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JEE Success Story: जेईई में 360 में से 192 अंक, ऐसी थी स्टडी टेक्निक, IIT का सपना हुआ पूरा

JEE Success Story: वाराणसी की अनन्या त्रिपाठी (Ananya Tripathi) ने परंपरागत राह छोड़ टेक्नोलॉजी को चुना. मजबूत इरादों और मेहनत के दम पर उन्होंने IIT दिल्ली में कंप्यूटर साइंस में दाख़िला हासिल किया.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 24, 2026 08:30:33 IST

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JEE Success Story: उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक शहर वाराणसी से ताल्लुक रखने वाली अनन्या त्रिपाठी (Ananya Tripathi) ने यह साबित कर दिया कि बड़े सपने जगह नहीं, जज़्बे देखते हैं. अपने शहर की शैक्षणिक पहचान और परंपरागत करियर विकल्पों से अलग हटकर अनन्या ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया और IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में दाख़िला लेने में कामयाब रही हैं.

टेक्नोलॉजी से लगाव और पारिवारिक प्रेरणा

अनन्या को शुरू से ही तकनीक और लॉजिकल सोच ने आकर्षित किया. कठिन समस्याओं को सुलझाना और नए समाधान ढूंढना उन्हें चुनौती के बजाय रोमांच लगता था. उनके बड़े भाई की JEE में सफलता ने उनके सपने को दिशा दी. उसी प्रेरणा के साथ उन्होंने इंजीनियरिंग को करियर के रूप में चुना और पूरे मन से तैयारी में जुट गईं. JEE मेन में अनन्या ने 99.49 परसेंटाइल हासिल किया, जबकि JEE एडवांस्ड में 360 में से 192 अंक के साथ उनकी CRL रैंक 1518 रही. GEN-EWS कैटेगरी में उन्होंने 133वीं रैंक प्राप्त की.

कॉन्सेप्ट की समझ और टाइम मैनेजमेंट रहा मंत्र

उत्तर प्रदेश की एकमात्र लड़की रैंकर रहीं अनन्या के मुताबिक, मैथमेटिक्स उनका सबसे मजबूत विषय था. वह मानती हैं कि JEE जैसी परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा आधार कॉन्सेप्ट की स्पष्ट समझ और सही टाइम मैनेजमेंट है. घंटों पढ़ाई करने के बजाय उन्होंने स्मार्ट स्टडी पर भरोसा किया, जहां क्लैरिटी, निरंतरता और सही अभ्यास को प्राथमिकता दी.

केमिस्ट्री के लिए उन्होंने NCERT को आधार बनाया और नियमित रूप से ऑब्जेक्टिव प्रश्नों का प्रैक्टिस किया. मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों को समझना और कमजोर क्षेत्रों पर काम करना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा था.

पढ़ाई की रणनीति: हफ़्ते में डिसिप्लिन, वीकेंड पर टेस्ट

अनन्या रोज़ाना करीब 9–10 घंटे पढ़ाई करती थीं. हफ़्ते के दिनों में नोट्स और असाइनमेंट पर फोकस रहता, जबकि वीकेंड मॉक टेस्ट और कठिन टॉपिक्स के लिए तय थे. सोशल मीडिया से उन्होंने सीमित दूरी बनाए रखी और उसे केवल मानसिक ब्रेक के लिए इस्तेमाल किया.

परीक्षा को लेकर सोच और सफलता का संदेश

परीक्षा के दौरान अनन्या आसान सवाल पहले हल करतीं और कठिन प्रश्नों पर बाद में लौटतीं. आख़िरी हफ्तों में उन्होंने केवल रिविज़न और फॉर्मूलों पर ध्यान दिया. उनका मानना है कि लगातार मेहनत, शांत दिमाग और ईमानदार तैयारी किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी है.

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