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Medical Seats: मेडिकल एजुकेशन में नई छलांग, 2025-26 में MBBS और PG सीटों में बड़ा इजाफा, जानिए यहां डिटेल

Medical College Seats: केंद्र सरकार ने 2025-26 सेशन के लिए मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए 11,682 MBBS और 8,967 PG सीटों को मंजूरी दी है, साथ ही देशभर में 43 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: 2026-03-11 09:21:45

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Medical Seats: भारत में मेडिकल शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए देश में हजारों नई मेडिकल सीटों को मंजूरी दी गई है और कई नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य डॉक्टरों की बढ़ती जरूरत को पूरा करना और देश के दूरदराज इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अनुसार केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 सेशन के लिए 11,682 नई MBBS सीटों और 8,967 पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों को मंजूरी दी है. इसके साथ ही देशभर में 43 नए मेडिकल कॉलेजों को भी स्वीकृति दी गई है. इन आंकड़ों में मेडिकल कॉलेजों के अलावा AIIMS और अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) की सीटें भी शामिल हैं.

एक दशक में मेडिकल शिक्षा की क्षमता दोगुनी

मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में भारत की मेडिकल शिक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्ष 2014 में देश में कुल 387 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 818 हो चुके हैं. इसी अवधि में MBBS सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,28,976 हो गई है। वहीं PG सीटों की संख्या भी 31,185 से बढ़कर 85,020 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन बढ़ाने पर लगातार ध्यान दे रही है।

मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी की प्रक्रिया कैसे होती है

नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और सीटों में बढ़ोतरी के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है. इन आवेदनों का मूल्यांकन उसी शैक्षणिक वर्ष में किया जाता है जिसके लिए उन्हें दाखिल किया जाता है. NMC के अंतर्गत काम करने वाला मेडिकल असेसमेंट और रेटिंग बोर्ड (MARB) इन संस्थानों का मूल्यांकन करता है. मंजूरी से पहले संस्थानों की विस्तृत जांच की जाती है, जिसमें डिजिटल दस्तावेजों की जांच, आधार आधारित उपस्थिति रिकॉर्ड, हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) डेटा, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल होती है. जरूरत पड़ने पर सरप्राइज फिजिकल इंस्पेक्शन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी सत्यापन किया जाता है.

कम सेवा वाले क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज पर जोर

सरकार ने यह भी बताया कि जिला या रेफरल अस्पतालों से जुड़े नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए केंद्र प्रायोजित योजना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसका लक्ष्य विशेष रूप से कम स्वास्थ्य सुविधाओं वाले और आकांक्षी जिलों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है. इस योजना के तहत तीन चरणों में 157 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 41,332.41 करोड़ रुपये है. इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 26,715.84 करोड़ रुपये है, जिसमें से 23,246.10 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं. नॉर्थ-ईस्ट और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए फंडिंग पैटर्न 90:10 है, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 60:40 रखा गया है.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल सीटों से जुड़े आवेदन और अपीलों की समय पर प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय लगातार NMC के साथ समन्वय बनाए रखता है, ताकि काउंसलिंग शुरू होने से पहले सीट मैट्रिक्स उपलब्ध कराया जा सके.

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Written By: Munna Kumar
Last Updated: 2026-03-11 09:21:45

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Medical Seats: भारत में मेडिकल शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए देश में हजारों नई मेडिकल सीटों को मंजूरी दी गई है और कई नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य डॉक्टरों की बढ़ती जरूरत को पूरा करना और देश के दूरदराज इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अनुसार केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 सेशन के लिए 11,682 नई MBBS सीटों और 8,967 पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों को मंजूरी दी है. इसके साथ ही देशभर में 43 नए मेडिकल कॉलेजों को भी स्वीकृति दी गई है. इन आंकड़ों में मेडिकल कॉलेजों के अलावा AIIMS और अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) की सीटें भी शामिल हैं.

एक दशक में मेडिकल शिक्षा की क्षमता दोगुनी

मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में भारत की मेडिकल शिक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्ष 2014 में देश में कुल 387 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 818 हो चुके हैं. इसी अवधि में MBBS सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,28,976 हो गई है। वहीं PG सीटों की संख्या भी 31,185 से बढ़कर 85,020 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन बढ़ाने पर लगातार ध्यान दे रही है।

मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी की प्रक्रिया कैसे होती है

नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और सीटों में बढ़ोतरी के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है. इन आवेदनों का मूल्यांकन उसी शैक्षणिक वर्ष में किया जाता है जिसके लिए उन्हें दाखिल किया जाता है. NMC के अंतर्गत काम करने वाला मेडिकल असेसमेंट और रेटिंग बोर्ड (MARB) इन संस्थानों का मूल्यांकन करता है. मंजूरी से पहले संस्थानों की विस्तृत जांच की जाती है, जिसमें डिजिटल दस्तावेजों की जांच, आधार आधारित उपस्थिति रिकॉर्ड, हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) डेटा, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल होती है. जरूरत पड़ने पर सरप्राइज फिजिकल इंस्पेक्शन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी सत्यापन किया जाता है.

कम सेवा वाले क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज पर जोर

सरकार ने यह भी बताया कि जिला या रेफरल अस्पतालों से जुड़े नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए केंद्र प्रायोजित योजना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसका लक्ष्य विशेष रूप से कम स्वास्थ्य सुविधाओं वाले और आकांक्षी जिलों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है. इस योजना के तहत तीन चरणों में 157 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 41,332.41 करोड़ रुपये है. इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 26,715.84 करोड़ रुपये है, जिसमें से 23,246.10 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं. नॉर्थ-ईस्ट और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए फंडिंग पैटर्न 90:10 है, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 60:40 रखा गया है.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल सीटों से जुड़े आवेदन और अपीलों की समय पर प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय लगातार NMC के साथ समन्वय बनाए रखता है, ताकि काउंसलिंग शुरू होने से पहले सीट मैट्रिक्स उपलब्ध कराया जा सके.

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