JEE Main Result 2026 Date: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के जरिए जेईई मेंस 2026 से जुड़ी अहम जानकारी आधिकारिक इन्फॉर्मेशन ब्रोशर में साझा की गई थी. लाखों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी अपडेट यह है कि JEE Main 2026 रिजल्ट की तारीखें अब तय हो चुकी हैं. सेशन 1 और सेशन 2 दोनों प्रयासों के लिए रिजल्ट अलग-अलग जारी किए जाएंगे. इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि रिजल्ट जल्द ही जारी किया जा सकता है.
JEE Main 2026 रिजल्ट कब आएगा?
NTA के अनुसार JEE Main 2026 सेशन 1 का रिजल्ट 12 फरवरी 2026 और JEE Main 2026 सेशन 2 का रिजल्ट 20 अप्रैल 2026 को जारी किया जा सकता है. रिजल्ट चेक करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड से लॉग-इन करना होगा.
सेशन 1 रिजल्ट में क्या मिलेगा?
सेशन 1 के रिजल्ट में उम्मीदवारों को केवल NTA स्कोर / पर्सेंटाइल बताया जाएगा। इस चरण में ऑल इंडिया रैंक (AIR) जारी नहीं की जाती. उम्मीदवार अपनी फाइनल रैंक सेशन 2 के रिजल्ट के साथ ही देख सकेंगे, क्योंकि NTA दोनों प्रयासों में से बेस्ट स्कोर को फाइनल मानता है.
आंसर-की से पहले ही करें स्कोर का अनुमान
रिजल्ट से पहले NTA प्रोविजनल और फाइनल आंसर-की जारी करेगा. प्रोविजनल आंसर-की 1–2 फरवरी 2026 (संभावित) को जारी की जा सकती है. इसके बाद उम्मीदवारों को आंसर-की पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा. आपत्तियों की समीक्षा के बाद फाइनल आंसर-की फरवरी के पहले हफ्ते में जारी होने की उम्मीद है. आंसर-की की मदद से छात्र अपने संभावित स्कोर का अंदाज़ा पहले ही लगा सकते हैं.
JEE Main 2025 बनाम 2026: टाइमलाइन में क्या बदला?
JEE Main 2026 की परीक्षा 21 से 29 जनवरी 2026 के बीच आयोजित की जाएगी, जबकि सेशन 2 की परीक्षा 2 से 9 अप्रैल 2026 तक होगी. पिछले साल की तुलना में इस बार रिजल्ट और आंसर-की की प्रक्रिया लगभग उसी पैटर्न पर रखी गई है, जिससे छात्रों को तैयारी और योजना बनाने में आसानी होगी.
सेशन 2 रजिस्ट्रेशन और बेस्ट-ऑफ-टू नीति
सेशन 1 के रिजल्ट से पहले ही NTA JEE Main 2026 सेशन 2 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू करेगा. छात्र चाहें तो अपने पहले प्रयास के स्कोर के आधार पर अप्रैल सेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. फाइनल रैंक तय करते समय NTA दोनों प्रयासों में से बेहतर पर्सेंटाइल को मान्यता देता है.
पर्सेंटाइल सिस्टम क्यों है अहम?
JEE Main का रिजल्ट पर्सेंटाइल स्कोर के रूप में जारी किया जाता है, जिससे अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा की कठिनाई का असर खत्म हो जाता है. इसमें उम्मीदवार का प्रदर्शन केवल उसी शिफ्ट के छात्रों से तुलना करके आंका जाता है.