Maharashtra HSC Board Exam 2026 Mass Copy Case: महाराष्ट्र में चल रही हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (HSC) परीक्षाओं के बीच बड़े पैमाने पर नकल के मामले सामने आने से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ताजा मामला वाशिम जिले का है, जहां एक जूनियर कॉलेज में फिजिक्स परीक्षा के दौरान कथित तौर पर सैकड़ों छात्रों द्वारा मास कॉपी किए जाने का खुलासा हुआ.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 16 फरवरी को एक सरप्राइज निरीक्षण के दौरान उजागर हुई. Shri Managiri Maharaj Junior College में फ्लाइंग स्क्वॉड ने फिजिक्स पेपर के दौरान निरीक्षण किया और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी. आरोप है कि लगभग 581 छात्रों ने सामूहिक रूप से नकल की.
इस मामले में परीक्षा केंद्र पर तैनात कम से कम 26 स्टाफ सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार संबंधित अधिकारियों ने उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव भी दिया है. छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जा रही है और बोर्ड के नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी सामने आए मामले
वाशिम की घटना अकेली नहीं है. इससे पहले बीड, छत्रपति संभाजीनगर और जालना जिलों में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
बीड जिला
बीड के चौसाला स्थित एक जूनियर कॉलेज में 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. आरोप है कि परीक्षा स्टाफ की मदद से छात्रों को नकल कराई जा रही थी. इनमें से 12 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है. बाद में ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी के दौरान और भी गड़बड़ियां पकड़ी गईं.
छत्रपति संभाजीनगर
जैतापुर के एक स्कूल में CCTV फुटेज से पुष्टि हुई कि छात्र एक-दूसरे की उत्तर पुस्तिकाओं से नकल कर रहे थे. इस मामले में 24 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई और 21 को सस्पेंड किया गया.
जालना और नांदेड़
जालना में तीन स्कूलों में अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद छह स्टाफ सदस्यों को निलंबित किया गया. वहीं नांदेड़ में एक परीक्षा केंद्र अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जहां निरीक्षण के दौरान कई खामियां पाई गईं.
बोर्ड का सख्त रुख
महाराष्ट्र बोर्ड के अंतरिम चेयरपर्सन नंदकुमार बेडसे ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.
शिक्षा व्यवस्था पर असर
लगातार सामने आ रहे मास कॉपी के मामलों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर चिंता बढ़ा दी है. हालांकि प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ाई जाएंगी.