स्टडी में विश्वास रखते हैं. उन्होंने 10वीं से ही पढ़ाई शुरू की और तीन साल तक वहीं तैयारी की. 10वीं में 94% और 12वीं में 96% अंक लाने वाले मयंक का स्टडी प्लान बेहद सरल लेकिन सख्त था. क्लास के अलावा रोज़ 7–8 घंटे की सेल्फ-स्टडी, नियमित रिवीजन, होमवर्क और पुराने चैप्टर्स के सवाल यही उनकी तैयारी की रीढ़ रहे.

शिक्षकों की अहम भूमिका

मयंक मानते हैं कि शिक्षकों के सहयोग के बिना यह रैंक संभव नहीं थी. क्लास में ही डाउट क्लियर होना, मजबूत नोट्स और प्रभावी टेस्ट सीरीज़ ने उनकी कमजोरियों को पहचानने में मदद की. काउंसलिंग सेशन ने उन्हें कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा.

सपनों के लिए किया बड़ा त्याग

मयंक ने अपनी JEE तैयारी के दौरान कई व्यक्तिगत इच्छाओं को पीछे छोड़ दिया. यहां तक कि ओलंपियाड टॉपर्स के लिए प्रस्तावित सिंगापुर ट्रिप भी उन्होंने सिर्फ़ पढ़ाई के लिए छोड़ दी. यह त्याग आज उनकी सफलता की सबसे बड़ी पहचान बन गया है.

यहां से कर रहे हैं पढ़ाई

जेईई एडवांस्ड 2023 में 26वीं रैंक लाने वाले मयंक अभी फिलहाल IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं. उनका मानना है कि IIT का एक्सपोज़र उन्हें अपने भविष्य की सही दिशा चुनने में मदद करेगा. उनकी कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो IIT-JEE का सपना देखते हैं. उनकी सफलता यह सिखाती है कि अनुशासन, निरंतर मेहनत और त्याग के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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