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JEE Success Story: माता-पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बेटी ने बनाई अपनी राह, जेईई में 99.60 परसेंटाइल से चौंकाया

JEE Main Success Story: पहली ही कोशिश में JEE Main 2026 में 99.60 परसेंटाइल हासिल करके कर्नाटक की एक लड़की ने सबको चौंका दिया. उन्होंने रैंक की चिंता छोड़ बस नीचे दिए गए इस रूटीन को फॉलो किया.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: February 20, 2026 15:15:10 IST

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JEE IIT Success Story: सफलता अक्सर शोर से नहीं, सुकून से जन्म लेती है और 17 साल की स्वाति सुब्रमण्य (Swathi Subramanya) ने यह सच कर दिखाया. पहली ही कोशिश में JEE Main 2026 सेशन 1 में 99.60 परसेंटाइल हासिल करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. जहां अधिकतर छात्र रैंक और कटऑफ की चिंता में उलझे रहते हैं, वहीं स्वाति ने खुद को उस दबाव से दूर रखा. उन्होंने बस अपनी तैयारी, अपनी गलतियों और रोज़ के छोटे-छोटे सुधारों पर ध्यान दिया.

उनका मानना रहा कि जो अपने हाथ में है, वही सबसे बड़ी ताकत है. सही माहौल, लगातार मेहनत और परिणाम की चिंता छोड़कर आगे बढ़ने की उनकी सोच ने ही इस शानदार उपलब्धि की नींव रखी.

नतीजों से ज्यादा तैयारी पर फोकस

स्वाति कहती हैं कि उन्होंने कभी भी रिजल्ट के बारे में जरूरत से ज्यादा नहीं सोचा. उनका मानना है कि जब हम अपने काम पर ध्यान देते हैं, तो परिणाम खुद-ब-खुद बेहतर आते हैं. उन्होंने आगे कहा कि वह बस इस पर फोकस किया कि वह रोज क्या बेहतर कर सकती हैं. उनके माता-पिता दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी स्वाति पर इंजीनियरिंग चुनने का दबाव नहीं डाला. स्वाति के अनुसार, इंजीनियरिंग के प्रति उनका झुकाव स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ. परिवार का सपोर्टिव माहौल उनकी सफलता की बड़ी वजह रहा.

केमिस्ट्री बनी चुनौती, मॉक टेस्ट बने हथियार

कर्नाटक की रहने वाली स्वाति के लिए केमिस्ट्री सबसे कठिन विषय रहा. फिजिक्स और मैथ्स की तुलना में इसमें उन्हें ज्यादा मेहनत करनी पड़ी. उन्होंने नियमित रिवीजन, मॉक टेस्ट और टीचर्स की गाइडेंस से अपनी कमजोरी को ताकत में बदलने की कोशिश की. केमिस्ट्री में याद करने वाले हिस्से ज्यादा होने के कारण उन्होंने चैप्टर्स को कई बार दोहराया और कॉन्सेप्ट्स को स्पष्ट करने के लिए NCERT किताबों पर भरोसा किया.

12 घंटे नहीं, बैलेंस्ड रूटीन बना सफलता का मंत्र

जहां कई छात्र रोज 12-14 घंटे पढ़ाई करते हैं, स्वाति ने संतुलित दिनचर्या अपनाई. उनकी पढ़ाई का बड़ा हिस्सा स्कूल में ही पूरा हो जाता था, और घर पर वे करीब तीन घंटे अतिरिक्त तैयारी करती थीं. उन्होंने क्लास 10 से ही सोशल मीडिया से दूरी बना ली, ताकि ध्यान भंग न हो. उनका मानना है कि फोकस और मानसिक शांति सफलता के लिए बेहद जरूरी है.

कंसिस्टेंसी ही है असली कुंजी

स्वाति का मानना है कि सफलता का राज इंटेंसिटी नहीं, बल्कि निरंतरता है. वह JEE Advanced की तैयारी में भी यही रणनीति अपनाएंगी, जिसमें छोटी गलतियों को सुधारना और खासकर केमिस्ट्री में पकड़ मजबूत करना शामिल होगा. उनके लिए टीचर्स का मार्गदर्शन सबसे अहम है और वे पूरी तरह अपने शिक्षकों की सलाह पर भरोसा करती हैं.

आगे का सपना: IIT बॉम्बे और विदेश में पढ़ाई

भविष्य की बात करें तो स्वाति की पहली पसंद Indian Institute of Technology Bombay में कंप्यूटर साइंस हो सकती है. हालांकि, वह अन्य इंजीनियरिंग स्ट्रीम्स के लिए भी खुला दृष्टिकोण रखती हैं. विदेश में पढ़ाई भी उनके विकल्पों में खासकर RMIT University, ऑस्ट्रेलिया शामिल है.

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