JEE Success Story: स्मार्ट वर्क और लगातार मेहनत किसी भी युवा के सपनों को हकीकत में बदल सकती हैं. ऐसी ही कहानी कोलकाता के 18 साल के राहुल कोनार (Rahul Konar) की है, जिन्होंने जेईई मेंस 2026 सेशन 1 की परीक्षा में 99.93 परसेंटाइल स्कोर कर सबको चौंका दिया. खास बात यह है कि राहुल सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहते हैं और उनका कोई पर्सनल फ़ोन नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि JEE Advanced क्रैक करने और IIT में एडमिशन मिलने के बाद फ़ोन खरीदूंगा. उनकी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट हैं कि अभी पढ़ाई ही उनके जीवन का केंद्र है.
राहुल की इस सोच ने उन्हें आम टीनएजर्स से अलग बनाया है. सोशल मीडिया और अन्य मनोरंजन की गतिविधियों से दूर रहते हुए भी उन्होंने अपनी शिक्षा और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है. उन्होंने कहा कि ज़िंदगी में उन चीज़ों के लिए काफी समय है. अभी के लिए पढ़ाई सबसे पहले आनी चाहिए.
सफलता की राह: परिवार और आत्मविश्वास
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा JEE Main Session 1 के रिज़ल्ट में राहुल टॉपर्स में शामिल हैं. ICSE Class 10 में 98 प्रतिशत हासिल करने वाले राहुल ने अपने पहले अटेम्प्ट में ही JEE में शानदार प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि एग्ज़ाम को लेकर थोड़ा डर था, लेकिन माता-पिता ने भरोसा दिलाया कि यह अकेला एग्ज़ाम नहीं है. उन्होंने अपनी तैयारी पर भरोसा किया. उनके पिता एक रिटायर्ड इंजीनियर हैं और मां हाउसवाइफ़ हैं.
पढ़ाई और तैयारी का संतुलन
राहुल ने स्कूल और कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी का संतुलन बनाने के लिए एक निश्चित टाइमटेबल बनाया. उन्होंने कहा कि स्कूल के काम के लिए तय समय निकाला और बाकी समय JEE की तैयारी में लगाया. कई स्टूडेंट्स के उलट राहुल दिन में 12–14 घंटे पढ़ाई नहीं करते थे. उनका फोकस एफिशिएंसी और क्वालिटी पर था. उन्होंने बताया कि यह पक्का किया कि जितना समय पढ़ाई में लगा रहा हूं, वह असरदार हो और उसमें कोई समय बर्बाद न हो.
अगला लक्ष्य: JEE Advanced और IIT
राहुल का मुख्य लक्ष्य IIT Bombay में कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में एडमिशन पाना है. उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ाई के ऑप्शन भी देख रहे हैं. उनकी तैयारी रणनीति में कॉन्सेप्ट्स को रिवाइज करना, प्रैक्टिस करना और एप्लीकेशन पर फोकस करना शामिल है. उनके सफलता के मंत्र दो शब्दों लगातार मेहनत और स्मार्ट वर्क में है.
रिविजन की खास तकनीक
राहुल किताबों को पन्ने-दर-पन्ने पढ़ने की बजाय छोटे सब-टॉपिक्स के सवाल हल करते थे. इससे उनकी समझ और एप्लीकेशन स्किल दोनों मजबूत हुई.