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NCERT Book Controversy: CJI सूर्यकांत ने कक्षा 8वीं की किताब पर जताई नाराजगी, न्यायपालिका की साख पर कही ये बात

NCERT की कक्षा 8वीं की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय पर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा हुई. CJI सूर्यकांत ने कहा, न्यायिक प्रतिष्ठा को किसी भी हालत में आघात नहीं पहुंचेगा.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: February 25, 2026 11:46:55 IST

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NCERT Class 8th Book Controversy: एनसीईआरटी कक्षा 8वीं की नई किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में गंभीर चर्चा देखने को मिली. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक संस्थान की प्रतिष्ठा को किसी भी कीमत पर आघात नहीं पहुंचने दिया जाएगा.

नई पाठ्यपुस्तक में शामिल अध्याय में न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार के संदर्भ का उल्लेख किया गया है. इस सामग्री को लेकर बार और बेंच दोनों के बीच चिंता का माहौल बताया जा रहा है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि संस्थान की साख से जुड़ा संवेदनशील मामला है.

‘बार और बेंच दोनों चिंतित’

सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि बार और बेंच दोनों इस विषय को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि कुछ दिन इंतजार किया जाना चाहिए और कानून को अपना काम करने दिया जाए. उनके अनुसार, न्यायपालिका पर अनावश्यक टिप्पणी या ऐसी प्रस्तुति जो संस्थान की गरिमा को प्रभावित करे, स्वीकार्य नहीं होगी.

Kapil Sibal ने जताई आपत्ति

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए अदालत के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई. उन्होंने कहा कि वे बार की ओर से इस मामले को उठा रहे हैं और यह विषय व्यापक प्रभाव डाल सकता है. उनका कहना था कि बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में ऐसे विषयों को बेहद संतुलित और जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और संदेश

हालांकि अदालत ने तत्काल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया, लेकिन CJI ने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया जा सकता है. उनका स्पष्ट संदेश था कि न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

यह मामला शिक्षा और न्याय व्यवस्था दोनों के संतुलन से जुड़ा है. एक ओर पाठ्यपुस्तकों में संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा जरूरी मानी जाती है, तो दूसरी ओर न्यायिक गरिमा और संस्थागत सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं. फिलहाल इतना तय है कि यह बहस शिक्षा सामग्री की संवेदनशीलता और संस्थागत मर्यादा के बीच संतुलन पर नई चर्चा को जन्म दे चुकी है.

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